मेरठ मेरठ में तत्कालीन SSP अविनाश पांडेय को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। दो किसान नेताओं मोहित जाटव और दिग्विजय भाटी ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि दोनों को SSP कार्यालय बुलाया गया, जहां कथित तौर पर गाली-गलौज के बाद कमरे का दरवाजा बंद कर दिया गया और करीब डेढ़ घंटे तक उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद दोनों को SOG के हवाले किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।मामले में SOG इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। किसान नेताओं की ओर से दावा किया गया है कि हिरासत के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और दिग्विजय भाटी को कथित तौर पर पैर बांधकर उल्टा लटकाया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
SSP कार्यालय में बुलाने का आरोप
किसान नेताओं की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, मोहित जाटव और दिग्विजय भाटी को तत्कालीन SSP अविनाश पांडेय के कार्यालय में बुलाया गया था। आरोप है कि बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और कथित रूप से गाली-गलौज के बाद दोनों के साथ मारपीट की गई।किसान नेताओं का दावा है कि कार्यालय का दरवाजा बंद कर दिया गया था और करीब डेढ़ घंटे तक उनके साथ मारपीट हुई। इसके बाद उन्हें SOG के हवाले किए जाने का आरोप लगाया गया।मामले में सबसे गंभीर सवाल इसी अवधि को लेकर उठाए जा रहे हैं कि SSP कार्यालय के भीतर वास्तव में क्या हुआ था और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका क्या थी।
SOG इंस्पेक्टर पर भी गंभीर आरोप
मामले में SOG इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि SOG परिसर में भी दोनों किसान नेताओं के साथ कथित तौर पर मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया।दिग्विजय भाटी की ओर से लगाए गए आरोपों में उन्हें पैर बांधकर उल्टा लटकाने जैसी गंभीर बात भी शामिल है। किसान नेताओं ने पुलिस हिरासत के दौरान उनके साथ किए गए व्यवहार को लेकर सवाल उठाए हैं।यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला पुलिस हिरासत में मानवाधिकार और पुलिस आचरण से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दिग्विजय की आंख पर सूजन की तस्वीरें सामने आईं
मामले को लेकर दिग्विजय भाटी की आंख पर सूजन वाली तस्वीरें भी सामने आने की बात कही गई है। इन तस्वीरों के आधार पर किसान नेताओं ने कथित मारपीट के आरोपों को गंभीर बताया है।हालांकि, किसी चोट की तस्वीर अपने आप में यह साबित नहीं करती कि चोट किस परिस्थिति में लगी। इसलिए मामले में मेडिकल रिपोर्ट, चिकित्सकीय परीक्षण और अन्य साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

मेडिकल परीक्षण को लेकर भी उठे सवाल
किसान नेताओं ने कथित हिरासत के बाद कराए गए मेडिकल परीक्षण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मेडिकल जांच की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल हैं और इसे लेकर स्पष्टता जरूरी है।ऐसे मामलों में मेडिकल रिपोर्ट को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। इसलिए जांच एजेंसियों के सामने यह चुनौती होगी कि घटना के समय, हिरासत की अवधि और मेडिकल परीक्षण के बीच की पूरी टाइमलाइन को स्पष्ट किया जाए।
CCTV फुटेज की जांच क्यों अहम?
इस पूरे मामले में SSP कार्यालय और SOG परिसर के CCTV कैमरों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। किसान नेताओं का कहना है कि यदि संबंधित स्थानों पर CCTV कैमरे लगे थे तो घटना से जुड़ी अवधि की फुटेज जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।जांच में यह देखा जाना जरूरी होगा कि संबंधित कैमरे उस समय चालू थे या नहीं, रिकॉर्डिंग सुरक्षित है या नहीं और घटना के दौरान दोनों किसान नेताओं की गतिविधियां कैमरे में दर्ज हुई थीं या नहीं।CCTV फुटेज उपलब्ध होने की स्थिति में यह घटनाक्रम की टाइमलाइन स्थापित करने में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकती है।
अविनाश पांडेय को मेरठ से हटाया गया
इस विवाद के बीच तत्कालीन SSP अविनाश पांडेय को मेरठ से हटाकर DGP मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। पुलिस विभाग में हुए तबादलों के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है।हालांकि किसी अधिकारी का स्थानांतरण अपने आप में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं करता। आरोपों की सच्चाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही तय होगी।
किसान नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की
किसान नेताओं की ओर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि यदि पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।वहीं पूरे प्रकरण में पुलिस पक्ष और संबंधित अधिकारियों का विस्तृत जवाब भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि दोनों पक्षों की बात सामने आ सके।
जांच में किन बिंदुओं पर रहेगा फोकस?
मेरठ के इस विवाद में जांच के दौरान कई सवालों के जवाब तलाशे जाने की जरूरत है। मसलन, दोनों किसान नेताओं को SSP कार्यालय क्यों बुलाया गया था? कार्यालय में उनके साथ कौन-कौन मौजूद था? CCTV कैमरों में क्या रिकॉर्ड हुआ? SOG को उन्हें सौंपने की प्रक्रिया क्या थी? हिरासत के दौरान उनके साथ कैसा व्यवहार हुआ और मेडिकल परीक्षण कब कराया गया?इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।मेरठ में किसान नेताओं के साथ कथित मारपीट का यह मामला अब पुलिस विभाग के लिए भी संवेदनशील विषय बन गया है। तत्कालीन SSP अविनाश पांडेय और SOG इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ पर लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन फिलहाल इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। मामले में CCTV फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, पुलिस रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयान जांच की दिशा तय करेंगे।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित हिरासत के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और क्या CCTV व अन्य साक्ष्यों से पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ पाएगी। जांच के निष्कर्ष के बाद ही तय होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।
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