फर्रुखाबाद दिव्यांग शिविर में 190 पंजीकरण, 258 सहायक उपकरण वितरित

Editorial
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रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित

फर्रुखाबाद दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एस.एन. साध ट्रस्ट के सौजन्य से आयोजित दिव्यांग सहायता शिविर का सोमवार को शुभारंभ हुआ। डॉ. रजनी सरीन की स्मृति में आयोजित इस शिविर में पहले ही दिन बड़ी संख्या में दिव्यांगजन पहुंचे। सुबह से ही पंजीकरण के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही। शिविर के पहले दिन कुल 190 दिव्यांगजनों का पंजीकरण किया गया, जबकि जरूरत के अनुसार 258 सहायक उपकरण निशुल्क वितरित किए गए।

मधु साध ने किया शिविर का शुभारंभ

दिव्यांग सहायता शिविर का विधिवत शुभारंभ प्रमुख ट्रस्टी राकेश साध की पत्नी श्रीमती मधु साध ने किया। शिविर का उद्देश्य जरूरतमंद दिव्यांगजनों को उनकी शारीरिक आवश्यकताओं के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें दैनिक जीवन में सुविधा मिल सके और वे अधिक आत्मनिर्भर बन सकें।शिविर शुरू होते ही दूर-दराज क्षेत्रों से भी दिव्यांगजन अपने परिजनों के साथ पहुंचे। पंजीकरण के बाद विशेषज्ञों और शिविर में मौजूद टीम ने जरूरत के अनुसार उपकरणों का चयन किया। इसके बाद लाभार्थियों को निशुल्क सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए।

फर्रुखाबाद दिव्यांग शिविर में 190 पंजीकरण
फर्रुखाबाद दिव्यांग शिविर में 190 पंजीकरण

190 पंजीकरण, 258 उपकरण वितरित

शिविर के पहले दिन कुल 190 पंजीकरण हुए। पंजीकरण के बाद दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग प्रकार के उपकरण दिए गए। आयोजकों के अनुसार पहले दिन कुल 258 उपकरण वितरित किए गए।वितरित किए गए उपकरणों में 16 ट्राई साइकिल, 8 कृत्रिम हाथ, 12 व्हीलचेयर, 35 छड़ियां, 22 कैलिपर, 25 कृत्रिम पैर, 30 बैसाखियां, 15 वॉकर, 30 जोड़ी जूते और 65 कान की मशीन शामिल हैं।इन उपकरणों के मिलने से दिव्यांगजनों और उनके परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों में काफी मदद मिलने की उम्मीद है। शिविर में लाभार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उपकरण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया।

फर्रुखाबाद दिव्यांग शिविर में 190 पंजीकरण
फर्रुखाबाद दिव्यांग शिविर में 190 पंजीकरण

कान की समस्या वाले दिव्यांगजनों की भी हुई जांच

शिविर में केवल सहायक उपकरण वितरण ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया। कान की समस्या से जूझ रहे दिव्यांगजनों के लिए ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अनु ने परीक्षण किया।जांच के बाद जिन लोगों को कान की मशीन अथवा दवाओं की आवश्यकता बताई गई, उन्हें आवश्यक सलाह दी गई। ट्रस्ट की ओर से जरूरत के अनुसार कान की मशीन और दवाएं भी निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।इस पहल से उन दिव्यांगजनों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें सुनने संबंधी समस्याओं के कारण रोजमर्रा के कामों और संवाद में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

जयपुर से आई विशेष टीम ने संभाली जिम्मेदारी

दिव्यांग सहायता शिविर में उपकरणों के वितरण और लाभार्थियों की सहायता के लिए जयपुर से विशेष टीम भी पहुंची। टीम के सदस्यों ने दिव्यांगजनों की जरूरतों को समझने, उपकरण उपलब्ध कराने और उन्हें उपयोग संबंधी आवश्यक जानकारी देने में सहयोग किया।शिविर की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित रखने में ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राकेश साध, चमकेश साध, प्रिया साध, रितेश साध, राहुल साध, गुंजा जैन और रोहित गर्ग सहित अन्य सहयोगियों ने व्यवस्थाओं को संभाला।

समाजसेवा के उद्देश्य से आयोजित किया गया शिविर

एस.एन. साध ट्रस्ट की ओर से आयोजित यह शिविर दिव्यांगजनों को सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। शिविर में पहुंचे लाभार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार उपकरण दिए गए, जिससे उन्हें दैनिक जीवन में सहूलियत मिल सके।आयोजकों का कहना है कि ऐसे शिविरों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक सीधे सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। खासतौर पर ऐसे दिव्यांगजन जिन्हें महंगे सहायक उपकरण खरीदने में परेशानी होती है, उनके लिए निशुल्क वितरण कार्यक्रम उपयोगी साबित हो सकता है।

जयपुर की टीम समेत कई लोगों का रहा सहयोग

शिविर के आयोजन में उदय पाल, सुजीत वर्मा, विजय, नितिन, राहुल, प्रभात, नरेश, जगदीश, रॉबिन साध और शेखर साध समेत कई लोगों ने सहयोग किया। जयपुर से आई पूरी टीम ने भी शिविर की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।आयोजकों ने कहा कि किसी भी सामाजिक कार्यक्रम की सफलता में सामूहिक सहयोग महत्वपूर्ण होता है। शिविर में आने वाले दिव्यांगजनों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पंजीकरण से लेकर उपकरण वितरण तक व्यवस्था को सुचारू रखने का प्रयास किया गया।

मीडिया के सहयोग के प्रति जताया आभार

आयोजकों ने शिविर की जानकारी अधिक से अधिक दिव्यांगजनों तक पहुंचाने में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सहयोग के प्रति आभार जताया। उनका कहना है कि ऐसे सहायता शिविरों की जानकारी जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना जरूरी है, ताकि अधिक से अधिक पात्र दिव्यांगजन इसका लाभ उठा सकें।पहले दिन 190 पंजीकरण और 258 उपकरणों के वितरण से शिविर में दिव्यांगजनों की भागीदारी का अंदाजा लगाया जा सकता है। ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग, कैलिपर, बैसाखी, वॉकर, जूते और कान की मशीन जैसे उपकरणों के वितरण से लाभार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायता मिली।शिविर में पहुंचने वाले दिव्यांगजनों और उनके परिजनों के लिए यह आयोजन सहायता के साथ-साथ उम्मीद का माध्यम भी बना। ट्रस्ट और सहयोगी टीम की ओर से दिव्यांगजनों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।

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