लखनऊ उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में शनिवार 31 अक्टूबर को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया। राज्य सरकार ने 15 आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव करते हुए कई वरिष्ठ अफसरों को नई जिम्मेदारी सौंपी है, जबकि कुछ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल को नागरिक उड्डयन विभाग के अपर मुख्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। वहीं, अनुराग श्रीवास्तव को कृषि उत्पादन आयुक्त बनाया गया है। इस फेरबदल में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, वित्त, कृषि, सिंचाई, मानवाधिकार आयोग और विभिन्न निगमों से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर भी बदलाव किए गए हैं।सरकार के इस फैसले में पांच अधिकारियों के स्थानांतरण और दस अधिकारियों के कार्यभार में बदलाव की जानकारी सामने आई है। एम. देवराज को राज्य सतर्कता आयोग एवं प्रशासनाधिकरण-1 के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। डॉ. एमकेएस सुंदरम को प्रमुख सचिव समन्वय की जिम्मेदारी मिली है। आलोक कुमार-2 को अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त बनाया गया है, जबकि आलोक कुमार-3 को प्रमुख सचिव वित्त का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। इसके अलावा अजय चौहान, कृष्ण कुमार, योगेश कुमार और प्रवीण मिश्रा समेत कई अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं।
- मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल को नागरिक उड्डयन का अतिरिक्त प्रभार
- आलोक कुमार-2 बने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त
- आलोक कुमार-3 को वित्त विभाग की जिम्मेदारी, अजय चौहान को यूपीडा का चार्ज
- जल निगम और पीसीडीएफ में बदले प्रबंध निदेशक
- कृष्ण कुमार बने झांसी मंडल के मंडलायुक्त
- मानवाधिकार आयोग, प्रशासनिक सुधार और निगम में नई तैनाती
- प्रशासनिक फेरबदल से विभागीय कामकाज पर नजर


मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल को नागरिक उड्डयन का अतिरिक्त प्रभार
प्रशासनिक फेरबदल में सबसे प्रमुख बदलाव मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल के कार्यभार में हुआ है। उन्हें मुख्य सचिव की मौजूदा जिम्मेदारी के साथ अपर मुख्य सचिव, नागरिक उड्डयन विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इससे नागरिक उड्डयन विभाग की प्रशासनिक निगरानी की जिम्मेदारी भी उनके पास रहेगी।अनुराग श्रीवास्तव को कृषि उत्पादन आयुक्त नियुक्त किया गया है। उनके पास अपर मुख्य सचिव, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की जिम्मेदारी भी बनी रहेगी। इसके अलावा लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल और ग्रामीण पेयजल मिशन से जुड़े कार्यभार भी उनके पास रहेंगे। कृषि उत्पादन आयुक्त का पद प्रदेश में कृषि क्षेत्र से जुड़ी नीतियों और विभागीय समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

आलोक कुमार-2 बने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त
आलोक कुमार-2 को अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके पास अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के साथ एनआरआई विभाग और पिकप के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा।एम. देवराज को प्रमुख सचिव, नियुक्ति एवं कार्मिक की मौजूदा जिम्मेदारी के साथ राज्य सतर्कता आयोग एवं प्रशासनाधिकरण-1 के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इस बदलाव के तहत सतर्कता और प्रशासनिक मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल होंगे।डॉ. एमकेएस सुंदरम को प्रमुख सचिव, समन्वय बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें यूपीडास्प के परियोजना निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। उनके पास कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान तथा कृषि विपणन से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी भी रहेगी।
आलोक कुमार-3 को वित्त विभाग की जिम्मेदारी, अजय चौहान को यूपीडा का चार्ज
आलोक कुमार-3 को प्रमुख सचिव, वित्त के साथ संस्थागत वित्त और बाढ़ सहायता परियोजना का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इससे पहले उनके पास नियोजन, कार्यक्रम कार्यान्वयन और आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभागों की जिम्मेदारी थी। अब वित्तीय प्रबंधन और संबंधित परियोजनाओं से जुड़े कार्यों की निगरानी भी उनके जिम्मे होगी।प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग अजय चौहान को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वह पहले से ही उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण (उपशा) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। नए कार्यभार के बाद एक्सप्रेसवे और सड़क विकास से जुड़े प्रशासनिक दायित्वों में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।पंधारी यादव को बाढ़ सहायता परियोजना के प्रमुख सचिव पद के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। वह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से जुड़े अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे।
जल निगम और पीसीडीएफ में बदले प्रबंध निदेशक
सरकार ने निगमों के स्तर पर भी अहम बदलाव किया है। योगेश कुमार को उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक पद से स्थानांतरित कर प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (पीसीडीएफ) का प्रबंध निदेशक बनाया गया है। अमित कुमार सिंह को पीसीडीएफ से हटाकर उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है। इस तरह दोनों अधिकारियों की जिम्मेदारियों की अदला-बदली की गई है। जल निगम ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल योजनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण संस्थान है, जबकि पीसीडीएफ प्रदेश में सहकारी डेयरी व्यवस्था से संबंधित कार्य करता है।
कृष्ण कुमार बने झांसी मंडल के मंडलायुक्त
कृष्ण कुमार को झांसी मंडल का नया मंडलायुक्त बनाया गया है। इससे पहले वह सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के सचिव और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के मुख्य कार्यपालक अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।चंद्र शेखर को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का मुख्य कार्यपालक अधिकारी बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें ग्रेटर शारदा सहायक समादेश क्षेत्र विकास प्राधिकरण के प्रशासक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। सिंचाई और कृषि से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिहाज से यह बदलाव महत्वपूर्ण है।
मानवाधिकार आयोग, प्रशासनिक सुधार और निगम में नई तैनाती
भूपेंद्र एस. चौधरी को सचिव, प्रशासनिक सुधार के पद से स्थानांतरित कर उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग का सचिव बनाया गया है। वहीं, प्रतीक्षारत चल रहे देवेंद्र सिंह कुशवाहा को विशेष सचिव, प्रशासनिक सुधार की जिम्मेदारी सौंपी गई है।प्रवीण मिश्रा को उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें निदेशक, जनजाति विकास का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। इससे पहले वह समाज कल्याण विभाग में विशेष सचिव और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग में सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
प्रशासनिक फेरबदल से विभागीय कामकाज पर नजर
उत्तर प्रदेश सरकार के इस फेरबदल में शासन के शीर्ष स्तर से लेकर मंडल, विभागों और निगमों तक जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास किया गया है। कृषि उत्पादन आयुक्त, वित्त, औद्योगिक विकास, नागरिक उड्डयन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कार्यभार बदलने से आने वाले समय में इन क्षेत्रों की प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर नजर रहेगी।इस सूची में सभी अधिकारियों का पूर्ण स्थानांतरण नहीं हुआ है। कई वरिष्ठ अधिकारियों को उनके मौजूदा पदों के साथ अतिरिक्त जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि कुछ अधिकारियों को नए पदों पर भेजा गया है। अब देखना होगा कि नई जिम्मेदारियों के साथ अधिकारी विभागीय योजनाओं और सरकारी परियोजनाओं को किस गति से आगे बढ़ाते हैं।
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