यूपी के 9 जिलों में श्रमिकों की हाजिरी पर सवाल, कांग्रेस ने मांगी जांच

Editorial
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लखनऊ उत्तर प्रदेश में वीबी-जी राम जी योजना के तहत श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया पर कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने आरोप लगाया कि प्रदेश के नौ जिलों में श्रमिकों की हाजिरी में कथित अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने फर्जी उपस्थिति दर्ज करने, पुरानी या एक जैसी तस्वीरें अपलोड करने और काम पर नहीं पहुंचने वाले श्रमिकों को उपस्थित दिखाने के आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।गुरुवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आराधना मिश्रा ने अयोध्या, संभल, हरदोई, गाजीपुर, महाराजगंज, चंदौली, गाजियाबाद, बहराइच और जालौन में कथित गड़बड़ियों का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ स्थानों पर श्रमिकों की उपस्थिति और उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड में सवाल खड़े करने वाली स्थिति सामने आई है। कांग्रेस ने संबंधित दस्तावेजों, उपस्थिति रिकॉर्ड और तस्वीरों की जांच कराकर जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मामले में सरकारी रिकॉर्ड की जांच और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

नौ जिलों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आराधना मिश्रा ने दावा किया कि प्रदेश के नौ जिलों में श्रमिकों की हाजिरी दर्ज करने को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। कांग्रेस के मुताबिक, कुछ जगहों पर पुरानी तस्वीरों या एक जैसी तस्वीरों का इस्तेमाल किए जाने और वास्तविक काम के बिना श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज होने की आशंका हैकांग्रेस अध्यक्ष ने इन मामलों को गंभीर बताते हुए कहा कि योजना के तहत श्रमिकों की उपस्थिति और कामकाज से जुड़े रिकॉर्ड की जांच होनी चाहिए। यदि किसी स्थान पर गलत तरीके से उपस्थिति दर्ज की गई है, तो यह पता लगाना जरूरी है कि ऐसा कैसे हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।इस मामले में अयोध्या, संभल, हरदोई, गाजीपुर, महाराजगंज, चंदौली, गाजियाबाद, बहराइच और जालौन का उल्लेख किया गया। पार्टी ने इन जिलों में संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।प्रत्येक जिले में कथित अनियमितता की प्रकृति और उसकी पुष्टि से संबंधित विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होना अभी आवश्यक है।

 यूपी के 9 जिलों में श्रमिकों की हाजिरी पर सवाल
यूपी के 9 जिलों में श्रमिकों की हाजिरी पर सवाल

संभल में 5,587 श्रमिकों की हाजिरी पर सवाल

कांग्रेस ने संभल जिले का उल्लेख करते हुए 5,587 श्रमिकों की उपस्थिति से जुड़ी कथित गड़बड़ी का दावा किया। आराधना मिश्रा ने इस मामले में करीब 16 लाख रुपये की राशि का हवाला देते हुए रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग उठाई।इस दावे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों के उपस्थिति रजिस्टर, डिजिटल रिकॉर्ड, कार्यस्थल की तस्वीरों और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों का मिलान जरूरी होगा। जांच से ही यह पता चल सकेगा कि दर्ज उपस्थिति और वास्तविक काम में कोई अंतर था या नहीं तथा बताई गई राशि का संबंध किस प्रकार की कथित अनियमितता से है।यदि जांच में गलत उपस्थिति दर्ज करने या नियमों के विपरीत भुगतान किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका निर्धारित की जा सकती है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों को जांच के दायरे में आने वाले दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

हरदोई की 13 ग्राम पंचायतों में 894 श्रमिकों का मामला

हरदोई जिले को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए। आराधना मिश्रा के मुताबिक, जिले की 13 ग्राम पंचायतों में 894 श्रमिकों की हाजिरी को लेकर संदेह है। उन्होंने इन रिकॉर्ड की जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की।इस मामले में यह देखना जरूरी होगा कि संबंधित ग्राम पंचायतों में किन कार्यों के लिए श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज की गई थी। साथ ही, काम की स्वीकृति, कार्यस्थल की तस्वीरों, उपस्थिति रिकॉर्ड और भुगतान के विवरण का मिलान भी जांच का हिस्सा होना चाहिए।ग्रामीण रोजगार योजनाओं में उपस्थिति का सही रिकॉर्ड श्रमिकों के अधिकारों और सरकारी धन के उचित इस्तेमाल से जुड़ा होता है। इसलिए यदि किसी रिकॉर्ड में विसंगति मिलती है, तो उसकी वजह पता लगाना और आवश्यक सुधार करना महत्वपूर्ण है। हालांकि, केवल आरोप सामने आने से अनियमितता प्रमाणित नहीं मानी जा सकती।

बारिश और बाढ़ के दौरान भी उपस्थिति दर्ज होने का आरोप

कांग्रेस ने कुछ स्थानों पर बारिश और बाढ़ के दौरान श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज किए जाने पर भी सवाल उठाए। आराधना मिश्रा ने आरोप लगाया कि परिस्थितियों के बावजूद कुछ रिकॉर्ड में श्रमिकों को काम पर उपस्थित दिखाया गया।इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित तारीखों के मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के साथ काम से जुड़े दस्तावेजों का मिलान करना आवश्यक होगा। केवल बारिश या बाढ़ होने से यह अपने आप साबित नहीं होता कि काम नहीं हुआ था। जांच में यह देखना होगा कि संबंधित स्थान पर काम वास्तव में हुआ या नहीं, श्रमिक वहां मौजूद थे या नहीं और उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की गई।यदि रिकॉर्ड और वास्तविक परिस्थितियों में गंभीर अंतर मिलता है, तो संबंधित विभाग को उसका स्पष्टीकरण देना चाहिए। पारदर्शी जांच से ही आरोपों की सच्चाई सामने आ सकती है और भविष्य में ऐसी शिकायतों को रोकने के उपाय किए जा सकते हैं।

प्रियंका गुप्ता समेत पार्टी नेताओं की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस

लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस मीडिया विभाग की उपाध्यक्ष प्रियंका गुप्ता सहित पार्टी के अन्य नेता मौजूद रहे। इस दौरान श्रमिकों की हाजिरी से जुड़े कथित मामलों को उठाते हुए संबंधित विभाग से जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई।कांग्रेस का कहना है कि उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए। पार्टी ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों के संबंध में संबंधित सरकारी विभाग का पक्ष उपलब्ध नहीं है।इसलिए मामले की पूरी तस्वीर सामने लाने के लिए विभागीय प्रतिक्रिया, आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। यदि संबंधित विभाग जांच शुरू करता है, तो उसके दायरे और निष्कर्षों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन स्थानों पर रिकॉर्ड में विसंगतियां थीं और क्या किसी नियम का उल्लंघन हुआ।

श्रमिकों के अधिकार और सरकारी धन की निगरानी का सवाल

श्रमिकों की उपस्थिति का सही रिकॉर्ड किसी भी रोजगार योजना के प्रभावी संचालन के लिए जरूरी है। इसमें गड़बड़ी होने पर वास्तविक श्रमिकों के अधिकार प्रभावित होने और सरकारी धन के उपयोग पर सवाल उठने की आशंका रहती है। इसीलिए उपस्थिति, कार्यस्थल की तस्वीरों और भुगतान के रिकॉर्ड का नियमित सत्यापन महत्वपूर्ण माना जाता है।यदि किसी योजना में पुरानी तस्वीरों के दोबारा इस्तेमाल या गलत उपस्थिति दर्ज करने की शिकायत मिलती है, तो संबंधित रिकॉर्ड की तकनीकी और दस्तावेजी जांच कराई जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि समस्या किसी तकनीकी त्रुटि, रिकॉर्ड तैयार करने में लापरवाही या जानबूझकर की गई गड़बड़ी से जुड़ी थी।

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