वेदांता का नंद घर: 5 लाख बच्चों तक पोषण पहल का लाभ

Editorial
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लखनऊ बच्चों को बेहतर पोषण, माताओं को जरूरी जानकारी और परिवारों को स्वस्थ खानपान के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में वेदांता की सामाजिक पहल ‘नंद घर’ काम कर रही है। 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के समापन अवसर पर नंद घर ने पोषण को केवल सरकारी कार्यक्रम या जागरूकता अभियान तक सीमित न रखकर परिवार और समुदाय की साझा जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया। ‘नंद घर का मिशन, संपूर्ण पोषण’ के तहत आयोजित गतिविधियों के जरिए बच्चों, माताओं, पिताओं और देखभालकर्ताओं को पोषण संबंधी जानकारी देने तथा रोजमर्रा की जिंदगी में स्वस्थ आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।अनिल अग्रवाल फाउंडेशन की प्रमुख पहल नंद घर आधुनिक और तकनीक-सक्षम केंद्रों के माध्यम से आंगनवाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। संस्था के अनुसार, 18 राज्यों में 16,000 से अधिक नंद घर संचालित हैं, जिनके जरिए पांच लाख से अधिक बच्चों और चार लाख महिलाओं के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने का लक्ष्य लेकर काम किया जा रहा है।

माताओं को सशक्त बनाकर कुपोषण से मुकाबले पर जोर

नंद घर की सीईओ शशि अरोड़ा ने कहा कि चेयरमैन अनिल अग्रवाल का दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चे को बेहतर पोषण, शिक्षा और देखभाल के अवसर मिलें। साथ ही, महिलाओं को स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य के निर्माण के लिए सशक्त बनाया जाए।उन्होंने कहा कि कुपोषण की समस्या से प्रभावी तरीके से मुकाबला करने के लिए जागरूक माताओं, सहयोगी परिवारों और महिलाओं को आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। जब महिलाओं के पास सही जानकारी, निर्णय लेने की क्षमता और आर्थिक अवसर होते हैं, तो इसका सकारात्मक असर बच्चों और पूरे परिवार पर पड़ता है। भारत सरकार के पोषण अभियान 2.0 की भावना के अनुरूप नंद घर का उद्देश्य पोषण को एक सतत सामुदायिक आंदोलन बनाना है, ताकि स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी आदतें घर-घर तक पहुंच सकें।

वेदांता का नंद घर
वेदांता का नंद घर

18 राज्यों में 16 हजार से अधिक नंद घर

नंद घर में पोषण के साथ प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और महिला सशक्तीकरण को भी जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य बच्चों के समग्र विकास और महिलाओं की सामाजिक तथा आर्थिक भूमिका को मजबूत करने के लिए एकीकृत सुविधाएं उपलब्ध कराना है।संस्था के अनुसार, देश के 18 राज्यों में 16,000 से अधिक नंद घर संचालित हैं। इन केंद्रों के माध्यम से पांच लाख से अधिक बच्चों और चार लाख महिलाओं के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया जा रहा है।इस पहल में पोषण संबंधी जागरूकता के साथ बच्चों की शुरुआती शिक्षा और देखभाल को भी महत्व दिया जाता है। वहीं, महिलाओं को स्वास्थ्य, पोषण और अपने परिवार से जुड़े फैसलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

‘स्वस्थ मां, स्वस्थ बच्चा’ की सोच पर विशेष ध्यान

नंद घर की पहल में मातृ स्वास्थ्य को बच्चों के पोषण से जोड़कर देखा जाता है। संस्था का मानना है कि बच्चे के खानपान और विकास पर मां के स्वास्थ्य, पोषण संबंधी जानकारी और निर्णय लेने की क्षमता का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान माताओं और देखभालकर्ताओं के लिए विशेषज्ञों के साथ संवाद आयोजित किए गए। पोषण विशेषज्ञ डॉ. वंदना वर्मा के साथ हुए विशेष सत्र में बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों, संतुलित आहार और दैनिक भोजन में पौष्टिक सामग्री शामिल करने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा की गई।इन सत्रों के जरिए माताओं को सवाल पूछने, अपने अनुभव साझा करने और बच्चों के खानपान से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। पहल का उद्देश्य परिवारों को ऐसे विकल्पों के प्रति जागरूक करना है, जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाया जा सके।

मां की रसोई से बच्चों की थाली तक पहुंचे पोषण

नंद घर का ‘मदर्स फूड प्रिपरेशन प्रोग्राम’ स्थानीय महिलाओं के पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक भागीदारी के जरिए पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इस कार्यक्रम में माताएं मिलकर भोजन तैयार करने, पौष्टिक सामग्री के इस्तेमाल और बच्चों के लिए बेहतर खानपान की आदतों पर काम करती हैं।संस्था की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस कार्यक्रम से अब तक लगभग दो लाख माताएं जुड़ चुकी हैं और इसके माध्यम से करीब 15 लाख भोजन परोसे जा चुके हैं।यह कार्यक्रम केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए माताओं को भोजन की पौष्टिकता समझने, स्थानीय खाद्य सामग्री का उपयोग करने और बच्चों की खानपान संबंधी जरूरतों पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।सामूहिक रूप से भोजन तैयार करने की गतिविधियां महिलाओं को अपने अनुभव साझा करने का अवसर भी देती हैं। इससे पोषण संबंधी जानकारी परिवारों तक पहुंचाने और बच्चों के खानपान में बेहतर आदतें विकसित करने में मदद मिल सकती है।

पोषण को परिवार और समुदाय की साझा जिम्मेदारी बनाने की पहल

राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान नंद घर की गतिविधियों में बच्चों के साथ परिवार के अन्य सदस्यों को भी शामिल करने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि बच्चों का पोषण केवल मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समुदाय की भागीदारी से जुड़ा विषय है।भारत सरकार का पोषण अभियान 2.0 भी पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है। इसी दिशा में नंद घर परिवारों को संतुलित आहार, बच्चों की देखभाल और स्वस्थ खानपान की आदतों के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रहा है।कुपोषण जैसी चुनौती से निपटने के लिए जागरूकता के साथ पौष्टिक भोजन की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और परिवारों की आर्थिक स्थिति जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में सामुदायिक कार्यक्रमों की भूमिका के साथ व्यापक स्तर पर निरंतर प्रयास जरूरी हैं।

पोषण से बेहतर भविष्य की ओर

राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के समापन पर नंद घर ने मातृ एवं बाल पोषण को मजबूत करने और परिवारों को स्वस्थ आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। 16,000 से अधिक केंद्रों, विशेषज्ञों के साथ संवाद और माताओं की भागीदारी वाले भोजन कार्यक्रमों के जरिए संस्था पोषण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दे रही है।नंद घर की पहल का मूल संदेश है कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिलाओं का सशक्तीकरण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। स्वस्थ खानपान की जानकारी जब परिवारों तक पहुंचती है और उसे रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाया जाता है, तभी लंबे समय तक सकारात्मक बदलाव की संभावनाएं मजबूत होती हैं।

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