IAS दुर्गा शक्ति नागपाल केस: सुनवाई से जज हटे, सिविल जज ने लगाया धमकी का आरोप

Editorial
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लखनऊ उत्तर प्रदेश की वरिष्ठ IAS अधिकारी और देवीपाटन मंडल की आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल से जुड़े मामले में बड़ी अपडेट सामने आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में चल रही आपराधिक अवमानना की कार्यवाही की सुनवाई से न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने खुद को अलग कर लिया है। अब इस मामले की सुनवाई एक नई पीठ के सामने होगी। हाईकोर्ट ने मामले को 9 सितंबर 2026 को नई पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।यह पूरा मामला गोंडा में करीब तीन दशक से लंबित एक भूमि विवाद से जुड़ा है। इसी मामले की सुनवाई कर रहीं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शबीना खान ने आरोप लगाया था कि दुर्गा शक्ति नागपाल ने उन्हें फोन किया और मुकदमे से संबंधित बातचीत करने की कोशिश की। जज की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की आशंका पर आपराधिक अवमानना के तहत विचार शुरू किया।

सुनवाई से क्यों अलग हुए हाईकोर्ट के जज?

गुरुवार को न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ के सामने दुर्गा शक्ति नागपाल के खिलाफ स्वत: संज्ञान से दर्ज आपराधिक अवमानना का मामला सुनवाई के लिए आया था। इसी दौरान न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।इसके बाद खंडपीठ ने निर्देश दिया कि मामले को मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ न्यायाधीश से नामांकन प्राप्त करने के बाद ऐसी नई पीठ के सामने सूचीबद्ध किया जाए, जिसमें न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव शामिल न हों। मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 सितंबर की तारीख तय की गई है।

IAS दुर्गा शक्ति नागपाल केस
IAS दुर्गा शक्ति नागपाल केस

क्या है पूरा मामला?

मामला गोंडा में वर्ष 1997 से लंबित एक भूमि विवाद से संबंधित है। यह विवाद ज्योति विद्या मंदिर स्कूल और नगर पालिका परिषद, गोंडा के बीच चल रहा है। भूमि को नजूल यानी सरकारी भूमि से जुड़ा बताया गया है। करीब 30 साल पुराने इस मुकदमे की सुनवाई गोंडा की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शबीना खान की अदालत में चल रही थी।इसी मामले में अदालत का रुख उस समय बदला, जब सिविल जज शबीना खान की ओर से जिला जज को भेजे गए पत्र का जिक्र हाईकोर्ट में हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, जज ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि 15 जुलाई को मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने उन्हें फोन किया था। आरोप है कि बातचीत के दौरान जज से लंबित मुकदमे को लेकर चर्चा करने की कोशिश की गई।जज का आरोप था कि उन्होंने मामले पर बात करने से इनकार किया तो बातचीत का लहजा अनुचित हो गया और उन्हें कथित तौर पर भला-बुरा कहा गया। इसके बाद न्यायिक अधिकारी ने मामले को अपनी अदालत से दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने का अनुरोध भी किया था।

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कथित फोन कॉल और बातचीत को गंभीरता से लिया था। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना था कि बातचीत के तरीके और उसमें इस्तेमाल भाषा से न्यायिक अधिकारी को प्रभावित करने का प्रयास प्रतीत होता है।हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि अधीनस्थ अदालतों के न्यायिक अधिकारियों को किसी भी तरह के दबाव या अपमान से सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि वे बिना किसी भय के अपने न्यायिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें। अदालत के अनुसार, न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े मामले में किसी व्यक्ति या अधिकारी की ओर से दबाव बनाने का प्रयास न्याय प्रशासन में बाधा पैदा कर सकता है।इसी आधार पर अदालत ने मामले को आपराधिक अवमानना के तहत विचार किए जाने योग्य माना और आगे की प्रक्रिया के लिए उचित पीठ के समक्ष मामला रखने का निर्देश दिया था।

दुर्गा शक्ति नागपाल ने आरोपों पर क्या कहा?

दूसरी तरफ IAS अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने अपने ऊपर लगाए गए कई आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी न्यायिक अधिकारी पर दबाव डालना नहीं था। उनके अनुसार, संबंधित मामला सरकारी जमीन से जुड़ा है और करीब तीन दशक से लंबित है।नागपाल के मुताबिक, पदभार संभालने के बाद उनका उद्देश्य सरकारी भूमि के संरक्षण और सरकार की ओर से लंबित मामले में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं मिल पा रही थी कि संबंधित न्यायिक अधिकारी छुट्टी से कब लौटेंगी या उनकी छुट्टी आगे बढ़ेगी। इसी जानकारी के लिए उन्होंने फोन किया था।उन्होंने यह भी कहा कि फोन पर न तो मुकदमे के गुण-दोष पर चर्चा हुई, न किसी आदेश या फैसले को लेकर बात की गई और न ही केस नंबर या केस का नाम लेकर चर्चा हुई। नागपाल ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसकी गरिमा का सम्मान करने की बात भी कही है।

अब 9 सितंबर को क्या होगा?

हाईकोर्ट के मौजूदा आदेश के बाद अब इस मामले की सुनवाई नई पीठ करेगी। 9 सितंबर 2026 को मामले को नई बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाएगा। इसके बाद अदालत यह देखेगी कि कथित बातचीत और उससे जुड़े आरोपों के आधार पर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही में आगे क्या कदम उठाया जाए।फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोप न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम निष्कर्ष अदालत की आगे की कार्यवाही के बाद ही सामने आएगा। हालांकि, एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और न्यायिक अधिकारी के बीच कथित बातचीत से जुड़ा यह विवाद अब उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और न्यायिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।IAS दुर्गा शक्ति नागपाल और गोंडा की सिविल जज शबीना खान से जुड़े इस मामले में अब नया मोड़ आ गया है। हाईकोर्ट के एक जज के सुनवाई से अलग होने के बाद मामला नई पीठ के पास जाएगा। 9 सितंबर की सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी, क्योंकि इसी के बाद यह स्पष्ट होगा कि आपराधिक अवमानना की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है। वहीं, नागपाल की ओर से आरोपों से इनकार किया गया है और उनका कहना है कि फोन करने का उद्देश्य केवल सरकारी भूमि से जुड़े पुराने मुकदमे की प्रशासनिक स्थिति समझना था।

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