बिना बीमा पेट्रोल नहीं! सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिल्ली से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट; जानें क्या है पूरा मामला

Editorial
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नई दिल्ली बिना वैध मोटर वाहन बीमा के सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया जाए, जिसके तहत वैध बीमा नहीं होने पर पेट्रोल पंप से वाहन को ईंधन नहीं दिया जाए। इस व्यवस्था की शुरुआत राजधानी दिल्ली से किए जाने की संभावना है। केंद्र सरकार को इस संबंध में 21 अगस्त को समयसीमा समेत ठोस प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के सामने रखना है।सुप्रीम कोर्ट का यह कदम सड़क सुरक्षा और मोटर वाहन कानून के प्रभावी पालन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो वाहन मालिकों के लिए वैध बीमा रखना जरूरी हो जाएगा, क्योंकि बीमा की स्थिति का सत्यापन ईंधन लेने के दौरान किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा- पायलट प्रोजेक्ट शुरू करें

बुधवार को मामले की सुनवाई जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ के समक्ष हुई। केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि इस व्यवस्था को लागू करने को लेकर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से कुछ चिंताएं हैं।इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि व्यवस्था को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। अदालत ने कहा कि शुरुआत में दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है। केंद्र सरकार को इस योजना का विस्तृत खाका और इसे लागू करने की समयसीमा अदालत के सामने पेश करनी होगी।मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को निर्धारित है। अब सभी की नजर केंद्र के प्रस्ताव पर है कि बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान और पेट्रोल पंप पर ईंधन रोकने की प्रक्रिया किस तरह लागू की जाएगी।

चार अगस्त के आदेश में भी दिए गए थे निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने चार अगस्त को दिए गए आदेश में सड़कों पर बड़ी संख्या में बिना वैध थर्ड पार्टी इंश्योरेंस चल रहे वाहनों पर चिंता जताई थी। अदालत ने केंद्र सरकार से एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा था, जिसमें वाहन के ईंधन और उसके वैध बीमा की स्थिति को आपस में जोड़ा जा सके।इस व्यवस्था का सीधा मतलब यह होगा कि अगर किसी वाहन का वैध बीमा नहीं है, तो संबंधित वाहन को पेट्रोल पंप पर पेट्रोल या डीजल देने से पहले बीमा की स्थिति जांची जा सकती है। यदि बीमा समाप्त हो चुका है, तो वाहन मालिक को पहले बीमा का नवीनीकरण कराना पड़ सकता है।हालांकि इस व्यवस्था के लागू होने का अंतिम तरीका केंद्र सरकार के प्रस्ताव और आगे आने वाले निर्देशों से स्पष्ट होगा।

बिना बीमा वाहन चलाने वालों पर बढ़ेगा दबाव

मोटर वाहन अधिनियम के तहत सार्वजनिक स्थान पर वाहन चलाने के लिए वैध थर्ड पार्टी बीमा महत्वपूर्ण कानूनी आवश्यकता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर चलते हैं।सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि केवल नियम बनाने से उनका प्रभावी पालन सुनिश्चित नहीं होता। इसलिए ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे वाहन मालिकों को बीमा बनाए रखने के लिए व्यावहारिक रूप से प्रोत्साहित किया जा सके।अगर पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से पहले वाहन की बीमा स्थिति जांचने की व्यवस्था सफल होती है, तो इससे बिना बीमा वाहनों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है।

ANPR कैमरों से हो सकती है वाहनों की पहचान

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के आदेश में बिना बीमा और बिना पंजीकरण वाले वाहनों की पहचान के लिए तकनीक के इस्तेमाल की संभावना पर भी जोर दिया था। इसके लिए ANPR यानी ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों का इस्तेमाल किया जा सकता है।ANPR तकनीक कैमरे की मदद से वाहन का नंबर पढ़कर उससे जुड़ी जानकारी की पहचान करने में मदद करती है। यदि इसे बीमा संबंधी डेटाबेस से जोड़ा जाता है, तो वाहन की बीमा स्थिति का डिजिटल तरीके से पता लगाया जा सकता है।हालांकि इसके लिए अलग-अलग सरकारी और संबंधित एजेंसियों के डेटाबेस के बीच तकनीकी समन्वय जरूरी होगा।

सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश केवल बीमा तक सीमित नहीं है। अदालत ने सड़क दुर्घटनाओं और यातायात व्यवस्था से जुड़े कई पहलुओं पर भी चिंता जताई है। बिना बीमा वाहन दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों और वाहन मालिकों दोनों के लिए कानूनी और आर्थिक समस्याएं पैदा कर सकते हैं।वैध बीमा व्यवस्था का एक अहम उद्देश्य दुर्घटना में प्रभावित तीसरे पक्ष को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना भी है। ऐसे में अदालत की पहल को सड़क सुरक्षा और पीड़ितों के अधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

टोल प्लाजा पर भी ऑटोमैटिक व्यवस्था पर जोर

चार अगस्त के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा से जुड़ी समस्याओं का भी संज्ञान लिया था। अदालत ने कुछ चुनिंदा कॉरिडोर पर पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से टोल प्लाजा पर वाहनों की ऑटोमैटिक पहचान की व्यवस्था की बात कही थी।इसका उद्देश्य वाहनों को बार-बार रोकने और लंबी कतारों को कम करना है। तकनीक के इस्तेमाल से यातायात को अधिक सुचारु बनाने की कोशिश की जा सकती है।

दिल्ली से शुरुआत, आगे पूरे देश में हो सकता है विस्तार

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत दिल्ली में बिना बीमा ईंधन नहीं देने की व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की संभावना है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में इसे दूसरे शहरों और राज्यों में लागू करने पर विचार किया जा सकता है।हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम व्यवस्था किस तकनीकी मॉडल पर आधारित होगी और इसे लागू करने में पेट्रोल पंप संचालकों की क्या भूमिका होगी। इन सवालों पर केंद्र सरकार के प्रस्ताव के बाद तस्वीर साफ होगी।कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश वाहन मालिकों के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है। अब वैध वाहन बीमा केवल कानूनी औपचारिकता नहीं रहेगा, बल्कि ईंधन लेने की प्रक्रिया से भी जुड़ सकता है। 21 अगस्त को केंद्र सरकार के प्रस्ताव के बाद यह स्पष्ट होगा कि दिल्ली में यह पायलट प्रोजेक्ट कब और किस तरीके से लागू किया जाता है।

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