संभल जामा मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, हरिहर मंदिर दावे पर नजर

Editorial
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संभल की शाही जामा मस्जिद और श्रीहरिहर मंदिर विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज यानी 11 अगस्त 2026 को अहम सुनवाई होने वाली है। पिछली सुनवाई 4 अगस्त को होनी थी, लेकिन मामला सूची में 47वें नंबर पर होने और लंच के बाद तक बारी नहीं आने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी थी। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट की सूची में पहले नंबर पर रखा गया है। ऐसे में आज इस मामले पर विस्तृत सुनवाई की संभावना जताई जा रही है।

संभल जामा मस्जिद मामले में आज क्या होगा?

संभल के शाही जामा मस्जिद विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया चल रही है। हिंदू पक्ष का दावा है कि वर्तमान शाही जामा मस्जिद परिसर में प्राचीन श्रीहरिहर मंदिर था। इसी दावे के आधार पर हिंदू पक्ष ने निचली अदालत में सर्वे की मांग की थी।हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन मामले की पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने पहले अदालत से जल्द सुनवाई की तारीख तय करने का अनुरोध किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त की तारीख निर्धारित की।मंदिर पक्ष की ओर से यह उम्मीद जताई गई है कि आज की सुनवाई में मामले पर महत्वपूर्ण आदेश या टिप्पणी सामने आ सकती है। हालांकि, अदालत आज अंतिम फैसला सुनाएगी या नहीं, यह पूरी तरह सुनवाई की प्रगति और पीठ के आदेश पर निर्भर करेगा।

19 नवंबर 2024 से शुरू हुआ था विवाद

संभल जामा मस्जिद विवाद की कानूनी प्रक्रिया 19 नवंबर 2024 को शुरू हुई थी। हिंदू पक्ष की ओर से सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट, चंदौसी में याचिका दाखिल कर शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा किया गया था।याचिका के बाद अदालत के आदेश पर उसी दिन मस्जिद परिसर का प्रारंभिक सर्वे कराया गया। इसके बाद 24 नवंबर 2024 को सर्वे का दूसरा चरण निर्धारित किया गया था।दूसरे सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए थे। इसी दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और हिंसा भड़क गई। पुलिस के मुताबिक, पथराव और फायरिंग की घटना में पांच लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई पुलिसकर्मी और अधिकारी घायल हुए थे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सर्वे के आदेश को बरकरार रखा

इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का भी महत्वपूर्ण आदेश सामने आ चुका है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने 18 मई 2025 को सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट, चंदौसी द्वारा दिए गए सर्वेक्षण के आदेश को बरकरार रखा था।मस्जिद कमेटी ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए सर्वे के आदेश को सही माना। इसके बाद शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।मस्जिद कमेटी की ओर से 1 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई थी, जिसे बाद में पंजीकृत किया गया। इसके बाद से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अलग-अलग तारीखों पर सुनवाई हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट में कई बार हो चुकी है सुनवाई

संभल जामा मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई 22 अगस्त 2025 को हुई थी। इसके बाद अदालत ने हिंदू पक्ष को नोटिस जारी किया था।मामले में इसके बाद 16 मार्च 2026, 20 अप्रैल 2026, 5 मई 2026 और 14 जुलाई 2026 को भी सुनवाई हुई। 28 जुलाई की सुनवाई में जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के वकील ने करीब एक घंटे 10 मिनट तक अपना पक्ष रखा था।14 जुलाई की सुनवाई में इंतजामिया कमेटी के अनुरोध पर 28 जुलाई की तारीख निर्धारित की गई थी। अब 11 अगस्त की सुनवाई को लेकर दोनों पक्षों की नजर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर है।

दो याचिकाओं को लेकर भी हुआ था विवाद

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की कोर्ट संख्या-5 में न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी और जामा मस्जिद ट्रस्ट की याचिकाओं को आपसी समझौते के तहत एक साथ सुनने का सुझाव दिया था।हालांकि दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी अलग याचिकाओं पर सुनवाई की मांग की। जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली के अनुसार, पिछली सुनवाई में कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय मांगा गया था।वहीं जामा मस्जिद ट्रस्ट के अध्यक्ष मोहम्मद काशिफ खान ने भी बताया था कि उनके अधिवक्ता ने दोनों मामलों को एक साथ सुनने के सुझाव को स्वीकार नहीं किया।

संभल हिंसा के बाद दर्ज हुई थीं कई FIR

24 नवंबर 2024 को सर्वे के दौरान हुई हिंसा के बाद पुलिस ने कई मुकदमे दर्ज किए थे। संभल कोतवाली और थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी।इन मामलों में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल समेत कई लोगों को नामजद किया गया था। पुलिस के मुताबिक, बड़ी संख्या में अज्ञात लोगों को भी मुकदमों में आरोपी बनाया गया था।बाद की जांच और चार्जशीट में साक्ष्यों के आधार पर कुछ नामों को लेकर स्थिति में बदलाव भी हुआ। पुलिस की जांच के दौरान सुहैल इकबाल का नाम चार्जशीट में शामिल नहीं किया गया।

SIT ने दाखिल की चार्जशीट

संभल हिंसा मामले की जांच के दौरान विशेष जांच दल यानी SIT ने भी कार्रवाई की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 18 जून को SIT ने करीब 1128 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी।इसमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क समेत कई आरोपियों के नाम शामिल किए गए। हालांकि, किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण अदालत में चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।हिंसा के मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई थी। जामा मस्जिद के सदर जफर अली समेत कई लोगों को जेल भेजा गया था। बाद में जफर अली को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद रिहा किया गया।

आज की सुनवाई पर क्यों है सबकी नजर?

संभल जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद का मामला धार्मिक और कानूनी दोनों दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। एक तरफ हिंदू पक्ष मंदिर होने के दावे के आधार पर सर्वे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग कर रहा है, वहीं मस्जिद पक्ष निचली अदालत के सर्वे संबंधी आदेश को चुनौती दे रहा है।अब 11 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलों और पिछले आदेशों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर दिशा स्पष्ट कर सकता है।हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि अदालत आज ही अंतिम फैसला सुनाएगी। सुनवाई के दौरान अदालत क्या आदेश देती है, यह पीठ की कार्यवाही और दोनों पक्षों की दलीलों पर निर्भर करेगा।संभल जामा मस्जिद मामलामें आज की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। शाही जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष के श्रीहरिहर मंदिर के दावे, सर्वे के आदेश और मस्जिद कमेटी की चुनौती से जुड़े कई कानूनी सवाल अदालत के सामने हैं।19 नवंबर 2024 से शुरू हुआ यह विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। 11 अगस्त की सुनवाई में मामले की आगे की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिलने की उम्मीद है। हालांकि अंतिम निर्णय या आदेश के बारे में अभी किसी तरह का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

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