रिपोर्ट:राहुल वर्मा
बांदा शिक्षक दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश में बंद किए गए प्राथमिक विद्यालयों के मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर बांदा सदर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बजरंगपुरवा में बंद पड़े प्राथमिक विद्यालय के बाहर पार्टी कार्यकर्ताओं ने चौपाल लगाई। इस दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विद्यालयों को बंद किए जाने के फैसले का विरोध करते हुए सरकार से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की।चौपाल के दौरान समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कहा कि शिक्षक दिवस शिक्षा और शिक्षकों के सम्मान का दिन है। ऐसे अवसर पर बंद प्राथमिक विद्यालयों का मुद्दा उठाना इसलिए जरूरी है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बच्चे सरकारी स्कूलों के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करते हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि विद्यालयों को बंद किए जाने का असर गांव के गरीब, किसान, मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर पड़ सकता है।
शिक्षक दिवस पर सपा ने क्यों लगाई चौपाल?
बजरंगपुरवा में आयोजित चौपाल का मुख्य उद्देश्य बंद प्राथमिक विद्यालयों के मुद्दे को जनता के बीच उठाना रहा। सपा नेताओं ने कहा कि सरकार को स्कूलों को बंद करने के बजाय वहां शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था, बेहतर भवन और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए।पार्टी की ओर से कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं होते, बल्कि बच्चों के भविष्य की पहली सीढ़ी होते हैं। ऐसे में किसी विद्यालय के बंद होने से आसपास के परिवारों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है।चौपाल में इस बात पर जोर दिया गया कि गांवों में शिक्षा की मजबूत व्यवस्था होने से बच्चों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
ओम नारायण त्रिपाठी ने सरकार पर साधा निशाना
कार्यक्रम के दौरान ओम नारायण त्रिपाठी ‘विदित’ ने प्राथमिक विद्यालयों को बंद किए जाने को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस के दिन जब पूरे देश में शिक्षकों के योगदान और शिक्षा के महत्व की चर्चा हो रही है, उसी समय बंद पड़े प्राथमिक विद्यालयों का मुद्दा उठाना बेहद महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा प्राथमिक विद्यालयों को बंद किया जाना गांव के गरीब, किसान, मजदूर और वंचित परिवारों के बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।ओम नारायण त्रिपाठी ‘विदित’ ने कहा कि विद्यालय केवल भवन नहीं होते, बल्कि गांव के बच्चों के सपनों और उनके भविष्य की नींव होते हैं। सरकार को स्कूल बंद करने के बजाय वहां पर्याप्त शिक्षक, बेहतर भवन और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।
‘विद्यालय बच्चों के भविष्य की नींव’
सपा नेताओं ने चौपाल के दौरान कहा कि प्राथमिक शिक्षा किसी भी बच्चे के शैक्षणिक जीवन की बुनियाद होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए ये स्कूल शिक्षा का प्रमुख माध्यम होते हैं।पार्टी का कहना है कि यदि स्कूलों में संसाधनों या शिक्षकों की कमी है तो सरकार को उसे दूर करना चाहिए। विद्यालय बंद करना समस्या का समाधान नहीं है। इसके बजाय स्कूलों में शिक्षकों की संख्या बढ़ाने, भवनों को बेहतर करने, शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है।सपा ने आरोप लगाया कि विद्यालय बंद होने का सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ सकता है जो अपने बच्चों को दूर स्थित स्कूलों तक भेजने में सक्षम नहीं हैं।

2027 में सरकार बनने पर स्कूल खोलने का दावा
चौपाल के दौरान सपा नेताओं ने अखिलेश यादव के उस राजनीतिक संकल्प को भी दोहराया, जिसमें पार्टी की ओर से कहा गया है कि वर्ष 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर बंद पड़े प्राथमिक विद्यालयों को दोबारा संचालित कराया जाएगा।सपा नेताओं के मुताबिक, पार्टी सत्ता में आने पर प्रदेश में बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में काम करेगी।हालांकि यह समाजवादी पार्टी का राजनीतिक दावा और चुनावी संकल्प है। प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर शिक्षा व्यवस्था और सरकारी विद्यालयों का मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।
ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ी राजनीतिक बहस
उत्तर प्रदेश में सरकारी विद्यालयों की स्थिति, विद्यार्थियों की संख्या, स्कूलों के विलय या बंद किए जाने और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर समय-समय पर राजनीतिक दलों के बीच बहस होती रही है। समाजवादी पार्टी लगातार ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था और सरकारी स्कूलों से जुड़े मुद्दों को उठाती रही है।बांदा में शिक्षक दिवस पर आयोजित चौपाल इसी राजनीतिक अभियान की एक कड़ी के रूप में सामने आई। पार्टी ने स्थानीय स्तर पर लोगों से संवाद करते हुए बंद विद्यालयों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।सपा नेताओं ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की बेहतर व्यवस्था होने से बच्चों को अपने गांव और आसपास ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल सकता है।
‘शिक्षा हर बच्चे का अधिकार’
चौपाल में सपा की ओर से कहा गया कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। पार्टी ने कहा कि गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों को भी वही शैक्षणिक अवसर मिलने चाहिए जो शहरों में रहने वाले बच्चों को उपलब्ध होते हैं।नेताओं ने कहा कि सरकार को सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक योजना बनानी चाहिए। इसमें स्कूल भवन, शिक्षक, डिजिटल सुविधाएं, पुस्तकालय, खेलकूद और अन्य जरूरी संसाधनों को शामिल किया जाना चाहिए।
2027 के चुनाव से पहले शिक्षा बना मुद्दा
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में शिक्षा, रोजगार, ग्रामीण विकास और सरकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दे राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।बांदा में शिक्षक दिवस के अवसर पर सपा की चौपाल को भी इसी राजनीतिक संदर्भ में देखा जा सकता है। पार्टी ने बंद प्राथमिक विद्यालयों के मुद्दे को ग्रामीण बच्चों और गरीब परिवारों के भविष्य से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल उठाए।सपा का कहना है कि वह बच्चों के भविष्य और ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आगे भी इस मुद्दे को उठाती रहेगी।बांदा के बजरंगपुरवा गांव में बंद प्राथमिक विद्यालय के बाहर शिक्षक दिवस पर समाजवादी पार्टी की चौपाल ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है। सपा नेताओं ने विद्यालय बंद किए जाने के फैसले का विरोध करते हुए सरकार से स्कूलों को दोबारा संचालित करने और उनमें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।ओम नारायण त्रिपाठी ‘विदित’ ने कहा कि विद्यालय गांव के बच्चों के भविष्य की नींव हैं और उन्हें बंद करने के बजाय मजबूत किया जाना चाहिए। वहीं, पार्टी ने वर्ष 2027 में सरकार बनने पर बंद प्राथमिक विद्यालयों को दोबारा संचालित कराने का दावा किया है। अब देखना होगा कि चुनावी माहौल में बंद स्कूल और ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा कितना बड़ा राजनीतिक विषय बनता है।
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