भगतपुर के जंगलों में जल रहा ई-कचरा, ग्रामीणों पर संकट

Editorial
6 Min Read
रिपोर्ट :मो अरशद
मुरादाबाद/भगतपुर  पीतलनगरी मुरादाबाद और उसके ग्रामीण इलाके एक बार फिर पर्यावरण और स्वास्थ्य के सबसे बड़े संकट की ओर बढ़ रहे हैं। जिले के थाना भगतपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चक-कचनाल बिसोली के जंगलों से एक बेहद डरावनी और संवेदनशील खबर सामने आ रही है। चंद रुपयों के मुनाफे के लिए इंसानी जिंदगियों का सौदा करने वाले ई-कचरा  माफिया रात के अंधेरे में इस संरक्षित जंगली इलाके में सक्रिय हो चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां गुपचुप तरीके से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक कचरा जलाया जा रहा है, जिससे निकलने वाला भारी और जहरीला धुआं आसपास के दर्जनों गांवों की आबोहवा में धीमा जहर घोल रहा है। इस अवैध धंधे से ग्रामीणों की सांसों पर पर संकट मंडराने लगा है, लेकिन संबंधित विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है।
 भगतपुर के जंगलों में जल रहा ई-कचरा
भगतपुर के जंगलों में जल रहा ई-कचरा
रात का अंधेरा और मौत का धुआँ: बिसोली के जंगलों का खौफनाक सच
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, चक-कचनाल बिसोली के घने जंगलों में दिन के समय पूरी शांति रहती है, लेकिन सूरज ढलते ही यहां संदिग्ध ई-कचरा माफियाओं की गाड़ियां दाखिल होने लगती हैं। रात के सन्नाटे में गुपचुप तरीके से भारी मात्रा में कंप्यूटर, मोबाइल पार्ट्स, बैटरियां, तार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों के मलबे को कबाड़ से निकालकर यहां लाया जाता है और उनमें आग लगा दी जाती है।ई-कचरा जलने से निकलने वाला धुआं कोई सामान्य धुआं नहीं होता। विज्ञान और डॉक्टरों के मुताबिक, जब प्लास्टिक कोटेड कॉपर वायर और सर्किट बोर्ड्स को खुले में जलाया जाता है, तो उसमें से लेड (सीसा), कैडमियम, पारा (मरकरी), और डाइऑक्सिन जैसी अत्यंत घातक और कैंसरकारी गैसें निकलती हैं। बिसोली के जंगल से उठने वाला यह जहरीला कोहरा रात के समय हवा के भारी होने के कारण आसपास के रिहायशी इलाकों और खेतों के ऊपर तैरने लगता है। सुबह होते-होते ग्रामीणों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में तेज जलन, गले में खराश और सीने में जकड़न जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
मुनाफे की अंधी दौड़: चंद रुपयों के लिए दांव पर लाखों जिंदगियां
मुरादाबाद को दुनिया भर में पीतल और धातु हस्तशिल्प के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके पीछे ई-कचरे से अवैध रूप से कीमती धातुएं (जैसे तांबा, चांदी और सोना) निकालने का एक बहुत बड़ा काला कारोबार भी समानांतर रूप से चलता रहा है। एनजीटी (NGT) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तमाम पाबंदियों के बावजूद, इन शातिर माफियाओं ने अब शहर की बजाय भगतपुर जैसे ग्रामीण और जंगली इलाकों को अपना नया सेफ हेवन (सुरक्षित ठिकाना) बना लिया है।आरोप है कि यह माफिया बेहद संगठित तरीके से काम करते हैं। बिसोली के जंगल का रास्ता कटा हुआ और वीरान होने के कारण यहां बाहरी लोगों की आवाजाही कम होती है, जिसका फायदा उठाकर ये लोग अपने निजी स्वार्थ और तगड़े मुनाफे के लिए पूरे पर्यावरण और आम जनता के स्वास्थ्य को दांव पर लगा रहे हैं। ई-कचरा जलाने के बाद बचने वाली जहरीली राख को भी वहीं जमीन में दबा दिया जाता है, जिससे आने वाले समय में भूजल के भी पूरी तरह दूषित होने का खतरा पैदा हो गया है। अगर यह जहरीले तत्व जमीन के पानी में मिल गए, तो आने वाली पीढ़ियां अपंगता और असाध्य बीमारियों का शिकार हो सकती हैं।
आक्रोशित ग्रामीणों ने की प्रशासनिक जांच और सख्त एक्शन की मांग
इस भयानक स्थिति को देखते हुए चक-कचनाल बिसोली और आसपास के प्रभावित ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से स्थानीय प्रशासन, वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) से इस मामले में तत्काल और कड़ा हस्तक्षेप करने की मांग की है।

मुख्य क्षेत्र समस्या ग्रामीणों की मांग
भगतपुर (चक-कचनाल बिसोली) रात में अवैध ई-कचरा जलाना तत्काल वन क्षेत्र में नाइट पेट्रोलिंग शुरू हो
स्वास्थ्य प्रभाव सांस की बीमारी, आंखों में जलन प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं
प्रदूषण स्तर हवा और मिट्टी का जहरीला होना दोषियों को चिह्नित कर गैंगस्टर एक्ट में जेल भेजा जाए

ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर वन विभाग और भगतपुर पुलिस ने रात के समय जंगल में कॉम्बिंग और संदिग्ध गतिविधियों की जांच नहीं की, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या मुरादाबाद का जिला प्रशासन और प्रदूषण विभाग इस गंभीर रिपोर्ट का संज्ञान लेकर बिसोली के जंगलों में चल रहे मौत के इस काले कारोबार को रोक पाएगा? या फिर ग्रामीणों को यूं ही इस जहरीले धुएं के साये में घुट-घुट कर जीने के लिए छोड़ दिया जाएगा? फिलहाल, पूरे इलाके को प्रशासनिक जांच और दोषियों के खिलाफ होने वाली सख्त कानूनी कार्रवाई का इंतजार है।
Share This Article
Leave a Comment