
- मई में किसान के घर मचाया था दो घंटे तक आतंक
- बुधवार रात चेकिंग के दौरान हुआ एनकाउंटर
- एनकाउंटर के बाद सबसे बड़ा सवाल—सीने में कैसे लगी गोली?
- अस्पताल बना छावनी, मीडिया से भी हुई नोकझोंक
- इमरजेंसी पर कब्जा, मरीजों को करना पड़ा इंतजार
- हथियार, बाइक और लाखों की ज्वैलरी बरामद
- एक दर्जन से ज्यादा मुकदमे, कई जिलों में था वांछित
उत्तर प्रदेश के बदायूं में 50 हजार रुपये के इनामी डकैत जितेंद्र उर्फ ढालू का पुलिस एनकाउंटर जितनी तेजी से चर्चा में आया, उससे कहीं ज्यादा अब इस मुठभेड़ पर उठ रहे सवाल सुर्खियां बटोर रहे हैं। एक ओर पुलिस इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बता रही है, तो दूसरी ओर एनकाउंटर की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर पुलिस आरोपी का पीछा कर रही थी, तो उसके सीने में सामने से गोली कैसे लगी?हालांकि पुलिस का कहना है कि बदमाश ने पहले फायरिंग की थी और जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। वहीं, एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि घटनाक्रम की विस्तृत जांच कराई जा रही है।
मई में किसान के घर मचाया था दो घंटे तक आतंक
मुठभेड़ में मारा गया जितेंद्र उर्फ ढालू वही डकैत था जिसने 18-19 मई की रात इस्लामनगर थाना क्षेत्र में किसान निजाकत के घर अपने सात हथियारबंद साथियों के साथ धावा बोला था।आधी रात को छत के रास्ते घर में घुसे बदमाशों ने पूरे परिवार को बंधक बना लिया। सबसे पहले किसान निजाकत को बेरहमी से पीटा गया। उनकी चीख सुनकर जब परिवार के अन्य सदस्य बाहर आए तो महिलाओं और बच्चों तक को नहीं बख्शा गया।डकैतों ने करीब दो घंटे तक पूरे घर में आतंक मचाया। एक साल के मासूम अली रजा को गन प्वाइंट पर लेकर पूरे परिवार को डराया-धमकाया और विरोध करने पर महिलाओं समेत छह लोगों को तमंचे की बट, लाठी और डंडों से बुरी तरह पीटा।इसके बाद बदमाश करीब आठ तोला सोना, ढाई से तीन किलो चांदी और लगभग सवा लाख रुपये की नकदी लूटकर फरार हो गए। इस वारदात ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी।
बुधवार रात चेकिंग के दौरान हुआ एनकाउंटर
पुलिस के मुताबिक बुधवार रात करीब नौ बजे सिविल लाइंस थाना पुलिस नई जेल के लिए प्रस्तावित भूमि के पास वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान बाइक सवार एक संदिग्ध युवक को रोकने का प्रयास किया गया।पुलिस का दावा है कि रुकने के बजाय आरोपी ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में गोली जितेंद्र उर्फ ढालू के सीने में लगी और वह मौके पर गिर पड़ा।इस दौरान दरोगा नीरज कुमार और सिपाही अविनाश चौधरी भी गोली लगने से घायल हो गए। तीनों को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने ढालू को मृत घोषित कर दिया। घायल पुलिसकर्मियों का इलाज जारी है और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
एनकाउंटर के बाद सबसे बड़ा सवाल—सीने में कैसे लगी गोली?
मुठभेड़ के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि आरोपी के सीने के बाईं ओर गोली लगी।कानूनी और पुलिस कार्रवाई पर नजर रखने वाले कई लोगों का सवाल है कि यदि आरोपी पुलिस से बचने के लिए भाग रहा था या पुलिस उसका पीछा कर रही थी, तो गोली सीधे सामने सीने में कैसे लगी?इस सवाल पर बदायूं की एसएसपी अंकिता शर्मा ने कहा कि आरोपी की बाइक फिसल गई थी और पूरे घटनाक्रम की जानकारी संबंधित पुलिस टीम से ली जा रही है। फिलहाल पुलिस अपनी कार्रवाई को पूरी तरह वैधानिक और आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बता रही है।
अस्पताल बना छावनी, मीडिया से भी हुई नोकझोंक
एनकाउंटर के बाद जिला अस्पताल को पूरी तरह पुलिस छावनी में बदल दिया गया। बदमाश को अस्पताल लाने से पहले ही भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था।जैसे ही घायल बदमाश को पुलिस अस्पताल लेकर पहुंची, मीडिया कर्मियों ने वीडियो बनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने पत्रकारों के मोबाइल और कैमरे छीनने की कोशिश की, जिससे मौके पर तीखी नोकझोंक हो गई।बाद में एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह ने पूरे मामले पर खेद जताया।
इमरजेंसी पर कब्जा, मरीजों को करना पड़ा इंतजार
पुलिस सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त थी कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी को लगभग एक घंटे तक पुलिस ने अपने नियंत्रण में रखा।इस दौरान सांस लेने में तकलीफ से पीड़ित एक युवती और मारपीट में घायल एक अन्य मरीज को इलाज के लिए बाहर इंतजार करना पड़ा। मरीजों के परिजनों ने भी इस व्यवस्था पर नाराजगी जताई।
हथियार, बाइक और लाखों की ज्वैलरी बरामद
पुलिस ने ढालू के कब्जे से .32 बोर की पिस्टल, एक तमंचा, बड़ी संख्या में कारतूस, एक अपाचे बाइक और लाखों रुपये की ज्वैलरी बरामद करने का दावा किया है।बरामद आभूषणों की पहचान कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे किन-किन वारदातों से जुड़े हैं।

एक दर्जन से ज्यादा मुकदमे, कई जिलों में था वांछित
जितेंद्र उर्फ ढालू मूल रूप से हापुड़ के धौलाना क्षेत्र का रहने वाला था, जबकि हाल के दिनों में उसने संभल को अपना ठिकाना बना लिया था।उसके खिलाफ बदायूं, अमरोहा, नोएडा, दनकौर समेत कई जिलों में डकैती, लूट और अन्य गंभीर अपराधों के एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज थे।इस्लामनगर डकैती कांड के बाद पहले उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। बाद में उसकी लगातार फरारी और आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए डीआईजी बरेली रेंज ने इनाम बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया था।अब पुलिस इस एनकाउंटर को बड़ी सफलता बता रही है, लेकिन मुठभेड़ की परिस्थितियों, सीने में गोली लगने और घटनास्थल पर मीडिया की एंट्री रोकने जैसे सवालों ने इस कार्रवाई को नई बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में जांच के बाद ही साफ हो सकेगा कि यह एनकाउंटर पूरी तरह पुलिस के दावे के अनुरूप था या फिर उठ रहे सवालों के पीछे कोई और कहानी छिपी है।
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