कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो? कैसे बने झारखंड छात्र आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा, जानिए पूरी कहानी

Editorial
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रांची झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राज्यभर के हजारों अभ्यर्थी झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन का सबसे प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो, जिन्होंने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में पहले धरना दिया और फिर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी।हाल के दिनों में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से बातचीत और उनके समर्थन के बाद देवेंद्र नाथ महतो राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर देवेंद्र नाथ महतो कौन हैं, उनकी पृष्ठभूमि क्या है और वे झारखंड के सबसे बड़े छात्र आंदोलन का चेहरा कैसे बने?

कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?

देवेंद्र नाथ महतो झारखंड के रांची जिले के राहे प्रखंड स्थित कापीडीह गांव के निवासी हैं। उनके पिता बिशम्भर महतो सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक हैं। देवेंद्र ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (SPMU), रांची से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने कुरमाली भाषा में स्नातकोत्तर (Post Graduation) तथा बीएड की शिक्षा प्राप्त की।चुनावी शपथपत्र के अनुसार उनका पेशा छात्र और खेती है तथा वे सिल्ली विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं।

छात्र राजनीति से आंदोलन तक का सफर

देवेंद्र नाथ महतो का छात्र राजनीति से जुड़ाव नया नहीं है। कॉलेज जीवन से ही वे शिक्षा, छात्रवृत्ति और सरकारी भर्तियों से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं।

  • 2015 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार की नियोजन नीति के खिलाफ आंदोलन किया।
  • 2016 में छात्रवृत्ति में कटौती के विरोध में प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
  • 2019 में JPSC भर्ती में कथित अनियमितताओं के खिलाफ बड़े छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया।

उनके समर्थकों का दावा है कि उनके नेतृत्व में हुए आंदोलनों के बाद कुछ भर्ती परीक्षाओं और परीक्षा प्रक्रियाओं की समीक्षा हुई तथा कई मामलों में सरकार को कार्रवाई करनी पड़ी।

इस समय क्यों चर्चा में हैं देवेंद्र नाथ महतो?

देवेंद्र नाथ महतो इन दिनों 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।उन्होंने 25 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना शुरू किया। इसके बाद 2 अगस्त से उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनका कहना था कि जब तक सरकार छात्रों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।चार दिन तक भूख हड़ताल पर रहने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अपील पर उन्होंने केवल जल और नमक ग्रहण कर अनशन समाप्त किया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि छात्रों को न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 की प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया।आयोग ने 103 रिक्त पदों के लिए 2204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया।

इसके बाद कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि—

  • श्रेणीवार कट-ऑफ जारी नहीं की गई।
  • मेरिट सूची पर आयोग के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे।
  • चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव दिखाई दिया।

इसी दौरान सोशल मीडिया पर कुछ कथित OMR शीट वायरल हुईं। इनमें दावा किया गया कि कम प्रश्न हल करने वाले कुछ अभ्यर्थियों को भी मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया। हालांकि इन वायरल दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।इन्हीं आरोपों के बाद छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया।

कैसे बढ़ा छात्र आंदोलन?

पहले कुछ अभ्यर्थी JPSC कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे। धीरे-धीरे आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया।रांची के बापू वाटिका, अल्बर्ट चौक और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम आंदोलन के प्रमुख केंद्र बन गए। देखते ही देखते यह विरोध राज्यव्यापी छात्र आंदोलन में बदल गया।देवेंद्र नाथ महतो ने इस आंदोलन का नेतृत्व करते हुए कहा कि यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ युवाओं की आवाज है।

छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं—

  • 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द की जाए।
  • निष्पक्ष तरीके से दोबारा परीक्षा कराई जाए।
  • JPSC और JSSC की भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएं।
  • TDPL एजेंसी के माध्यम से हुई परीक्षाओं की समीक्षा कराई जाए।
  • पूरे मामले की CBI जांच कराई जाए।
  • दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
  • भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

चुनावी राजनीति में भी आजमा चुके हैं किस्मत

देवेंद्र नाथ महतो केवल छात्र नेता ही नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं।2019 विधानसभा चुनाव में उन्होंने सिल्ली सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।2024 लोकसभा चुनाव में वे रांची सीट से निर्दलीय उम्मीदवार बने। चुनावी हलफनामे के अनुसार उन्होंने लगभग 1.66 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की थी। उन्हें करीब 1.48 लाख वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे।इसके बाद 2024 झारखंड विधानसभा चुनाव में उन्होंने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के उम्मीदवार के रूप में सिल्ली सीट से चुनाव लड़ा, जहां उन्हें लगभग 44 हजार वोट प्राप्त हुए।

सरकार ने क्या कहा?

छात्र आंदोलन के बीच सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने कहा है कि छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।पार्टी के महासचिव एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद पांडेय ने कहा कि सरकार जल्द ही एक उच्चस्तरीय समिति गठित करेगी, जो छात्रों की शिकायतों की समीक्षा करेगी।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी कहा है कि सरकार के दरवाजे छात्रों के लिए खुले हैं और उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

CID जांच में अब तक क्या हुआ?

सरकार ने पूरे मामले की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंप दी है।CID ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर कई लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान पूर्व JPSC उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह सहित कई आरोपियों से पूछताछ की गई।इसके अलावा सफल अभ्यर्थियों से OMR शीट की कार्बन कॉपी भी जमा कराने को कहा गया है।उधर JPSC ने संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा सहित कई भर्ती परीक्षाओं को अगली सूचना तक स्थगित कर दिया है।

आगे क्या होगा?

झारखंड हाईकोर्ट में भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। अदालत ने फिलहाल आयोग से जवाब मांगा है, जबकि छात्र आंदोलनकारी CBI जांच और पूरी भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग पर अड़े हुए हैं।आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई, CID जांच और न्यायालय की सुनवाई इस आंदोलन की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल देवेंद्र नाथ महतो झारखंड के युवाओं की आवाज बनकर उभरे हैं और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।

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