बोलती दीवारों’ से बच्चों को मिल रही सीखने की नई राह, मोहम्मदपुर बस्तौर के स्कूल में 178 विद्यार्थियों का नामांकन

Editorial
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रिपोर्ट :मो. अरशद

मुरादाबाद विकास खंड कुंदरकी के ग्राम मोहम्मदपुर बस्तौर स्थित प्राथमिक विद्यालय इन दिनों गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता की मिसाल पेश कर रहा है। विद्यालय में बच्चों को पढ़ाई के पारंपरिक तरीकों के साथ गतिविधि आधारित शिक्षण और आधुनिक शैक्षिक तकनीकों से जोड़ा जा रहा है। यही वजह है कि विद्यालय बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शैक्षिक सत्र 2026-27 में विद्यालय में 178 विद्यार्थियों का नामांकन है।विद्यालय के प्रधानाध्यापक नरेश कुमार वर्मा के अनुसार, विद्यालय का पूरा स्टाफ विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। स्कूल में पढ़ाई को रोचक और सरल बनाने के लिए कक्षा-कक्षों को शिक्षण-अधिगम सामग्री यानी टीएलएम से सजाया गया है। वहीं विद्यालय की सबसे खास पहचान यहां की ‘बोलती दीवारें’ हैं, जो बच्चों को खेल-खेल में सीखने और विषयों को आसानी से समझने के लिए प्रेरित करती हैं।

‘बोलती दीवारें’ बनीं बच्चों के सीखने का माध्यम

विद्यालय में दीवारों को केवल सजावट का माध्यम न बनाकर उन्हें शिक्षण सामग्री के रूप में विकसित किया गया है। अलग-अलग विषयों से संबंधित चित्र, तथ्य और शैक्षिक सामग्री बच्चों को कक्षा के बाहर भी सीखने का अवसर देती है। इससे विद्यार्थियों में सीखने के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ उनकी जिज्ञासा को भी प्रोत्साहन मिलता है।विद्यालय में बाल-केंद्रित और गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष जोर दिया जाता है। समूह आधारित शिक्षण, सतत आकलन और शैक्षिक तकनीकों का प्रभावी प्रयोग कर बच्चों की सीखने की क्षमता को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है। शिक्षकों का उद्देश्य बच्चों को केवल पाठ याद कराने के बजाय उन्हें विषय को समझने और व्यवहारिक रूप से सीखने के अवसर उपलब्ध कराना है।

नामांकन बढ़ाने के लिए घर-घर पहुंच रहे शिक्षक

विद्यालय में विद्यार्थियों के नामांकन और ठहराव को बढ़ाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए विद्यालय की ओर से नामांकन मेले, नामांकन रैली और घर-घर जनसंपर्क अभियान चलाए जाते हैं। शिक्षकों की ओर से अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने और शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है।नियमित शिक्षक-अभिभावक बैठकों के माध्यम से बच्चों की शैक्षिक प्रगति और उनकी जरूरतों की जानकारी अभिभावकों के साथ साझा की जाती है। विद्यार्थियों के समग्र विकास की स्थिति बताने के लिए उनकी हॉलिस्टिक डेवलपमेंट रिपोर्ट भी अभिभावकों को उपलब्ध कराई जाती है।प्रधानाध्यापक नरेश कुमार वर्मा स्वयं भी कक्षाओं में जाकर शिक्षण कार्य की समीक्षा करते हैं। वह शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ शैक्षिक संवाद कर पढ़ाई की स्थिति और बच्चों की समस्याओं को समझने का प्रयास करते हैं। विद्यालय में निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार अध्यापन, नियमित शिक्षक बैठक और विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

पढ़ाई के साथ खेल और स्वास्थ्य पर भी ध्यान

मोहम्मदपुर बस्तौर के प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की शिक्षा के साथ उनके स्वास्थ्य और शारीरिक विकास को भी प्राथमिकता दी जा रही है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके साथ ही निर्धारित अंतराल पर बच्चों को आयरन और एल्बेंडाजोल की गोलियां भी दी जाती हैं।विद्यालय में बच्चों को खेल गतिविधियों से जोड़ने के लिए खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई है। खेलों के माध्यम से बच्चों में टीम भावना, अनुशासन और शारीरिक सक्रियता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है। संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत जागरूकता गतिविधियों के साथ विद्यालय परिसर की नियमित साफ-सफाई पर भी ध्यान दिया जाता है।

बाल संसद और इको क्लब में बच्चों की भागीदारी

विद्यालय में बच्चों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जाता। विद्यार्थियों और अभिभावकों की सहभागिता बढ़ाने के लिए बाल संसद, माता समूह और इको क्लब जैसी गतिविधियां संचालित की जाती हैं। इसके माध्यम से बच्चों को जिम्मेदारी, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता की समझ विकसित करने का अवसर मिलता है।विद्यालय में मासिक एसएमसी बैठक भी आयोजित की जाती है। इन बैठकों में विद्यालय की व्यवस्थाओं, बच्चों की शिक्षा और अन्य आवश्यक विषयों पर चर्चा की जाती है। कक्षा पांच के विद्यार्थियों के लिए विदाई समारोह और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करने की व्यवस्था भी विद्यालय में की गई है।

टीम भावना से हो रहा विद्यालय का विकास

विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षक प्रत्येक 15 दिन में बैठक कर शैक्षिक गतिविधियों और विद्यालय की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हैं। शासन की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी भी विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों तक पहुंचाई जाती है।प्रधानाध्यापक नरेश कुमार वर्मा का कहना है कि विद्यालय का पूरा स्टाफ टीम भावना के साथ बच्चों को बेहतर से बेहतर शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार, अनुशासन, गतिविधि आधारित शिक्षण और सामुदायिक सहभागिता के बेहतर समन्वय ने प्राथमिक विद्यालय मोहम्मदपुर बस्तौर को अलग पहचान दिलाई है।178 विद्यार्थियों वाले इस विद्यालय की पहल यह बताती है कि यदि शिक्षण व्यवस्था में नवाचार के साथ बच्चों और समुदाय को जोड़ा जाए तो परिषदीय विद्यालय भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रभावी केंद्र बन सकते हैं। मोहम्मदपुर बस्तौर का यह विद्यालय इसी दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरक उदाहरण के रूप में सामने आया है।

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