रिपोर्ट :मो अरशद
- खेतों में भरा 1 से डेढ़ फीट तक पानी
- पानी उतरते ही होगा फसलों के नुकसान का सर्वे
- मेडिकल कैंप और राहत टीमें मुस्तैद
- विधायक ठाकुर रामवीर सिंह ने क्या कहा?
- सड़कों और पुलियों की हालत पर भी नजर
- 24 घंटे नदियों के जलस्तर की निगरानी
- किसानों की बढ़ी चिंता, प्रशासन ने दिया भरोसा
- प्रशासन अलर्ट, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में
मुरादाबाद जनपद में कोसी, रामगंगा और रजहेड़ा नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। मूढ़ापांडे ब्लॉक और खादर क्षेत्र के कई गांवों में नदियों का पानी खेतों और रास्तों तक पहुंच गया है। हालात का जायजा लेने के लिए जिलाधिकारी राजेंद्र पेसिया और कुंदरकी विधायक ठाकुर रामवीर सिंह प्रशासनिक अधिकारियों की टीम के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। अधिकारियों ने गांवों, खेतों, रास्तों और जलभराव वाले इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया और ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं।मूढ़ापांडे क्षेत्र के भीतखेड़ा, हिरनखेड़ा, जैतपुर बिसोटा और जगरमपुरा समेत कई गांवों में नदी के उफान के कारण खेतों में पानी भर गया है। इससे किसानों की फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि जलस्तर और फसलों के नुकसान पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है।
खेतों में भरा 1 से डेढ़ फीट तक पानी
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी राजेंद्र पेसिया ने बताया कि फिलहाल जिले में बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति नहीं है, हालांकि कई इलाकों के खेतों में करीब एक से डेढ़ फीट तक पानी भरा हुआ है। राहत की बात यह है कि जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है।डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जाए और किसी भी तरह की आपात स्थिति सामने आने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जाए।
डीएम की बाइट — सबसे अहम संदेश
“अभी बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति नहीं है। खेतों में पानी भरा है, जो धीरे-धीरे उतर रहा है। मेडिकल कैंप और हमारी पूरी टीम मौके पर मौजूद है। पानी उतरते ही फसलों के नुकसान का सर्वे कराया जाएगा और नियमानुसार किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।”
डीएम का यह बयान किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि जलभराव के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है।
पानी उतरते ही होगा फसलों के नुकसान का सर्वे
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जलस्तर सामान्य होने के बाद कानूनगो और लेखपालों की टीम गांव-गांव जाकर फसलों के नुकसान का सर्वे करेगी। सर्वे के आधार पर नुकसान का आकलन किया जाएगा।प्रशासन के मुताबिक यदि किसी किसान की फसल को 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान हुआ है तो नियमानुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इससे प्रभावित किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।प्रशासन ने राजस्व विभाग की टीमों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं, ताकि पानी कम होते ही नुकसान का सर्वे शुरू किया जा सके और किसानों को राहत पहुंचाने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
मेडिकल कैंप और राहत टीमें मुस्तैद
बाढ़ और जलभराव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल कैंप और राहत टीमों को मुस्तैद कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।इसके अलावा बाढ़ शरणालयों को भी तैयार रखा गया है, ताकि स्थिति बिगड़ने पर जरूरत के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।प्रशासन की ओर से ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाएं और नदी के बढ़ते जलस्तर से संबंधित किसी भी सूचना को गंभीरता से लें।
विधायक ठाकुर रामवीर सिंह ने क्या कहा?
निरीक्षण के दौरान मौके पर मौजूद कुंदरकी विधायक ठाकुर रामवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और शासन पूरी तरह सजग है और प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है।विधायक ने कहा कि पानी उतरने के बाद फसलों के नुकसान का सर्वे कराया जाएगा और किसानों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराई जाएगी।
विधायक की बाइट — किसानों और सड़कों को लेकर बड़ा आश्वासन
“सरकार और शासन पूरी तरह सजग है। मुख्यमंत्री जी के स्पष्ट निर्देश हैं कि बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। पानी उतरने के बाद फसलों का सर्वे कराया जाएगा। सड़कों और पुलियों की स्थिति का भी आकलन कराकर मरम्मत का काम प्राथमिकता से कराया जाएगा।”
विधायक के मुताबिक जलभराव समाप्त होने के बाद पीडब्ल्यूडी के माध्यम से क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलियों की मरम्मत कराई जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

सड़कों और पुलियों की हालत पर भी नजर
जलभराव का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है। कई ग्रामीण रास्तों और संपर्क मार्गों पर भी पानी जमा होने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने ऐसी सड़कों को भी चिन्हित करने की तैयारी शुरू कर दी है, जिन्हें पानी उतरने के बाद मरम्मत की जरूरत होगी।अधिकारियों के अनुसार जलभराव खत्म होने के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों का निरीक्षण कराया जाएगा और आवश्यकता के अनुसार मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा।
24 घंटे नदियों के जलस्तर की निगरानी
मुरादाबाद प्रशासन की ओर से कोसी, रामगंगा और रजहेड़ा नदी के जलस्तर और बहाव पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। अधिकारियों की टीमें लगातार स्थिति की जानकारी जुटा रही हैं।प्रशासन का उद्देश्य है कि यदि जलस्तर अचानक बढ़ता है या किसी गांव में बाढ़ की स्थिति बनती है तो लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। इसके लिए राहत टीमों और मेडिकल टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है।
किसानों की बढ़ी चिंता, प्रशासन ने दिया भरोसा
खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। लंबे समय से मेहनत कर तैयार की गई फसल को जलभराव से नुकसान पहुंचने की आशंका है। ऐसे में प्रशासन की ओर से फसल नुकसान का सर्वे और नियमानुसार मुआवजा देने के आश्वासन से किसानों को कुछ राहत मिली है।अधिकारियों ने कहा कि नुकसान का वास्तविक आकलन पानी उतरने के बाद ही किया जा सकेगा। इसके बाद राजस्व विभाग की टीमों द्वारा सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
प्रशासन अलर्ट, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में
मुरादाबाद में नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन ने स्थिति पर अपनी नजर बनाए रखी है। डीएम राजेंद्र पेसिया और विधायक ठाकुर रामवीर सिंह के स्थलीय निरीक्षण से यह साफ है कि प्रशासन किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
फिलहाल प्रशासन ने स्थिति को गंभीर बाढ़ की श्रेणी में नहीं माना है और बताया है कि खेतों में जमा पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसके बावजूद प्रभावित गांवों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
मुख्य बातें एक नजर में
- कोसी, रामगंगा और रजहेड़ा नदी के जलस्तर पर प्रशासन की नजर।
- मूढ़ापांडे क्षेत्र के कई गांवों के खेतों में 1 से डेढ़ फीट तक पानी।
- डीएम और विधायक ने मौके पर पहुंचकर लिया हालात का जायजा।
- मेडिकल कैंप और राहत टीमें प्रभावित क्षेत्रों में मुस्तैद।
- पानी उतरने के बाद फसलों के नुकसान का होगा सर्वे।
- 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल नुकसान पर नियमानुसार मुआवजा।
- क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलियों की पानी उतरने के बाद होगी मरम्मत।
- नदियों के जलस्तर की 24 घंटे निगरानी की जा रही है।
मुरादाबाद में कोसी और रामगंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि जिला प्रशासन के अनुसार फिलहाल बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति नहीं है और कई इलाकों में पानी धीरे-धीरे उतर रहा है। इसके बावजूद प्रभावित गांवों में प्रशासन ने निगरानी और राहत व्यवस्था मजबूत कर दी है।डीएम राजेंद्र पेसिया ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि पानी उतरने के बाद फसलों के नुकसान का सर्वे कराया जाएगा और 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान होने पर नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। वहीं विधायक ठाकुर रामवीर सिंह ने सड़कों और पुलियों की मरम्मत को प्राथमिकता देने की बात कही है।अब प्रशासन की नजर नदियों के जलस्तर पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में जलस्तर में होने वाला बदलाव यह तय करेगा कि स्थिति सामान्य रहती है या प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान को और व्यापक करना पड़ता है।
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