आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे को मिली रफ्तार, किसानों को 50 करोड़ अधिक मुआवजा; अब सिर्फ एक घंटे का होगा सफर

Editorial
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आगरा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच सड़क संपर्क को नई ऊंचाई देने वाली आगरा-ग्वालियर सिक्सलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है। लंबे समय से भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर चल रहा विवाद सुलझने के बाद अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है। सबसे बड़ी राहत यह है कि प्रभावित किसानों का मुआवजा 50 करोड़ रुपये बढ़ा दिया गया है, जिससे फतेहाबाद और खेरागढ़ तहसील के 12 गांवों के 627 किसानों को पहले से कहीं अधिक भुगतान मिलेगा।करीब 88 किलोमीटर लंबे इस सिक्सलेन एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद आगरा से ग्वालियर का सफर महज एक घंटे में पूरा किया जा सकेगा। यह परियोजना न केवल यात्रा को तेज और सुरक्षित बनाएगी, बल्कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच आर्थिक, औद्योगिक और पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति देगी।

मुआवजा बढ़ने से खत्म हुआ गतिरोध

एक्सप्रेसवे के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों की नाराजगी थी। आगरा जिले में लगभग 14 किलोमीटर क्षेत्र की जमीन अधिग्रहित की जानी थी। शुरुआत में किसानों के लिए 144 करोड़ रुपये का मुआवजा तय किया गया था, लेकिन प्रभावित किसानों ने इसे अपर्याप्त बताते हुए विरोध शुरू कर दिया।किसानों ने जमीन पर कब्जा देने से इनकार कर दिया और 148 मध्यस्थता वाद दायर किए। कई दौर की बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के बाद 80 से अधिक मामलों का समाधान हो गया। इसके बाद प्रशासन ने किसानों की मांगों पर विचार करते हुए मुआवजा बढ़ाने का फैसला लिया।अब कुल 195 करोड़ रुपये किसानों को दिए जाएंगे, यानी पहले की तुलना में 50 करोड़ रुपये अधिक। इस फैसले के बाद परियोजना के सामने खड़ी सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है।

4,613 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना

आगरा के देवरी गांव से शुरू होकर मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के सुसेरा गांव तक बनने वाला यह एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे राष्ट्रीय राजमार्ग-719D (NH-719D) का हिस्सा होगा।करीब 4,613 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का निर्माण बीओटी (Build-Operate-Transfer) यानी टोल मॉडल पर किया जाएगा। इसके लिए जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड के साथ 20 वर्ष का रियायत समझौता किया गया है। निर्माण अवधि लगभग 30 महीने निर्धारित की गई है।हालांकि भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण परियोजना लगभग सात महीने पीछे चली गई थी। अब मुआवजा विवाद सुलझने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।

तीन राज्यों को मिलेगा सीधा लाभ

यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश को हाई-स्पीड कॉरिडोर के जरिए जोड़ेगा।इसके निर्माण के बाद:

  • आगरा से ग्वालियर की दूरी कम समय में तय होगी।
  • धौलपुर और मुरैना जैसे क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा।
  • दिल्ली-आगरा-ग्वालियर कॉरिडोर की यातायात क्षमता बढ़ेगी।
  • मौजूदा एनएच-44 पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा।
  • औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

सिर्फ सड़क नहीं, आधुनिक इंजीनियरिंग का नमूना

यह एक्सप्रेसवे केवल तेज रफ्तार सड़क नहीं होगा, बल्कि अत्याधुनिक इंजीनियरिंग का भी उदाहरण बनेगा।

परियोजना के तहत:

  • 8 बड़े पुल
  • 23 छोटे पुल
  • 6 फ्लाईओवर
  • 1 रेलवे ओवरब्रिज
  • 192 पुलिया

का निर्माण किया जाएगा।इन सभी संरचनाओं को आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है ताकि यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम बन सके।

चंबल के घड़ियालों की सुरक्षा का भी रखा गया ध्यान

इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है।चूंकि एक्सप्रेसवे राष्ट्रीय चंबल वन्यजीव अभयारण्य के क्षेत्र से होकर गुजरेगा, इसलिए वन्यजीवों, विशेषकर घड़ियालों के संरक्षण के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।चंबल नदी पर बनने वाले केबल-स्टे ब्रिज में:

  • ध्वनि अवरोधक (Noise Barriers)
  • विशेष लाइट कटर
  • पर्यावरण अनुकूल डिजाइन

का उपयोग किया जाएगा ताकि वन्यजीवों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।

किसानों को मिली बड़ी राहत

मुआवजा बढ़ने के फैसले से प्रभावित किसानों में राहत का माहौल है। लंबे समय से चल रहे विवाद के कारण परियोजना अटकी हुई थी। अब बढ़े हुए मुआवजे से अधिकांश किसानों की सहमति बनने के बाद भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।प्रशासन का कहना है कि भुगतान की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और इसके लिए प्रस्ताव राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को भेजा जा रहा है।

आगरा बनेगा पांच एक्सप्रेसवे वाला देश का पहला शहर

आगरा पहले से ही उत्तर भारत का महत्वपूर्ण सड़क नेटवर्क केंद्र है।

फिलहाल शहर:

  • यमुना एक्सप्रेसवे
  • आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे

से जुड़ा हुआ है।इसके अलावा प्रस्तावित:

  • आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे
  • आगरा-बरेली एक्सप्रेसवे
  • आगरा-अलीगढ़ एक्सप्रेसवे

के निर्माण के बाद आगरा देश का पहला ऐसा शहर बन सकता है, जहां पांच एक्सप्रेसवे जुड़ेंगे।इससे आगरा की पहचान केवल पर्यटन नगरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह राष्ट्रीय परिवहन और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में भी उभर सकता है।

व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बड़ा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद:

  • ताजमहल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है।
  • ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
  • माल ढुलाई की लागत कम होगी।
  • उद्योगों को तेज परिवहन सुविधा मिलेगी।
  • निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

प्रशासन का क्या कहना है?

एडीएम (प्रशासन) आजाद भगत सिंह के अनुसार, मध्यस्थता के माध्यम से अधिकांश विवादों का समाधान हो गया है। किसानों के मुआवजे में लगभग 50 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है और भुगतान के लिए प्रस्ताव एनएचएआई को भेजा जा रहा है।आगरा-ग्वालियर सिक्सलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर भारत की कनेक्टिविटी को बदलने वाली महत्वाकांक्षी पहल है। किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा मिलने से वर्षों से अटका निर्माण अब गति पकड़ने की ओर है। यदि निर्धारित समय में परियोजना पूरी होती है, तो आगरा से ग्वालियर की दूरी महज एक घंटे में तय होगी और उत्तर प्रदेश, राजस्थान तथा मध्य प्रदेश के बीच व्यापार, पर्यटन और आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी। यह परियोजना आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय विकास की तस्वीर बदलने वाली महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना साबित हो सकती है।

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