राम वनगमन पथ में खामियां, अभियंताओं पर कार्रवाई; ठेकेदार होगा ब्लैकलिस्ट

Editorial
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लखनऊ उत्तर प्रदेश में भगवान श्रीराम से जुड़े महत्वपूर्ण राम वनगमन पथ के निर्माण को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शुभारंभ से पहले ही इस मार्ग के एक हिस्से में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर खामियां सामने आई हैं। जांच में सड़क के साथ-साथ फ्लाईओवर के स्लैब और उसके आसपास के हिस्से में समस्याएं पाए जाने के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।मामले में पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता ओमकार भारती और अधिशासी अभियंता रवींद्र पाल सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने की तैयारी है। ठेकेदार को डिबार यानी ब्लैकलिस्ट करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को पत्र भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

उद्घाटन से पहले सामने आई निर्माण की खामी

राम वनगमन पथ को भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को जोड़ने वाली परियोजना के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में इस मार्ग के निर्माण को धार्मिक, पर्यटन और बुनियादी ढांचे की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।लेकिन परियोजना के एक हिस्से में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक, अवतारपुर से सिंहरौर-उपरिहार के बीच बने हिस्से में फ्लाईओवर के स्लैब में बड़ी खामियां मिली हैं। इसके अलावा मार्ग के करीब डेढ़ किलोमीटर हिस्से में साइड के बांध और ढाल भी क्षतिग्रस्त पाए गए हैं।निर्माण में सामने आई इन कमियों के बाद विभागीय स्तर पर जांच कराई गई। थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट में भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई, जिसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।

करीब 14 किलोमीटर लंबा है संबंधित हिस्सा

राम वनगमन पथ के अवतारपुर से सिंहरौर-उपरिहार वाला हिस्सा करीब 14 किलोमीटर लंबा बताया गया है। इसी हिस्से में निर्माण संबंधी गंभीर खामियां सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा है।जानकारी के अनुसार, लगभग डेढ़ किलोमीटर हिस्से में साइड के बांध और ढाल को नुकसान पहुंचा है। वहीं फ्लाईओवर के स्लैब में भी खामियां मिलने की बात सामने आई है।किसी महत्वपूर्ण सड़क परियोजना में निर्माण के बाद इस तरह की कमियां सामने आना गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। खासकर तब, जब परियोजना का शुभारंभ प्रस्तावित हो और मार्ग को लंबे समय तक यातायात के लिए इस्तेमाल किया जाना हो।

थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट में खराब मिली गुणवत्ता

निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच के लिए कराए गए थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट में भी काम की गुणवत्ता खराब पाई गई। इसके बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की।थर्ड पार्टी ऑडिट का उद्देश्य निर्माण कार्य की गुणवत्ता का स्वतंत्र तरीके से आकलन करना होता है। ऐसे में ऑडिट रिपोर्ट में कमियां सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है।विभागीय कार्रवाई के आदेश इसी जांच प्रक्रिया के बाद सामने आए हैं। अब यह देखा जाएगा कि निर्माण में खामी के लिए किस स्तर पर लापरवाही हुई और उसे ठीक कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

दो अभियंताओं पर विभागीय कार्रवाई के आदेश

मामले में पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता ओमकार भारती और अधिशासी अभियंता रवींद्र पाल सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्माण कार्य की निगरानी, गुणवत्ता और परियोजना की प्रगति से जुड़ी होती है। ऐसे में निर्माण में गंभीर खामियां मिलने के बाद विभाग ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का फैसला किया है।अब विभागीय जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि निर्माण की निगरानी में कहां चूक हुई और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है। कार्रवाई की आगे की प्रक्रिया जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय हो सकती है।

ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के लिए मंत्रालय को पत्र

सिर्फ अधिकारियों पर कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं है। निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की तैयारी की गई है।जानकारी के अनुसार, ठेकेदार को डिबार या ब्लैकलिस्ट करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को पत्र भेजा गया है। यदि ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई होती है तो इसका असर भविष्य में सरकारी परियोजनाओं में उसकी भागीदारी पर भी पड़ सकता है।यह कदम निर्माण गुणवत्ता से जुड़े मामलों में विभाग की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राम वनगमन पथ परियोजना क्यों है महत्वपूर्ण?

राम वनगमन पथ धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना है। इसका उद्देश्य भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़े विभिन्न स्थलों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ना है। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ संबंधित क्षेत्रों में आवागमन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचने की उम्मीद है।उत्तर प्रदेश में अयोध्या के विकास के साथ रामायण और भगवान श्रीराम से जुड़े स्थलों को जोड़ने वाली परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ऐसे में राम वनगमन पथ की गुणवत्ता को लेकर सामने आई यह खबर महत्वपूर्ण है।

अब निर्माण की गुणवत्ता सुधारने पर नजर

उद्घाटन से पहले निर्माण में खामियां सामने आने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती संबंधित हिस्से को मानकों के अनुरूप दुरुस्त करने की होगी। विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय करने के साथ क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत और गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देना होगा।फिलहाल अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के लिए मंत्रालय को भेजे गए पत्र से साफ है कि मामला गंभीरता से लिया गया है। आने वाले दिनों में विभागीय जांच और आगे की कार्रवाई से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं।राम वनगमन पथ की यह परियोजना धार्मिक आस्था के साथ-साथ सड़क और पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसलिए इसके निर्माण में गुणवत्ता और सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो, यह सबसे अहम मुद्दा रहेगा।

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