PoJK चुनाव पर भारत का प्रहार! पाकिस्तान को दुनिया के सामने कर दिया बेनकाब

Editorial
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नई दिल्ली पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में कराए जा रहे तथाकथित विधानसभा चुनावों को लेकर भारत ने बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह चुनाव किसी भी दृष्टि से वैध नहीं हैं और इनका उद्देश्य केवल पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैध दिखाने की नाकाम कोशिश करना है। भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा केंद्र शासित प्रदेश, जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में कराए जा रहे तथाकथित विधानसभा चुनावों से जुड़ी खबरों पर गौर किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की चुनावी कवायद न तो वास्तविक स्थिति बदल सकती है और न ही पाकिस्तान के अवैध कब्जे को कोई वैधता प्रदान कर सकती है।

‘दिखावटी चुनाव से नहीं बदल सकती सच्चाई’

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान चुनावों का सहारा लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन वास्तविकता यह है कि जिस क्षेत्र में चुनाव कराए जा रहे हैं, वह भारत का अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान वहां अवैध तथा जबरन कब्जा किए हुए है।उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की यह पूरी प्रक्रिया केवल एक दिखावा है, जिसका मकसद अवैध कब्जे पर पर्दा डालना और दुनिया का ध्यान वहां की वास्तविक परिस्थितियों से हटाना है। भारत ने स्पष्ट कर दिया कि चुनाव कराने से किसी भी तरह क्षेत्र की कानूनी स्थिति में बदलाव नहीं होगा।

मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपाने का आरोप

भारत ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनावों के जरिए वहां हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों, प्रशासनिक दमन और स्थानीय लोगों के आर्थिक शोषण को छिपाने की कोशिश की जा रही है।रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ये प्रदर्शन इस बात का प्रमाण हैं कि वहां के लोग आर्थिक बदहाली, मौलिक अधिकारों से वंचित किए जाने और प्रशासनिक दमन से परेशान हैं। ऐसे में चुनावों का आयोजन लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने का माध्यम बन गया है।

भारत ने दोहराया अपना पुराना और स्पष्ट रुख

भारत लंबे समय से यह कहता आया है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। नई दिल्ली का मानना है कि पाकिस्तान द्वारा उस क्षेत्र में किए जाने वाले प्रशासनिक या राजनीतिक कदमों का कोई कानूनी महत्व नहीं है।विदेश मंत्रालय ने फिर दोहराया कि भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है और किसी भी परिस्थिति में पाकिस्तान के ऐसे कदमों को स्वीकार नहीं करेगा।

PoJK में बढ़ता असंतोष भी चर्चा का विषय

विदेश मंत्रालय ने इस बात की ओर भी संकेत किया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में लंबे समय से स्थानीय लोगों का असंतोष बढ़ रहा है। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी सुविधाओं और राजनीतिक अधिकारों को लेकर लोग लगातार आवाज उठा रहे हैं। कई स्थानों पर महंगाई, बिजली संकट, कर व्यवस्था और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं।भारत का कहना है कि ऐसे हालात में चुनाव कराना लोकतंत्र का उत्सव नहीं, बल्कि जनता की वास्तविक समस्याओं को दबाने का प्रयास है।

भारत-चीन संबंधों पर भी हुई चर्चा

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय ने भारत-चीन संबंधों पर भी जानकारी साझा की। रणधीर जायसवाल ने बताया कि अगस्त 2025 में दोनों देशों के बीच तीन प्रमुख व्यापारिक मार्गों—लिपुलेख दर्रा, शिपकी ला दर्रा और नाथू ला दर्रा—के माध्यम से सीमा व्यापार दोबारा शुरू करने पर सहमति बनी थी।उन्होंने बताया कि विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 27 और 28 जुलाई को चीन की आधिकारिक यात्रा की। इस दौरान उन्होंने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सुन हैयान से मुलाकात की। बैठक में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के मार्गदर्शन के अनुरूप द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।इसके अलावा विदेश सचिव ने चीन की विदेश मामलों की उप मंत्री हुआ चुनयिंग से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।

सीमा पर शांति बनाए रखने पर सहमति

विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व को स्वीकार किया। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने चीनी जन राजनीतिक परामर्श सम्मेलन की 14वीं राष्ट्रीय समिति के उप महासचिव हांग लियांग और राष्ट्रीय अकादमी (केंद्रीय पार्टी स्कूल) के उपाध्यक्ष ली वेंटांग से भी मुलाकात की।इन बैठकों में भविष्य के सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और आपसी विश्वास बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई। भारत ने स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने की बुनियादी शर्त है।

पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश

PoJK चुनावों पर भारत की प्रतिक्रिया केवल एक कूटनीतिक बयान नहीं, बल्कि उसकी लंबे समय से चली आ रही नीति की पुनर्पुष्टि है। नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान चाहे जितनी चुनावी कवायद कर ले, उससे न तो कब्जे वाले क्षेत्र की वास्तविक स्थिति बदलेगी और न ही भारत अपने संवैधानिक और ऐतिहासिक दावे से पीछे हटेगा।विदेश मंत्रालय के ताजा बयान ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि भारत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की संप्रभुता को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान PoJK में मानवाधिकारों, स्थानीय जनता की परेशानियों और पाकिस्तान के अवैध कब्जे की ओर आकर्षित करने की अपनी नीति भी जारी रखेगा।

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