मेरठ छात्रा हत्याकांड में बवाल: 3 घंटे जाम, SSP ने प्रदर्शनकारियों पर दिखाई सख्ती, थप्पड़ और लाठीचार्ज के बाद मचा हड़कंप

Editorial
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मेरठ उत्तर प्रदेश के मेरठ में बीए छात्रा की हत्या के मामले ने बुधवार को उस समय बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया, जब पीड़ित परिवार और उनके समर्थकों ने कलक्ट्रेट के बाहर सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। करीब तीन घंटे तक चले इस प्रदर्शन के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। इसी बीच मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडे का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति को थप्पड़ मारते दिखाई दे रहे हैं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद पूरे प्रदेश में इस कार्रवाई को लेकर बहस छिड़ गई है।यह पूरा मामला टीपीनगर थाना क्षेत्र की बीए छात्रा की हत्या से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार छात्रा 15 मई को स्नातक की परीक्षा देने के लिए घर से निकली थी, लेकिन कॉलेज नहीं पहुंची। जांच में सामने आया कि रोहटा थाना क्षेत्र के कल्याणपुर गांव निवासी अंकुश उसे अपने साथ ले गया। आरोप है कि उसने छात्रा पर शादी का दबाव बनाया और इनकार करने पर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने मुख्य आरोपी अंकुश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। साथ ही खेत मालिक आदेश और एक अन्य व्यक्ति को साक्ष्य मिटाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

हालांकि पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस हत्याकांड में केवल एक आरोपी नहीं, बल्कि कई अन्य लोग भी शामिल हैं। परिजनों का कहना है कि मुख्य आरोपी के भाई, जो पीएसी में सिपाही है, उसकी मां और अन्य लोगों की भी भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिवार ने मामले में सामूहिक दुष्कर्म की धाराएं जोड़ने और विवेचना में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई।इन्हीं मांगों को लेकर पीड़ित परिवार कई दिनों से चौधरी चरण सिंह पार्क में धरना दे रहा था। बुधवार को बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ परिवार कलक्ट्रेट पहुंचा और जिलाधिकारी से मिलने की कोशिश की। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस ने कलक्ट्रेट के मुख्य गेट बंद कर दिए, जिससे प्रदर्शनकारी नाराज हो गए और बीच सड़क पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। देखते ही देखते मुख्य मार्ग पर लंबा जाम लग गया और शहर का यातायात बुरी तरह प्रभावित हो गया।

मौके पर एसपी देहात अभिजीत कुमार, एसपी ट्रैफिक राजेश श्रीवास्तव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक जाम समाप्त करने और ज्ञापन देने की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। धरने में युवा शक्ति दल से जुड़े रवि गौतम और भारतीय किसान यूनियन अंबेडकर के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह भाटी भी मौजूद थे।पुलिस अधिकारियों के अनुसार कई बार समझाने के बावजूद जब सड़क खाली नहीं हुई तो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडे स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने पहले प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन जब कोई सहमति नहीं बनी तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद पुलिस ने सड़क खाली कराने के लिए बल प्रयोग किया और लाठीचार्ज किया।

सबसे अधिक चर्चा उस समय हुई जब एसएसपी अविनाश पांडे का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह बंदी वाहन के भीतर हिरासत में लिए गए रवि गौतम को थप्पड़ मारते दिखाई दिए। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। घटना के दौरान रवि गौतम ने कथित रूप से अपने गमछे से फंदा लगाने की भी कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें कड़ी निगरानी में रखा।पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन पूरी तरह बिना अनुमति आयोजित किया गया था और इसमें कई बाहरी संगठन भी शामिल थे। मेरठ पुलिस के मुताबिक सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बुलाया गया था। अधिकारियों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने कई बार चेतावनी के बावजूद सड़क खाली नहीं की और सरकारी कार्य में बाधा डाली।

एसएसपी अविनाश पांडे ने कहा कि पुलिस ने संयम के साथ स्थिति संभालने का प्रयास किया, लेकिन कुछ लोगों ने भीड़ को उकसाया और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उनके अनुसार सड़क जाम के कारण आम लोगों को भारी परेशानी हुई और यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान धक्का-मुक्की और हाथापाई में दो दरोगा सहित 11 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि एक महिला दरोगा की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई।घटना के बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए 13 नामजद और लगभग 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इनमें बिना अनुमति प्रदर्शन, सड़क जाम, सरकारी कार्य में बाधा डालना, पुलिसकर्मियों पर हमला, शांति व्यवस्था भंग करना और सोशल मीडिया के माध्यम से कथित भ्रामक जानकारी फैलाने जैसी धाराएं शामिल हैं।

पुलिस ने रवि गौतम, अरविंद कुमार, ऋतिक गौतम, नवनीत कुमार, अंकित कुमार, हिमांशु सिद्धार्थ और लवि उर्फ शुभम समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है और पुलिस लगातार दबिश दे रही है।इस बीच पुलिस के हाथ कुछ वीडियो भी लगे हैं। अधिकारियों के मुताबिक एक वीडियो में रवि गौतम कथित तौर पर कलक्ट्रेट पहुंचकर आत्मदाह करने की बात कहते दिखाई दे रहे हैं। वहीं हिरासत में लिए जाने के बाद बंदी वाहन से बनाए गए लाइव वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनकी जांच की जा रही है।

घटना के बाद एक और तथ्य सामने आया कि रवि गौतम फिलहाल एआईएमआईएम के सक्रिय सदस्य नहीं हैं। पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विधानसभा उपचुनाव के बाद पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें संगठन से निष्कासित किया जा चुका था। हालांकि प्रदर्शन के दौरान कई लोग उन्हें एआईएमआईएम नेता के रूप में संबोधित करते रहे।फिलहाल मेरठ छात्रा हत्याकांड केवल हत्या की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर भी बड़ा मुद्दा बन गया है। एक ओर पीड़ित परिवार निष्पक्ष जांच, सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और गंभीर धाराएं जोड़ने की मांग पर अड़ा है, तो दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष रूप से की जा रही है और कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।अब पूरे मामले पर प्रदेशभर की नजर टिकी है। छात्रा को न्याय दिलाने की मांग, प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, एसएसपी के वायरल वीडियो और दर्ज मुकदमों ने इस मामले को उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित घटनाक्रमों में शामिल कर दिया है। आने वाले दिनों में अदालत और जांच एजेंसियों की कार्रवाई तय करेगी कि इस पूरे विवाद का अगला अध्याय क्या होगा।

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