दिल्ली विश्वविद्यालय:अब मास्टर डिग्री के बिना सीधे PhD का मौका, जानें कौन ले सकेगा दाखिला

Editorial
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नई दिल्ली  दिल्ली विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। अब विश्वविद्यालय के चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) को पूरा करने वाले पात्र छात्र मास्टर डिग्री किए बिना सीधे PhD में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय ने अपने अध्यादेश-6 में संशोधन किया है। इस बदलाव को अकादमिक परिषद और कार्यकारी परिषद से मंजूरी मिल चुकी है।डीयू का यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत लागू किए गए चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के पहले बैच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यानी 2026-27 शैक्षणिक सत्र से पात्र छात्रों के लिए स्नातक के बाद सीधे शोध की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया है।

चार साल की UG डिग्री के बाद सीधे PhD

नई व्यवस्था के तहत चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम पूरा करने वाले छात्रों को PhD में प्रवेश के लिए अनिवार्य रूप से मास्टर डिग्री हासिल करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, इसका लाभ हर छात्र को स्वतः नहीं मिलेगा। विश्वविद्यालय ने इसके लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की है।सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए कम से कम 7.5 CGPA जरूरी होगा। वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए न्यूनतम 7.0 CGPA की पात्रता निर्धारित की गई है। इसके अलावा PhD प्रवेश से जुड़े विश्वविद्यालय के अन्य नियमों और चयन प्रक्रिया का पालन करना होगा।इस फैसले से उन छात्रों को विशेष लाभ मिल सकता है जो स्नातक स्तर पर ही शोध और अकादमिक क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। ऐसे छात्रों को अब मास्टर डिग्री के लिए अतिरिक्त समय बिताने के बजाय पात्रता पूरी होने पर सीधे डॉक्टरेट कार्यक्रम की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

2026-27 में पहली बार लागू होगा नया विकल्प

दिल्ली विश्वविद्यालय ने 2022-23 के शैक्षणिक सत्र से चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू किया था। यह व्यवस्था UGCF 2022 के तहत लागू की गई थी, जो NEP 2020 की शैक्षणिक सोच पर आधारित है।अब FYUP का पहला बैच चार वर्ष की पढ़ाई पूरी कर चुका है। इसी वजह से 2026-27 सत्र में पहली बार इस बैच के छात्रों के सामने सीधे PhD में जाने का विकल्प उपलब्ध होगा।डीयू का मानना है कि चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम छात्रों को पारंपरिक तीन वर्षीय डिग्री की तुलना में शोध, कौशल और अकादमिक गतिविधियों के लिए अधिक अवसर देता है। इसी आधार पर पात्र छात्रों को आगे शोध की पढ़ाई के लिए नया रास्ता दिया गया है।

35,943 छात्रों ने चुना था चौथा साल

डीयू में 2022-23 के दौरान स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग समेत कुल 75,948 छात्रों ने दाखिला लिया था। इनमें से करीब 40,005 छात्र तीन साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2025 में स्नातक शिक्षा से बाहर हो गए। वहीं लगभग 35,943 छात्रों ने चौथे वर्ष में पढ़ाई जारी रखने का विकल्प चुना।इन छात्रों के लिए अब उच्च शिक्षा के कई विकल्प सामने हैं। पात्र छात्र सीधे PhD के लिए आवेदन कर सकते हैं, जबकि अन्य छात्र एक वर्षीय या दो वर्षीय PG कार्यक्रमों के जरिए आगे की पढ़ाई जारी रख सकते हैं।

एक वर्षीय PG में 5,857 सीटें

दिल्ली विश्वविद्यालय ने 2026-27 सत्र में 46 विषयों के एक वर्षीय PG कार्यक्रमों के लिए कुल 5,857 सीटें उपलब्ध कराई हैं। इनमें 2,807 सीटें नियमित मोड में हैं।इन कार्यक्रमों के लिए कुल 12,111 छात्रों ने आवेदन किया है। यानी उपलब्ध 5,857 सीटों की तुलना में आवेदकों की संख्या दोगुने से अधिक है। आंकड़ों के अनुसार उपलब्ध सीटें कुल आवेदनों की करीब 48 प्रतिशत हैं।एक वर्षीय PG कार्यक्रमों को लेकर छात्रों में भी काफी रुचि दिखाई दे रही है। इससे उन विद्यार्थियों को विकल्प मिलेगा जो चार वर्षीय स्नातक के बाद मास्टर स्तर की पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं।

तीन साल की पढ़ाई के बाद भी PG का विकल्प

डीयू ने छात्रों के लिए केवल चार वर्षीय कार्यक्रम पर निर्भर व्यवस्था नहीं बनाई है। विश्वविद्यालय में दो वर्षीय PG कार्यक्रमों में भी सीटों को बरकरार रखा गया है।इसका मतलब है कि तीन साल की स्नातक पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के लिए भी आगे PG करने का रास्ता उपलब्ध रहेगा। वहीं चार वर्षीय UG पूरा करने वाले छात्र अपनी पात्रता और रुचि के अनुसार एक वर्षीय PG, दो वर्षीय PG या सीधे PhD जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।इससे छात्रों के सामने उच्च शिक्षा को लेकर पहले की तुलना में अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।

बढ़ी सीटों के लिए डीयू की तैयारी

एक वर्षीय PG कार्यक्रमों में सीटों की संख्या बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय के सामने कक्षाओं और शिक्षकों की उपलब्धता बड़ी चुनौती हो सकती है। डीयू के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता के अनुसार विश्वविद्यालय ने अतिरिक्त जरूरतों को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचे में विस्तार की तैयारी की है।कुछ ऐसे कमरों को भी शैक्षणिक उपयोग में लाया जाएगा, जहां पहले दूसरे कार्यक्रम संचालित किए जा रहे थे। इसके अलावा जरूरत के अनुसार अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी विश्वविद्यालय में शिक्षण का अवसर देने और इसके लिए मानदेय की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है।

JNU और AUD से डीयू का बड़ा विस्तार

एक वर्षीय PG कार्यक्रमों के मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय ने बड़े स्तर पर सीटें उपलब्ध कराई हैं। JNU ने चार कार्यक्रमों में 71 सीटें, जबकि अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली ने सात कार्यक्रमों में 210 सीटें उपलब्ध कराई हैं। इसके मुकाबले डीयू ने 46 एक वर्षीय PG कार्यक्रमों में कुल 5,857 सीटों का प्रावधान किया है।

छात्रों के लिए क्या बदलेगा?

डीयू का नया फैसला उच्च शिक्षा में छात्रों के लिए विकल्पों का दायरा बढ़ाता है। अब चार वर्षीय UG पूरा करने के बाद पात्र छात्र अपनी रुचि और करियर लक्ष्य के अनुसार शोध की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकते हैं। हालांकि सीधे PhD में प्रवेश के लिए केवल CGPA पर्याप्त नहीं होगा; विश्वविद्यालय की निर्धारित प्रवेश प्रक्रिया और अन्य पात्रताओं को भी पूरा करना होगा।कुल मिलाकर,दिल्ली यूनिवर्सिटी में 4-साल के UG के बाद डायरेक्ट PhDकी नई व्यवस्था FYUP के छात्रों के लिए बड़ा बदलाव है। एक तरफ सीधे PhD का विकल्प खुला है, तो दूसरी तरफ एक वर्षीय और दो वर्षीय PG कार्यक्रम छात्रों को अपनी जरूरत के अनुसार आगे की पढ़ाई चुनने का अवसर देते हैं।

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