UP में स्कूलों को लेकर बड़ा ऐलान! खाली भवनों का बदलेगा इस्तेमाल, शिक्षा मंत्री का बड़ा खुलासा

Editorial
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लखनऊ उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों को लेकर शुरू हुई सियासी बहस के बीच प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बड़ा बयान देते हुए साफ किया है कि सरकार स्कूलों को बंद नहीं कर रही, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का पास के स्कूलों में विलय किया जाएगा, जबकि खाली होने वाले विद्यालयों में पहली बार प्री-प्राइमरी पाठशालाएं संचालित की जाएंगी।यह बयान ऐसे समय आया है जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालय बंद किए जा रहे हैं और गोरखपुर क्षेत्र में ही सैकड़ों स्कूलों को बंद कर दिया गया है। शिक्षा मंत्री ने इन आरोपों को राजनीतिक बताते हुए सरकार की शिक्षा नीति और उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख किया।

क्या बंद हो रहे हैं स्कूल? सरकार ने दिया स्पष्ट जवाब

संदीप सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित करना नहीं है। जिन विद्यालयों में छात्रों की संख्या बहुत कम है, उन्हें पास के विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा ताकि बच्चों को बेहतर संसाधन, योग्य शिक्षक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।उन्होंने स्पष्ट किया कि खाली होने वाले स्कूल भवनों को बंद नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि वहां प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू की जाएंगी। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश में पहली बार लागू की जा रही है।

पहली बार शुरू होगी प्री-प्राइमरी शिक्षा व्यवस्था

शिक्षा मंत्री ने कहा कि अब सरकारी विद्यालयों में छोटे बच्चों की शुरुआती शिक्षा को भी मजबूत किया जाएगा। अभी तक अधिकांश प्री-प्राइमरी शिक्षा निजी संस्थानों तक सीमित थी, लेकिन अब सरकार इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बना रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चों के मानसिक, भाषाई और सामाजिक विकास की मजबूत नींव तैयार करती है। ऐसे में सरकारी स्तर पर प्री-प्राइमरी कक्षाओं की शुरुआत एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अखिलेश यादव के आरोपों पर पलटवार

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक प्राथमिक विद्यालय बंद किए गए हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संसदीय क्षेत्र गोरखपुर में भी बड़ी संख्या में स्कूलों का संचालन प्रभावित हुआ है।इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी विद्यालय को बिना योजना के बंद नहीं कर रही, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से पुनर्गठन कर रही है। उन्होंने कहा कि कम छात्रों वाले विद्यालयों का विलय एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

शिक्षा बजट में चार गुना से अधिक बढ़ोतरी का दावा

संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार ने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकार के समय शिक्षा बजट लगभग 28 हजार करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर अब 1.13 लाख करोड़ रुपये से अधिक कर दिया गया है।उनके अनुसार यह बढ़ा हुआ बजट विद्यालयों के विकास, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, शिक्षकों की व्यवस्था और नई योजनाओं पर खर्च किया जा रहा है।

नामांकन में हुआ बड़ा इजाफा

शिक्षा मंत्री ने दावा किया कि सरकारी विद्यालयों में छात्रों का भरोसा बढ़ा है।

उन्होंने बताया कि—

  • पहले सरकारी स्कूलों में लगभग 1.34 करोड़ छात्रों का नामांकन था।
  • अब यह संख्या बढ़कर 1.90 करोड़ तक पहुंच गई है।

सरकार का कहना है कि विद्यालयों में बेहतर सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के कारण अभिभावकों का विश्वास बढ़ा है।

ड्रॉपआउट दर में भारी कमी

सरकार ने यह भी दावा किया कि विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है।

मंत्री के अनुसार—

  • पहले ड्रॉपआउट दर लगभग 19 प्रतिशत थी।
  • अब यह घटकर करीब 3 प्रतिशत रह गई है।

यदि यह आंकड़े सही हैं, तो यह प्राथमिक शिक्षा में बड़ा बदलाव माना जाएगा। हालांकि इन आंकड़ों पर विभिन्न राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों की अलग-अलग राय भी हो सकती है।

ऑपरेशन कायाकल्प से बदली स्कूलों की तस्वीर

संदीप सिंह ने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से सरकारी विद्यालयों में व्यापक सुधार किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि विद्यालयों में—

  • शौचालयों का निर्माण,
  • स्वच्छ पेयजल,
  • बिजली,
  • फर्नीचर,
  • स्मार्ट क्लास,
  • खेल सामग्री,
  • साफ-सफाई,
  • रंग-रोगन,
  • डिजिटल सुविधाओं

जैसे कई क्षेत्रों में सुधार हुआ है।सरकार का दावा है कि पहले जहां केवल 36 प्रतिशत मानकों का पालन हो रहा था, वहीं अब यह स्तर बढ़कर 97 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

नकल पर सख्ती का भी किया जिक्र

शिक्षा मंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक जैसी घटनाएं आम थीं।उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने नकल रोकने के लिए सख्त कदम उठाए और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि पहले लागू किए गए नकल विरोधी प्रावधानों को पूर्व सरकार ने समाप्त कर दिया था।

राजनीतिक बहस हुई तेज

विद्यालयों के विलय और शिक्षा सुधार को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है।एक ओर विपक्ष इसे सरकारी स्कूलों को बंद करने की नीति बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, संसाधन-संपन्न और आधुनिक बनाने के लिए उठाया जा रहा है।आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर जनता के बीच भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।

नई शिक्षा नीति की दिशा में बड़ा कदम?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का विलय करते समय बच्चों की पढ़ाई, परिवहन और पहुंच जैसी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान किया जाए तथा खाली भवनों में गुणवत्तापूर्ण प्री-प्राइमरी शिक्षा शुरू की जाए, तो इससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।हालांकि इस नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे ज़मीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है।उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूलों को बंद करने के बजाय शिक्षा व्यवस्था का पुनर्गठन किया जा रहा है। कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का विलय किया जाएगा और खाली होने वाले भवनों में पहली बार प्री-प्राइमरी पाठशालाएं शुरू की जाएंगी। सरकार इसे शिक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे स्कूल बंद करने की नीति करार दे रहा है। अब इस योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बच्चों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित पहुंच और आधुनिक सुविधाएं कितनी प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जाती हैं।

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