पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के हालिया बयान के बाद भारत की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाते हुए भारत को चेतावनी देने वाले मुनीर के बयान को सुरक्षा एजेंसियां केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि संभावित सुरक्षा चुनौती के संकेत के रूप में भी देख रही हैं। इसी के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सख्त कर दी गई है।सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। विशेष रूप से सांबा, कठुआ, जम्मू, राजौरी, शोपियां और डोडा जैसे संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
सिंधु जल संधि के बहाने पाकिस्तान का नया संदेश?
रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान सेना मुख्यालय (जीएचक्यू) में आयोजित कोर कमांडर्स सम्मेलन के दौरान आसिम मुनीर ने सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान इस मामले को हर स्तर पर उठाएगा।विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान केवल कूटनीतिक संदेश नहीं होते, बल्कि कई बार इनका संबंध सीमा पर गतिविधियों और सुरक्षा रणनीति से भी जोड़ा जाता है। यही वजह है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को हल्के में नहीं ले रही हैं।

पीओके में बिगड़ते हालात, क्या ध्यान भटकाने की कोशिश?
सुरक्षा एजेंसियों का आकलन है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आर्थिक संकट, राजनीतिक असंतोष और स्थानीय विरोध लगातार बढ़ रहा है।ऐसी स्थिति में पाकिस्तान की सेना अक्सर सीमा पर तनाव बढ़ाकर घरेलू मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश करती रही है। यही कारण है कि एजेंसियां आशंका जता रही हैं कि सीमापार से घुसपैठ, ड्रोन गतिविधियों या आतंकियों की घुसपैठ के प्रयास बढ़ सकते हैं।हालांकि इस संबंध में किसी नई घुसपैठ की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा बल एहतियात के तौर पर पूरी तरह सतर्क हैं।
एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हाई अलर्ट
भारत ने जम्मू-कश्मीर से लगी नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी कई गुना बढ़ा दी है।
सुरक्षा एजेंसियों ने—
- संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाई है।
- निगरानी उपकरणों को सक्रिय किया है।
- तकनीकी सर्विलांस मजबूत किया है।
- सीमा से लगे इलाकों में अतिरिक्त जवान तैनात किए हैं।
- संदिग्ध गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियों का उद्देश्य किसी भी संभावित घुसपैठ की कोशिश को शुरुआती स्तर पर ही विफल करना है।

बीएसएफ का एंटी-टनल ऑपरेशन तेज
सीमा सुरक्षा बल ने विशेष रूप से सांबा और कठुआ सेक्टर में एंटी-टनल अभियान तेज कर दिया है।
दरअसल पिछले कई वर्षों में पाकिस्तान की ओर से सुरंगों के जरिए आतंकियों और हथियारों की घुसपैठ कराने की कोशिशें सामने आती रही हैं।
इसी अनुभव को देखते हुए अब—
- भूमिगत गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।
- आधुनिक तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।
- संदिग्ध स्थानों की नियमित जांच की जा रही है।
- सीमा के नीचे बनने वाली संभावित सुरंगों का पता लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
सांबा और कठुआ क्यों हैं सबसे संवेदनशील?
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार सांबा, कठुआ और जम्मू सेक्टर लंबे समय से घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं।पूर्व में कई मामलों में ऐसी सुरंगें सामने आ चुकी हैं, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर—
- आतंकियों की घुसपैठ,
- हथियारों की तस्करी,
- विस्फोटकों की सप्लाई,
- मादक पदार्थों की तस्करी
के लिए किया जाता रहा है।इसी कारण इन क्षेत्रों में निगरानी लगातार और मजबूत की जा रही है।
संयुक्त तलाशी अभियान भी हुआ तेज
सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के बाद भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने कई जिलों में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
विशेष रूप से—
- शोपियां
- राजौरी
- डोडा
- पलनवाला
- एलओसी से लगे नदी-नालों वाले इलाके
में कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन (CASO) चलाया जा रहा है।
कुछ इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों और ड्रोन देखे जाने की सूचनाओं के बाद भी तलाशी अभियान तेज किया गया है। हालांकि, इन अभियानों के परिणामों को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
विशेषज्ञ बोले— पाकिस्तान की रणनीति पुरानी, लेकिन भारत पहले से ज्यादा तैयार
सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह जमवाल का मानना है कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करता आया है।उनके अनुसार अब भारत की सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है।
उनका कहना है कि—
- सीमा पर आधुनिक तकनीक का उपयोग हो रहा है।
- ड्रोन निगरानी बढ़ी है।
- इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस मजबूत हुआ है।
- विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर हुआ है।
ऐसे में यदि पाकिस्तान किसी नई रणनीति के तहत घुसपैठ की कोशिश भी करता है, तो उसे सफल होना आसान नहीं होगा।
भारत की रणनीति— सतर्कता, तकनीक और त्वरित कार्रवाई
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने सीमा सुरक्षा को लेकर कई बड़े कदम उठाए हैं।
इनमें शामिल हैं—
- स्मार्ट फेंसिंग
- नाइट विजन उपकरण
- ड्रोन निगरानी
- थर्मल इमेजिंग कैमरे
- एंटी-टनल तकनीक
- संयुक्त ऑपरेशन
विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों से घुसपैठ की घटनाओं को रोकने में काफी मदद मिली है।
बयान से ज्यादा महत्वपूर्ण है सुरक्षा तैयारियां
आसिम मुनीर के हालिया बयान के बाद भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है। फिलहाल किसी बड़े घुसपैठ अभियान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा बल पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के हालात, सीमा पार की गतिविधियां और हालिया बयानबाजी को देखते हुए भारत ने एहतियाती कदम उठाए हैं। सांबा, कठुआ, राजौरी, शोपियां और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ी निगरानी इसी रणनीति का हिस्सा है।आने वाले दिनों में सुरक्षा एजेंसियों की जांच, खुफिया इनपुट और सीमा पर हालात यह तय करेंगे कि यह केवल बयानबाजी थी या इसके पीछे किसी बड़ी रणनीति के संकेत छिपे थे। फिलहाल सुरक्षा बल किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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