10 साल की कानूनी जंग का अंत! Johnson & Johnson ने 76 हजार मुकदमों पर किया 5.5 अरब डॉलर का ऐतिहासिक समझौता

Editorial
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दुनिया भर में करोड़ों परिवारों के लिए Johnson & Johnson का बेबी पाउडर भरोसे और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता था। नवजात बच्चों से लेकर बड़ों तक, यह सफेद टैल्कम पाउडर दशकों तक हर घर का हिस्सा रहा। लेकिन इसी बेबी पाउडर ने कंपनी को दुनिया की सबसे लंबी और सबसे महंगी कानूनी लड़ाइयों में धकेल दिया।करीब 10 वर्षों तक चली अदालती जंग, 76 हजार से ज्यादा मुकदमे, कैंसर के गंभीर आरोप और अंततः 5.5 अरब डॉलर (लगभग 5.5 बिलियन डॉलर) के ऐतिहासिक समझौते ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।हालांकि कंपनी आज भी यह मानने को तैयार नहीं है कि उसके टैल्क उत्पादों से कैंसर होता है, लेकिन लगातार चल रही कानूनी लड़ाई और बढ़ते मुकदमों के बीच उसने समझौते का रास्ता चुना। यह फैसला केवल आर्थिक नहीं बल्कि कंपनी की साख और भविष्य की रणनीति से भी जुड़ा माना जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

पूरा विवाद Johnson & Johnson के टैल्कम बेबी पाउडर और अन्य टैल्क आधारित उत्पादों से जुड़ा है।पिछले एक दशक में अमेरिका समेत कई देशों की हजारों महिलाओं ने अदालतों का दरवाजा खटखटाया। उनका आरोप था कि लंबे समय तक कंपनी के टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल करने से उन्हें ओवेरियन (डिम्बग्रंथि) कैंसर हुआ।वादियों का कहना था कि पाउडर में मौजूद कुछ तत्व स्वास्थ्य के लिए खतरनाक थे और कंपनी ने संभावित जोखिमों की जानकारी उपभोक्ताओं से छिपाई।हालांकि Johnson & Johnson लगातार इन आरोपों को खारिज करती रही और दावा करती रही कि उसके सभी उत्पाद वैज्ञानिक परीक्षणों में सुरक्षित पाए गए हैं।

76 हजार मुकदमों का होगा निपटारा

अब कंपनी ने लगभग 76,000 लंबित मुकदमों को खत्म करने के लिए 5.5 अरब डॉलर के समझौते की घोषणा की है।यह समझौता अमेरिका की संघीय अदालतों और विभिन्न राज्य अदालतों में चल रहे अधिकांश टैल्क संबंधित मामलों को कवर करेगा।इससे पहले भी कंपनी एस्बेस्टस और मेसोथेलियोमा से जुड़े कई मामलों का अलग से निपटारा कर चुकी है, लेकिन यह अब तक का सबसे बड़ा समझौता माना जा रहा है।

कंपनी क्यों झुकी?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कंपनी लगातार अदालतों में कई मामलों में जीत दर्ज कर रही थी, तब उसने समझौता क्यों किया?विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई बड़े कारण हैं।पहला लगातार मुकदमों के कारण कंपनी की छवि प्रभावित हो रही थी।दूसरा कानूनी लड़ाई पर हर साल अरबों डॉलर खर्च हो रहे थे।तीसरा कंपनी अब अपना पूरा ध्यान नई दवाओं और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के विकास पर केंद्रित करना चाहती है।यानी अदालतों में वर्षों तक लड़ने के बजाय कंपनी ने विवाद खत्म करना ज्यादा बेहतर समझा।

क्या कंपनी ने गलती स्वीकार की?

इस समझौते का मतलब यह नहीं है कि Johnson & Johnson ने अपने ऊपर लगे आरोप स्वीकार कर लिए हैं।

कंपनी की लीगल टीम ने साफ कहा है कि—

  • उसके उत्पाद सुरक्षित हैं,
  • कैंसर के आरोप निराधार हैं,
  • और यदि मुकदमे चलते रहते तो भी कंपनी जीत सकती थी।

इसके बावजूद विवाद को हमेशा के लिए समाप्त करने के उद्देश्य से समझौते का फैसला लिया गया।

5.5 अरब डॉलर से भी बढ़ सकती है रकम

हालांकि अभी समझौते की घोषित राशि 5.5 अरब डॉलर है, लेकिन अंतिम भुगतान इससे कहीं अधिक हो सकता है।

कानूनी विशेषज्ञों का अनुमान है कि—

  • भुगतान कई चरणों में होगा।
  • वर्ष 2027 में लगभग 3 अरब डॉलर दिए जा सकते हैं।
  • इसके बाद 2028 और आगे भी भुगतान जारी रहेगा।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कुल भुगतान 7 अरब डॉलर या उससे अधिक तक पहुंच सकता है।

95 प्रतिशत दावेदारों की मंजूरी जरूरी

यह समझौता तभी पूरी तरह लागू होगा जब कम से कम 95 प्रतिशत दावेदार इसकी लिखित स्वीकृति देंगे।यदि पर्याप्त संख्या में लोग सहमत नहीं होते, तो प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।इसलिए आने वाले महीनों में दावेदारों की प्रतिक्रिया बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

2020 में ही बंद कर दी थी बिक्री

दिलचस्प बात यह है कि Johnson & Johnson ने वर्ष 2020 में अमेरिका में टैल्क आधारित बेबी पाउडर की बिक्री बंद कर दी थी।बाद में कंपनी ने कॉर्नस्टार्च आधारित वैकल्पिक उत्पादों पर अधिक जोर देना शुरू कर दिया।विशेषज्ञ मानते हैं कि कंपनी पहले ही अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में बदलाव कर चुकी थी, इसलिए लंबे कानूनी विवाद को जारी रखने का व्यावसायिक लाभ भी कम रह गया था।

‘टेक्सास टू स्टेप’ रणनीति भी नहीं आई काम

इस विवाद से बचने के लिए कंपनी ने पहले एक चर्चित कानूनी रणनीति अपनाई थी, जिसे “Texas Two-Step” कहा जाता है।इसके तहत कंपनी ने एक अलग सहायक इकाई बनाकर दिवालियापन की याचिका दाखिल की, ताकि मुकदमों से राहत मिल सके।लेकिन अमेरिकी अदालतों ने इस रणनीति को स्वीकार नहीं किया और कंपनी के प्रयासों को खारिज कर दिया।इसके बाद कंपनी के पास समझौते का रास्ता अपनाने के अलावा सीमित विकल्प बचे।

क्या टैल्कम पाउडर से सचमुच कैंसर होता है?

यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है।अब तक वैज्ञानिक समुदाय में इस विषय पर अलग-अलग राय सामने आती रही हैं।कुछ शोधों में लंबे समय तक टैल्कम पाउडर के उपयोग और ओवेरियन कैंसर के बीच संभावित संबंध की चर्चा की गई, जबकि कई अन्य अध्ययनों में ऐसा स्पष्ट निष्कर्ष नहीं निकला।Johnson & Johnson का कहना है कि उसके उत्पाद सुरक्षित हैं और वैज्ञानिक प्रमाण उन्हें कैंसर का कारण नहीं बताते।इसलिए यह समझौता किसी वैज्ञानिक निष्कर्ष की पुष्टि नहीं माना जा सकता।

दुनिया की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट कानूनी लड़ाइयों में शामिल

विशेषज्ञ इस पूरे विवाद को कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े प्रोडक्ट लायबिलिटी (उत्पाद दायित्व) मामलों में गिन रहे हैं।दस साल तक चली कानूनी लड़ाई ने यह भी दिखाया कि किसी बड़े ब्रांड के लिए केवल अदालत में जीत हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उपभोक्ताओं का भरोसा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होता है।

क्या होगा आगे?

अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि कितने दावेदार इस समझौते को स्वीकार करते हैं।यदि आवश्यक 95 प्रतिशत मंजूरी मिल जाती है, तो आने वाले लगभग 18 महीनों के भीतर पात्र दावेदारों को भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।वहीं Johnson & Johnson इस विवाद से बाहर निकलकर अपने मुख्य कारोबार—नई दवाओं, चिकित्सा अनुसंधान और हेल्थकेयर इनोवेशन—पर फोकस करना चाहेगी।

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