रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित
नवाबगंज/फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश में सरकारी और धार्मिक संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए अभियान चलाए जाने के बीच फर्रुखाबाद के नवाबगंज थाना क्षेत्र के ग्राम कक्योली स्थित प्राचीन रामताल आश्रम की संपत्ति को लेकर विवाद सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने आश्रम की सैकड़ों बीघा भूमि पर वर्षों से कथित अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से धार्मिक स्थल की व्यवस्थाएं लगातार बदहाल होती जा रही हैं।ग्रामीणों के मुताबिक रामताल आश्रम क्षेत्र की पुरानी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर है। यहां आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज क्षेत्रों से भी श्रद्धालु दर्शन, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। आश्रम परिसर में स्थित रामताल कुंड भी लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। हालांकि, वर्तमान में कुंड की स्थिति को लेकर श्रद्धालुओं में नाराजगी है। नियमित सफाई और रखरखाव के अभाव में कुंड में गंदगी जमा होने का आरोप है।
रामताल कुंड की बदहाली पर श्रद्धालुओं में नाराजगी
श्रद्धालुओं का कहना है कि धार्मिक महत्व वाले रामताल कुंड की नियमित साफ-सफाई और देखरेख होनी चाहिए। इसके विपरीत कुंड में गंदगी और आसपास अव्यवस्थाओं के कारण यहां आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रामताल आश्रम की व्यवस्थाओं पर नियमित ध्यान दिया जाए तो यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं। लोगों ने कुंड की तत्काल सफाई कराने के साथ-साथ उसके सौंदर्यीकरण और नियमित रखरखाव की व्यवस्था किए जाने की मांग की है।

आश्रम की सैकड़ों बीघा भूमि को लेकर उठे सवाल
रामताल आश्रम की संपत्ति को लेकर सबसे बड़ा सवाल उसकी भूमि के कथित कब्जे को लेकर उठाया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि आश्रम की सैकड़ों बीघा भूमि पर लंबे समय से कुछ लोगों का कथित कब्जा है। लोगों का कहना है कि आश्रम की कृषि भूमि से होने वाली आय का इस्तेमाल धार्मिक स्थल के विकास, रखरखाव और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए होना चाहिए।ग्रामीणों का आरोप है कि आश्रम की जमीन और उससे होने वाली आय के संबंध में पारदर्शिता का अभाव है। उनका कहना है कि यदि आश्रम की संपत्ति का सही तरीके से प्रबंधन किया जाए तो उससे धार्मिक स्थल की व्यवस्थाओं को बेहतर किया जा सकता है। इन आरोपों की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और राजस्व अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
महंत को लेकर भी सामने आया विवाद
आश्रम की संपत्ति को लेकर स्थानीय लोगों के आरोपों के साथ महंत को लेकर भी विवाद सामने आया है। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का दावा है कि बाबा मनमोहन दास को मंदिर का वैध उत्तराधिकारी बताया जाता है। वहीं आरोप लगाया गया है कि प्रभावशाली लोगों के सहयोग से बाबा मोहन दास द्वारा आश्रम और मंदिर की संपत्ति पर कथित रूप से कब्जा किया गया है।स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आश्रम की संपत्ति का वास्तविक प्रबंधन किसके पास है और भूमि से संबंधित अभिलेखों में क्या स्थिति दर्ज है।इन आरोपों की पुष्टि के लिए राजस्व रिकॉर्ड, भूमि के दस्तावेज, कब्जे की स्थिति और आश्रम की संपत्ति से जुड़े पुराने अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

प्रशासन से रिकॉर्ड की जांच और पैमाइश की मांग
ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन से रामताल आश्रम की पूरी संपत्ति का रिकॉर्ड सामने लाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि आश्रम की भूमि की पैमाइश कराकर राजस्व अभिलेखों से उसका मिलान कराया जाना चाहिए।स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन यह भी जांच करे कि आश्रम के नाम कितनी भूमि दर्ज है, वर्तमान में उस पर किसका कब्जा है और भूमि से संबंधित किसी प्रकार का विवाद या हस्तांतरण तो नहीं हुआ है। यदि जांच में किसी तरह का अवैध कब्जा सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
धार्मिक धरोहर के संरक्षण की उठी मांग
ग्रामीणों का कहना है कि रामताल आश्रम केवल जमीन का मामला नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्र की धार्मिक आस्था भी जुड़ी हुई है। आश्रम और रामताल कुंड की बदहाली से श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हो रही हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि धार्मिक स्थल की मूल व्यवस्था को बहाल करने के साथ वहां साफ-सफाई, प्रकाश, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाए।श्रद्धालुओं ने रामताल कुंड की सफाई और सौंदर्यीकरण को प्राथमिकता देने की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक स्थल पर आने वाले लोगों को बेहतर वातावरण मिलना चाहिए और आश्रम की संपत्ति का उपयोग उसके धार्मिक एवं जनहितकारी उद्देश्य के लिए होना चाहिए।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक तस्वीर
रामताल आश्रम की संपत्ति पर कब्जे और प्रबंधन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों ने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन राजस्व अभिलेखों की जांच, भूमि की पैमाइश और मौके का सत्यापन कराए तो पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। इसके साथ ही रामताल कुंड की बदहाली दूर करने और आश्रम परिसर की व्यवस्थाओं को सुधारने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है।फिलहाल आश्रम की भूमि पर कथित कब्जे और संपत्ति के प्रबंधन को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आश्रम की भूमि पर वास्तविक स्थिति क्या है और किन लोगों की भूमिका इस पूरे विवाद में है। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर धार्मिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
Read on:http://सपा ने बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचकर बांटी राहत सामग्री, सर्वेश अंबेडकर ने लिया हालात का जायजा
Advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

