रिपोर्ट:संतोष कुमार अग्रहरि
सिद्धार्थनगर भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से शनिवार को सिद्धार्थनगर के खुनुवां बॉर्डर पर भारत और नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों की एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सीमा पार से होने वाली नशीली पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, गो तस्करी, अवैध घुसपैठ और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों ने संयुक्त रणनीति तैयार की। बैठक के बाद सीमा पर वाहनों और आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सघन जांच अभियान भी शुरू किया गया।सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) की सीमा चौकी स्थित बार्डर चेकिंग पोस्ट भवन में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता एसएसबी कमांडेंट उज्जवल दत्ता ने की। इसमें नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF), नेपाल पुलिस, एसएसबी, खुनुवां पुलिस, कस्टम विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ सीमा क्षेत्र के व्यापारी और स्थानीय प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
सीमा सुरक्षा को लेकर बनी संयुक्त रणनीति
बैठक के दौरान अधिकारियों ने सीमा की वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की। सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थापित चौकियों की कार्यप्रणाली, एसएसबी की तैनाती, निगरानी तंत्र और दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को और प्रभावी बनाने पर विशेष चर्चा हुई।अधिकारियों ने इस बात पर सहमति जताई कि सीमा पार से होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत सूचना साझा की जाएगी, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। दोनों देशों ने सीमा सुरक्षा को लेकर एक-दूसरे के साथ निरंतर सहयोग बनाए रखने का भरोसा भी जताया।

तस्करी और अवैध गतिविधियों पर रहेगा सख्त पहरा
भारत-नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाकर कई बार तस्कर और अपराधी गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। इसी को देखते हुए बैठक में विशेष रूप से नशीली दवाओं की तस्करी, मानव तस्करी, गो तस्करी, अवैध हथियारों की आवाजाही और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की रणनीति बनाई गई।अधिकारियों ने कहा कि सीमा सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी मिलती है तो तुरंत संबंधित एजेंसी को सूचना दी जानी चाहिए।
हर वाहन और हर व्यक्ति की होगी सघन जांच
बैठक के बाद सहायक कमांडेंट अभिषेक सिंह के नेतृत्व में सीमा क्षेत्र में विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान सीमा से गुजरने वाले वाहनों, मालवाहक गाड़ियों और पैदल आने-जाने वाले लोगों की गहन जांच की गई।सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया कि सीमा पार करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक न हो।
सीमावर्ती गांवों से मांगा सहयोग
अधिकारियों ने सीमावर्ती गांवों के लोगों और व्यापारियों से अपील की कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, संदिग्ध व्यक्ति या तस्करी की जानकारी मिले तो बिना देर किए पुलिस, एसएसबी या संबंधित एजेंसी को सूचित करें।उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की सतर्कता से कई बड़ी घटनाओं को रोका जा सकता है। सीमा क्षेत्र में रहने वाले नागरिक सुरक्षा व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी साबित हो सकते हैं।

व्यापारियों ने भी जताई चिंता
बैठक में शामिल व्यापारियों ने सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की मांग की। उनका कहना था कि अवैध गतिविधियों का असर वैध व्यापार पर भी पड़ता है। इसलिए सीमावर्ती इलाकों में नियमित निगरानी और संयुक्त अभियान जरूरी हैं।व्यापारियों ने दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के इस समन्वय प्रयास का स्वागत करते हुए भरोसा जताया कि इससे सीमा क्षेत्र में अपराध और तस्करी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में एसएसबी सब इंस्पेक्टर पंकज सिंह, चौकी प्रभारी सुरेश यादव, कस्टम इंस्पेक्टर रमेश कुमार, एपीएफ इंस्पेक्टर हरित बढुवाल, मर्यादपुर पुलिस चौकी प्रभारी राजेश गिरी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।इसके अलावा व्यापार मंडल अध्यक्ष रविन्द्र कुमार गुप्ता, महामंत्री सचमुच त्रिपाठी, संतोष कुमार गुप्ता, कुबेर चन्द्र, कृष्ण कुमार मिश्र, अनिल कसौधन सहित बड़ी संख्या में व्यापारी और ग्रामीण भी बैठक में शामिल हुए।
सीमा सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती
भारत-नेपाल सीमा सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि खुली सीमा होने के कारण समय-समय पर तस्करी और अवैध गतिविधियों की चुनौतियां भी सामने आती रहती हैं। ऐसे में दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और संयुक्त निगरानी व्यवस्था सीमा सुरक्षा को नई मजबूती देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।खुनुवां बॉर्डर पर आयोजित इस समन्वय बैठक ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत और नेपाल अब सीमा सुरक्षा को लेकर पहले से अधिक सतर्क और समन्वित तरीके से काम करेंगे। संयुक्त निगरानी, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान, तस्करी पर सख्त कार्रवाई और स्थानीय लोगों की भागीदारी के माध्यम से सीमा को सुरक्षित बनाने की दिशा में यह पहल बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों की ऐसी संयुक्त कार्रवाई सीमावर्ती क्षेत्रों में अपराध और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
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