मुरादाबाद में पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों को बचाने के लिए प्रशासन ने अब निगरानी और कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया की अध्यक्षता में जिला पर्यावरण समिति एवं जिला गंगा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में पर्यावरण संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, पौधरोपण, गंगा संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और सीवेज प्रबंधन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई।जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्य केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर उनकी प्रभावी प्रगति दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर निर्धारित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर विशेष जोर दिया।
बायोमेडिकल और ई-वेस्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने बायोमेडिकल वेस्ट, ई-वेस्ट, कंस्ट्रक्शन एवं डिमोलिशन वेस्ट, प्लास्टिक वेस्ट और ठोस अपशिष्ट के उचित एवं वैज्ञानिक प्रबंधन की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि खासतौर पर बायोमेडिकल अपशिष्ट का प्रबंधन बेहद संवेदनशील विषय है। इसके स्रोत से लेकर अंतिम निस्तारण तक प्रत्येक स्तर पर सुरक्षित और वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की नियमित निगरानी के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार की जाए। अस्पतालों और संबंधित संस्थानों से निकलने वाले अपशिष्ट के संग्रहण, परिवहन और अंतिम निस्तारण की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।इसी तरह ई-वेस्ट और निर्माण कार्यों से निकलने वाले मलबे के वैज्ञानिक निस्तारण को लेकर भी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए। प्रशासन का उद्देश्य पर्यावरण पर पड़ने वाले कचरे के नकारात्मक प्रभाव को कम करना और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

पौधरोपण की होगी जियो-टैगिंग से निगरानी
बैठक में पौधरोपण अभियान की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को पौधरोपण कार्यों की शत-प्रतिशत जियो-टैगिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जियो-टैगिंग के माध्यम से लगाए गए पौधों की वास्तविक स्थिति की निगरानी और सत्यापन किया जा सकेगा।प्रशासन की ओर से पौधरोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण और उनके विकास पर भी ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्लास्टिक और ठोस कचरा प्रबंधन होगा और प्रभावी
प्लास्टिक एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने नगर निगम को कचरे के संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।शहरी क्षेत्रों में निकलने वाले ठोस कचरे का सही तरीके से पृथक्करण और निस्तारण नहीं होने पर पर्यावरण के साथ-साथ जल स्रोतों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन ने कचरा प्रबंधन व्यवस्था को प्रभावी बनाने और नियमों के पालन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।

गंगा और जल स्रोतों के संरक्षण पर भी मंथन
जिला गंगा समिति की बैठक में गंगा संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें सीवेज ट्रीटमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, छोटी नदियों के जीर्णोद्धार, डिस्ट्रिक्ट गंगा एक्शन प्लान और वेटलैंड रेस्टोरेशन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गंगा और अन्य जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने छोटी नदियों और जल स्रोतों के संरक्षण तथा उनके पुनर्जीवन से जुड़े कार्यों में तेजी लाने को कहा।उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने की हिदायत देते हुए कहा कि जल स्रोतों के संरक्षण के लिए तैयार की गई योजनाओं का प्रभाव जमीन पर दिखाई देना चाहिए। सीवेज के उचित उपचार और जल स्रोतों में प्रदूषण की रोकथाम को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।

अधिकारियों और एनजीओ प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी, प्रभागीय वनाधिकारी, अपर जिलाधिकारी प्रशासन, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, जिला पंचायत राज अधिकारी, अधिशासी अधिकारी, खंड विकास अधिकारी सहित जल निगम, नगर निगम, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा विभिन्न एनजीओ के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।बैठक में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मुरादाबाद में पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, पौधरोपण और गंगा संरक्षण को लेकर विभागीय कार्यों की निगरानी और तेज की जाएगी। अपशिष्ट प्रबंधन से लेकर जल स्रोतों के पुनर्जीवन तक सभी योजनाओं में बेहतर समन्वय के साथ धरातलीय प्रगति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
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