लखनऊ उत्तर प्रदेश में रबी सीजन की तैयारियों के बीच किसानों के लिए बीज और उर्वरक की उपलब्धता को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) हर साल उत्तर प्रदेश के किसानों को करीब 80 हजार क्विंटल प्रमाणित गेहूं बीज की आपूर्ति कर रहा है। खास बात यह है कि बीज उत्पादन से जुड़े किसानों को कृभको की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP के ऊपर करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।लखनऊ में आयोजित एक मीडिया कार्यशाला के दौरान कृभको उत्तर प्रदेश के राज्य प्रबंधक ऋषिपाल सिंह राठौर ने संस्था की कृषि क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों और किसानों के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। यह कार्यशाला फोरम फॉर इंडियन जर्नलिस्ट्स ऑन एजुकेशन, एनवायरमेंट, हेल्थ एंड एग्रीकल्चर (फिजीहा) की ओर से एलायंस फॉर चेंज, ट्रांसफॉर्मेशन एंड इनोवेशन (एक्शन) के सहयोग से आयोजित की गई थी।
- चार संयंत्रों में तैयार होता है गेहूं बीज
- यूपी में खाद की आपूर्ति भी सामान्य
- 2.8 करोड़ किसानों तक पहुंच रहे कृषि इनपुट
- मिट्टी जांच और जल प्रबंधन पर प्रशिक्षण
- किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
- शाहजहांपुर में हाईटेक आलू प्रोसेसिंग यूनिट
- वाराणसी में तैयार होते हैं जैव उर्वरक
- ‘सहकार से समृद्धि’ को जमीन पर उतारने का प्रयास
चार संयंत्रों में तैयार होता है गेहूं बीज
कृभको के राज्य प्रबंधक के अनुसार, उत्तर प्रदेश में किसानों को उपलब्ध कराया जाने वाला प्रमाणित गेहूं बीज संस्था के विभिन्न संयंत्रों में प्रोसेस किया जाता है। इसके लिए गोरखपुर, औराई, शाहजहांपुर और गजरौला स्थित संयंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है।प्रोसेसिंग के बाद बीज को प्रमाणित और टैग लगे 40 किलोग्राम के बैग में पैक कर किसानों तक पहुंचाया जाता है। इससे किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने के साथ उसकी गुणवत्ता और पहचान सुनिश्चित करने में भी मदद मिलती है।कृभको केवल गेहूं तक सीमित नहीं है। संस्था की ओर से चना और मसूर के प्रमाणित बीज भी किसानों को उपलब्ध कराए जाते हैं। रबी सीजन में इन फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

यूपी में खाद की आपूर्ति भी सामान्य
कार्यशाला में कृभको के राज्य प्रबंधक ऋषिपाल सिंह राठौर ने प्रदेश में उर्वरकों की आपूर्ति को लेकर भी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के चलते वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बावजूद उत्तर प्रदेश में उर्वरकों की आपूर्ति सामान्य और सुचारू बनी हुई है।कृभको के अनुसार, संस्था उत्तर प्रदेश में हर साल करीब 10 से 12 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति करती है। इसके अलावा करीब 3 लाख मीट्रिक टन डीएपी भी उपलब्ध कराया जाता है।इसके साथ ही किसानों को एसएसपी, जिंक सल्फेट, सूक्ष्म पोषक तत्व, जैविक खाद और जैव उर्वरक भी उपलब्ध कराए जाते हैं। इसका उद्देश्य किसानों को फसल की जरूरत के अनुसार विभिन्न प्रकार के कृषि इनपुट उपलब्ध कराना है।
2.8 करोड़ किसानों तक पहुंच रहे कृषि इनपुट
कृभको के मुताबिक, संस्था के कृषि इनपुट उत्तर प्रदेश में बड़े नेटवर्क के माध्यम से किसानों तक पहुंचते हैं। राज्य की करीब 8,000 सहकारी समितियों और 10,000 निजी डीलरों के जरिए किसानों को कृषि सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।इसके अलावा कृभको के 42 सेवा केंद्र भी संचालित हैं, जो नो-प्रॉफिट, नो-लॉस यानी बिना लाभ-बिना हानि के आधार पर काम करते हैं। संस्था के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क के माध्यम से कृषि इनपुट करीब 2.8 करोड़ किसानों तक पहुंचाए जाते हैं।कृभको का कहना है कि किसानों तक सिर्फ खाद और बीज पहुंचाना ही उसका उद्देश्य नहीं है, बल्कि उन्हें खेती की बेहतर तकनीक और वैज्ञानिक जानकारी से जोड़ना भी उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
मिट्टी जांच और जल प्रबंधन पर प्रशिक्षण
कृभको की ओर से किसानों और सहकारी समितियों को खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है। संस्था के अनुसार, हर साल करीब 1,500 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मिट्टी जांच, संतुलित उर्वरक उपयोग और जल प्रबंधन जैसे विषयों पर किसानों को जानकारी दी जाती है। इसका उद्देश्य किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद और पोषक तत्वों का इस्तेमाल करने के लिए जागरूक करना है, ताकि खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ उत्पादन क्षमता में सुधार किया जा सके।संस्था ने उत्तर प्रदेश में करीब 3,000 किसान समृद्धि केंद्रों के विकास में भी भागीदारी की है।
किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
कृभको के राज्य प्रबंधक ऋषिपाल सिंह राठौर ने कहा कि किसानों के साथ संस्था का संबंध सिर्फ कृषि उत्पाद बेचने तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य मिट्टी और पानी के संरक्षण के साथ किसानों को सक्षम, जागरूक, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाना है।उनके मुताबिक, संतुलित कृषि इनपुट और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के जरिए किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिल सकती है।
शाहजहांपुर में हाईटेक आलू प्रोसेसिंग यूनिट
उत्तर प्रदेश में कृभको की गतिविधियों का दायरा केवल बीज और उर्वरक आपूर्ति तक सीमित नहीं है। संस्था की शत-प्रतिशत स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कृभको फर्टिलाइजर्स लिमिटेड का शाहजहांपुर में संयंत्र है।कंपनी के अनुसार, इस संयंत्र ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपनी स्थापित क्षमता से अधिक उत्पादन किया। इस दौरान संयंत्र में 11.02 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 6.68 लाख मीट्रिक टन अमोनिया का उत्पादन हुआ।इसी संयंत्र के पास कृभको की ओर से एक हाईटेक आलू प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इसके लिए डच कंपनी फार्म फ्राइट्स के साथ संयुक्त उद्यम किया गया है। इस परियोजना से आलू उत्पादन से जुड़े किसानों को भी आगे चलकर लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है।
वाराणसी में तैयार होते हैं जैव उर्वरक
कृभको के देशभर में मौजूद तीन जैव-उर्वरक संयंत्रों में से एक उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित है। यहां राइजोबियम और एज़ोटोबैक्टर सहित विभिन्न प्रकार के जैव उर्वरक तैयार किए जाते हैं।जैव उर्वरकों को खेती में पोषक तत्वों के प्रबंधन और मिट्टी की गुणवत्ता से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इनके उत्पादन और किसानों तक पहुंच को भी संस्था की कृषि संबंधी गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।
‘सहकार से समृद्धि’ को जमीन पर उतारने का प्रयास
फिजीहा के प्रेसिडेंट डॉ. नवनीत आनंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश रबी सीजन के दौरान देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि हजारों ग्रामीण सहकारी संस्थाओं के माध्यम से कृभको की गतिविधियां किसानों तक बीज, पोषक तत्व और आधुनिक कृषि तकनीक पहुंचाने में सहायक हैं।उन्होंने इसे ‘सहकार से समृद्धि’ की सोच से जोड़ते हुए कहा कि किसानों की अपनी सहकारी संस्था के माध्यम से कृषि संबंधी सुविधाएं उन तक पहुंच रही हैं।उत्तर प्रदेश में रबी सीजन की तैयारियों के बीच कृभको की ओर से गेहूं बीज, उर्वरक, जैव उर्वरक और कृषि प्रशिक्षण को लेकर किए जा रहे प्रयास किसानों के लिए अहम हैं। अब इन पहलों का असर खेतों में उत्पादन, खेती की लागत और किसानों की आय पर किस तरह दिखाई देता है, यह आने वाले कृषि सीजन में सामने आएगा।
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