संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खुलकर सामने आया। अमेरिका ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर की जा रही कथित क्रूर कार्रवाई को लेकर तीखी चेतावनी दी। अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प “सिर्फ बातें नहीं करते, बल्कि एक्शन लेते हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान में प्रदर्शनकारियों पर हो रहे दमन को रोकने के लिए अमेरिका के पास सभी विकल्प खुले हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान में आर्थिक संकट और महंगाई के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन जारी हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें वहां की स्थिति पर टिकी हुई हैं।
अमेरिका का आरोप – ईरान अपने ही लोगों से डर रहा है
अमेरिकी प्रतिनिधि माइक वॉल्ट्ज ने UNSC में कहा कि ईरान सरकार इंटरनेट ब्लैकआउट के जरिए सच्चाई को दुनिया से छिपाने की कोशिश कर रही है। उनके मुताबिक, इंटरनेट बंद होने के कारण यह आकलन करना मुश्किल हो गया है कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर कितनी सख्ती की है।
उन्होंने ईरान सरकार के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें विरोध प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ बताया जा रहा है। वॉल्ट्ज ने कहा कि ऐसे आरोप यह दिखाते हैं कि ईरानी नेतृत्व अपने ही नागरिकों से भयभीत है और जिम्मेदारी दूसरों पर डालना चाहता है।
व्हाइट हाउस का दावा – ट्रम्प के दबाव से रुकीं फांसियां
H3: 800 लोगों की फांसी की योजना रोकने का दावा
व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि राष्ट्रपति ट्रम्प के दबाव के चलते ईरान ने करीब 800 लोगों को फांसी देने की योजना पर रोक लगा दी है। ट्रम्प ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्याएं जारी रहीं, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
गुरुवार को ट्रम्प ने कहा कि हाल के दिनों में हिंसा की घटनाओं में कमी आई है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं।
H3: संयुक्त राष्ट्र की चिंता
संयुक्त राष्ट्र की सहायक महासचिव मार्था पोबी ने परिषद को बताया कि ये प्रदर्शन बहुत तेजी से पूरे देश में फैले हैं। उन्होंने कहा कि अब तक भारी जान-माल का नुकसान हुआ है और हजारों लोग मारे गए या गिरफ्तार किए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने सभी फांसियों पर रोक और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ईरान का जवाब – टकराव नहीं चाहते, लेकिन चुप नहीं रहेंगे
अमेरिकी आरोपों को बताया गलत
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उप-राजदूत गुलाम हुसैन दर्जी ने अमेरिका के सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका गलत जानकारी फैला रहा है और जानबूझकर हालात को हिंसक बनाने की कोशिश कर रहा है।
दर्जी ने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी तरह का टकराव नहीं चाहता, लेकिन अगर अमेरिका या उसके सहयोगियों की ओर से कोई आक्रामक कदम उठाया गया, तो ईरान “निर्णायक और कानूनी जवाब” देगा।
मानवाधिकारों की आड़ में साजिश का आरोप
ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका मानवाधिकारों का मुद्दा उठाकर शासन बदलने की साजिश कर रहा है। ईरानी प्रतिनिधि ने अमेरिका के भीतर हुए मानवाधिकार उल्लंघनों का भी जिक्र किया और कहा कि अमेरिका को पहले अपने घर की स्थिति सुधारनी चाहिए।
रूस, फ्रांस और ब्रिटेन की प्रतिक्रिया
रूस ने अमेरिका की कड़ी आलोचना की। संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजदूत वासिली नेबेंजिया ने कहा कि अमेरिका UNSC का इस्तेमाल ईरान के आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि सैन्य कार्रवाई से पूरा मध्य पूर्व क्षेत्र अस्थिर हो सकता है।
वहीं, फ्रांस और ब्रिटेन ने ईरान में प्रदर्शनकारियों पर हो रही कार्रवाई को क्रूर बताया। फ्रांस ने संकेत दिए कि अगर हालात नहीं सुधरे तो ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध
UNSC बैठक के साथ ही अमेरिका ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की। ट्रम्प प्रशासन ने 18 ईरानी व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी भी शामिल हैं।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ये प्रतिबंध उन लोगों पर लगाए गए हैं, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की योजना बनाई थी। अमेरिका का कहना है कि वह ईरान के आम लोगों के साथ खड़ा है, न कि वहां की सरकार के।
ईरान में ऐतिहासिक डिजिटल ब्लैकआउट
180 घंटे से ज्यादा इंटरनेट बंद
साइबर निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, ईरान में 8 जनवरी से लगभग पूरे देश में इंटरनेट बंद है। 16 जनवरी 2026 तक यह ब्लैकआउट 180 घंटे से ज्यादा समय तक चल चुका है, जो ईरान के इतिहास के सबसे लंबे डिजिटल ब्लैकआउट्स में से एक माना जा रहा है।
तेहरान, इस्फहान, शिराज और अन्य बड़े शहरों में कनेक्टिविटी सामान्य स्तर से घटकर 1% से भी कम रह गई है। इससे करीब 9 करोड़ लोग दुनिया से कट गए हैं।
विरोध प्रदर्शनों पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट बंद होने से लोग आपस में संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और दमन की खबरें बाहर नहीं पहुंच पा रहीं। इसे विरोध प्रदर्शनों को दबाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
ईरान में प्रदर्शन क्यों भड़के?
ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए ये प्रदर्शन कई कारणों से भड़के हैं। महंगाई 50 से 70 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक गिरावट पर है। व्यापारियों की हड़ताल, बेरोजगारी और सरकार के खिलाफ गुस्सा इन प्रदर्शनों की बड़ी वजह माने जा रहे हैं।
कई प्रदर्शनकारी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं और राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं। सरकार की सख्त कार्रवाई ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है।

