कोलकाता लगभग दो दशक के लंबे इंतजार के बाद बांग्लादेश की निर्वासित और चर्चित लेखिका तस्लीमा नसरीन एक बार फिर कोलकाता पहुंचीं। जैसे ही उनका विमान नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, उनके चेहरे पर भावनाओं का सैलाब साफ दिखाई दिया। 19 साल पहले जिस शहर को उन्हें विवादों और विरोध प्रदर्शनों के बीच छोड़ना पड़ा था, उसी शहर में लौटते हुए उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए अपने घर लौटने जैसा है। मैं खुशी और दर्द दोनों के साथ यहां आई हूं।”तस्लीमा नसरीन की यह वापसी केवल एक साहित्यकार की यात्रा नहीं, बल्कि उन यादों, संघर्षों और विवादों की भी वापसी है, जिन्होंने पिछले दो दशकों से उनके जीवन को प्रभावित किया है। कोलकाता पहुंचने के बाद उनका भावुक बयान एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, साहित्य और राजनीति पर बहस को तेज कर गया है।
- 19 साल बाद लौटीं उसी शहर में, जहां कभी बनाया था अपना ठिकाना
- क्या था पूरा विवाद?
- ‘घर वापसी’ वाला बयान क्यों बना चर्चा का विषय?
- 1 अगस्त को कार्यक्रम में होंगी शामिल
- विवादों से रहा है पुराना नाता
- राजनीतिक हलकों में भी बढ़ी हलचल
- सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
- कोलकाता से तस्लीमा का भावनात्मक रिश्ता
- आगे क्या होगा?
19 साल बाद लौटीं उसी शहर में, जहां कभी बनाया था अपना ठिकाना
तस्लीमा नसरीन लंबे समय तक कोलकाता में रहीं और इस शहर को अपना दूसरा घर मानती रही हैं। बंगाली भाषा और संस्कृति से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। लेकिन वर्ष 2007 में हालात ऐसे बने कि उन्हें यह शहर छोड़ना पड़ा।अब लगभग 19 साल बाद जब वह फिर से कोलकाता पहुंचीं, तो उन्होंने कहा कि यह यात्रा उनके लिए बेहद भावुक पल है। उन्होंने कहा कि इस शहर से उनका रिश्ता केवल साहित्य का नहीं, बल्कि भावनाओं का भी है।
क्या था पूरा विवाद?
तस्लीमा नसरीन लंबे समय से अपनी बेबाक लेखनी के लिए जानी जाती हैं। उनकी कई किताबें सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर तीखी टिप्पणियों के कारण विवादों में रही हैं।साल 2003 में उनकी पुस्तक ‘द्विखंडित’ पर पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था। आरोप लगाया गया कि पुस्तक में कुछ ऐसी बातें हैं, जिनसे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।इसके बाद वर्ष 2007 में कोलकाता में उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि प्रशासन को सुरक्षा कारणों से उन्हें शहर छोड़ने की सलाह देनी पड़ी। अंततः उन्हें कोलकाता छोड़ना पड़ा और तब से वह भारत से बाहर तथा विभिन्न स्थानों पर निर्वासित जीवन जीती रही हैं।

‘घर वापसी’ वाला बयान क्यों बना चर्चा का विषय?
कोलकाता पहुंचते ही तस्लीमा नसरीन ने कहा-“यह मेरे लिए अपने देश लौटने जैसा है। मैं खुशी और दर्द दोनों के साथ लौटी हूं।”उनका यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह लंबे समय से कोलकाता को अपना भावनात्मक घर बताती रही हैं। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया और साहित्यिक जगत में नई चर्चा छेड़ दी है।
1 अगस्त को कार्यक्रम में होंगी शामिल
तस्लीमा नसरीन 1 अगस्त को कोलकाता में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और प्रसिद्ध साहित्यकार शिर्षेंदु मुखोपाध्याय सहित कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की संभावना है।उनकी इस सार्वजनिक मौजूदगी को लेकर पहले से ही राजनीतिक और साहित्यिक हलकों में चर्चा तेज है।
विवादों से रहा है पुराना नाता
तस्लीमा नसरीन का नाम पिछले तीन दशकों से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक विवादों के संदर्भ में लगातार चर्चा में रहा है।उनकी रचनाओं को लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन हुए। उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिलीं और कई देशों में सुरक्षा कारणों से उन्हें स्थान बदलना पड़ा।उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने हमेशा महिलाओं के अधिकार, सामाजिक सुधार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात की है, जबकि आलोचकों का आरोप रहा है कि उनकी कुछ रचनाओं से धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
राजनीतिक हलकों में भी बढ़ी हलचल
तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी चर्चाएं तेज हैं।कुछ राजनीतिक दल इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ दलों का मानना है कि उनकी वापसी पुराने विवादों को फिर से हवा दे सकती है।हालांकि अभी तक राज्य सरकार की ओर से उनकी वापसी को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
तस्लीमा नसरीन के कोलकाता पहुंचते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।एक वर्ग ने उनकी वापसी का स्वागत करते हुए इसे साहित्य और विचारों की आजादी का प्रतीक बताया, जबकि दूसरे वर्ग ने पुराने विवादों का हवाला देते हुए सवाल भी उठाए।यही वजह है कि उनकी वापसी केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गई है।
कोलकाता से तस्लीमा का भावनात्मक रिश्ता
तस्लीमा नसरीन कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुकी हैं कि कोलकाता उनके दिल के बेहद करीब है। बंगाली भाषा, साहित्य और संस्कृति से उनका गहरा लगाव रहा है। यही कारण है कि उन्होंने इस शहर को हमेशा अपने दूसरे घर के रूप में देखा।19 साल बाद उसी शहर में लौटना उनके लिए केवल भौगोलिक वापसी नहीं, बल्कि भावनात्मक पुनर्मिलन भी माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी निगाहें 1 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि तस्लीमा नसरीन अपने संबोधन में किन मुद्दों पर बात करती हैं और क्या वह अपने पुराने विवादों या भविष्य की योजनाओं पर कोई नया बयान देती हैं।19 साल बाद कोलकाता लौटीं तस्लीमा नसरीन की वापसी ने एक बार फिर साहित्य, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीति को केंद्र में ला दिया है। कभी विरोध प्रदर्शनों के बीच जिस शहर को उन्हें छोड़ना पड़ा था, आज उसी शहर में लौटकर उन्होंने इसे “घर वापसी” बताया। उनके चेहरे पर खुशी और दर्द दोनों की झलक थी। आने वाले दिनों में उनकी यह यात्रा केवल साहित्यिक कार्यक्रम तक सीमित रहेगी या फिर नए राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को जन्म देगी, इस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।
or advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

