रिपोर्ट :अंकित सिन्हा
कानपुर उत्तर प्रदेश के कानपुर में आलियापुर टोल प्लाजा के पास कथित अवैध वसूली को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और जवानों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि रुपये देने से इनकार करने पर किन्नरों के एक समूह ने कार सवार युवक के साथ मारपीट की। सूचना पर मदद के लिए पहुंची डायल 112 की पीआरवी टीम के पुलिसकर्मी भी कथित तौर पर हमले और अभद्रता का शिकार हो गए। आरोप है कि इस दौरान एक सिपाही की वर्दी तक फाड़ दी गई। घटना के बाद पीआरवी में तैनात सिपाही सोनू यादव ने डायल 112 के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए अधिकारियों से मदद नहीं मिलने पर सवाल उठाए।यह पूरा मामला कानपुर के सजेती थाना क्षेत्र का है। घटना 26 अक्टूबर की रात की बताई जा रही है। पुलिसकर्मी की शिकायत सामने आने के बाद मामला केवल टोल प्लाजा पर हुए विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह सवाल भी उठ रहा है कि आपात स्थिति में डायल 112 की टीम को स्थानीय थाने और वरिष्ठ अधिकारियों से समय पर सहायता क्यों नहीं मिली। डीसीपी साउथ ने मामले की जांच कराने की बात कही है।

रुपये देने से इनकार किया तो कार सवार से विवाद
भदोही जिले के बंजारी गांव निवासी अंकित सिंह 26 अक्टूबर की रात अपनी कार से हमीरपुर के कुदौरा से घाटमपुर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान सजेती थाना क्षेत्र में आलियापुर टोल प्लाजा के पास कुछ किन्नरों ने उनकी कार रोक ली। आरोप है कि समूह के लोगों ने उनसे रुपये मांगे।अंकित सिंह का कहना है कि उन्होंने रुपये देने से इनकार किया तो उनके साथ गालीगलौज और अभद्रता शुरू कर दी गई। विरोध करने पर आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें कार से बाहर खींचकर पीटा। इस दौरान उनकी गाड़ी में भी तोड़फोड़ किए जाने का आरोप है। बताया गया कि घटना के समय अंकित अपने परिवार के साथ कार में मौजूद थे। अचानक हुए विवाद और मारपीट से घबराकर उन्होंने डायल 112 पर फोन कर पुलिस से मदद मांगी।
बचाव के लिए पहुंची पीआरवी टीम से भी भिड़ंत
सूचना मिलने के बाद डायल 112 की पीआरवी टीम मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने कार सवार युवक की मदद करने और विवाद शांत कराने का प्रयास किया। लेकिन आरोप है कि वहां मौजूद समूह ने पुलिस टीम के साथ भी अभद्रता शुरू कर दी। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट किए जाने का आरोप सामने आया।पीआरवी में तैनात सिपाही सोनू यादव की वर्दी फाड़ने का भी आरोप है। पुलिसकर्मियों के मुताबिक, समूह के कुछ लोगों ने अपने अन्य साथियों को फोन कर मौके पर बुला लिया, जिसके बाद वहां हंगामा और बढ़ गया। आरोप यह भी है कि कुछ लोग पीआरवी वाहन पर चढ़ने का प्रयास कर रहे थे। वहीं, घटना का वीडियो बनाने की कोशिश करने पर मोबाइल छीनने का प्रयास किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।इस पूरे घटनाक्रम ने डायल 112 की टीम के सामने मुश्किल स्थिति पैदा कर दी। जिस पुलिस टीम को एक पीड़ित परिवार की मदद के लिए भेजा गया था, उसी टीम को कथित तौर पर अतिरिक्त सहायता की जरूरत पड़ गई।
रात 9:42 बजे मिला था इवेंट, फिर भी बैकअप नहीं पहुंचने का आरोप
इस मामले में सबसे गंभीर सवाल अतिरिक्त पुलिस बल की उपलब्धता को लेकर उठ रहा है। सिपाही सोनू यादव के अनुसार, 26 अक्टूबर की रात 9 बजकर 42 मिनट पर इवेंट संख्या 29317 के तहत सूचना मिली थी। इसके बाद पीआरवी टीम घटनास्थल पर पहुंची।सोनू यादव का कहना है कि मौके की स्थिति को देखते हुए उन्होंने सजेती थाना प्रभारी और हल्का इंचार्ज को जानकारी दी थी। उनके निर्देश पर पीड़ित की ओर से प्रार्थना पत्र भी दिलवाया गया। इसके बावजूद उनका आरोप है कि मौके पर स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल नहीं पहुंचा।उन्होंने पीआरवी प्रभारी को भी व्हाट्सएप के माध्यम से पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी, लेकिन वहां से भी उन्हें अपेक्षित जवाब नहीं मिला। उनका आरोप है कि काफी समय तक मदद का इंतजार करने के बावजूद कोई प्रभावी सहायता नहीं मिली। ऐसे में पीआरवी टीम को कथित तौर पर सीमित संसाधनों के बीच ही स्थिति संभालनी पड़ी। इस मामले में पुलिस अधिकारियों की ओर से अब तक सामने आए बयान के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि बैकअप भेजने में देरी किन परिस्थितियों में हुई। इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
व्हाट्सएप ग्रुप में सिपाही ने उठाए सवाल
स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए सिपाही सोनू यादव ने 27 और 28 अक्टूबर को डायल 112 के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में अपनी बात रखी। उन्होंने अपनी शिकायत में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और अधिकारियों से मिलने वाले सहयोग को लेकर चिंता जाहिर की।सोनू यादव ने कहा कि पुलिसकर्मी दिन-रात अनजान लोगों की सहायता के लिए मौके पर पहुंचते हैं। ड्यूटी के दौरान उन्हें कई तरह की मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें यह भरोसा होना चाहिए कि संकट के समय उनका थाना और वरिष्ठ अधिकारी उनके साथ खड़े होंगे।उनकी शिकायत का मुख्य सवाल यही था कि यदि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ ही अभद्रता और मारपीट हो और सूचना देने के बाद भी उन्हें सहायता न मिले, तो वे किस भरोसे के साथ अपनी अगली ड्यूटी करेंगे?सिपाही की यह शिकायत सामने आने के बाद पुलिस विभाग के भीतर समन्वय, पीआरवी टीमों की सुरक्षा और स्थानीय थानों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
बिकरू कांड की याद, पुलिस सुरक्षा पर फिर बहस
कानपुर में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और समय पर मदद मिलने का सवाल उठने के बाद बिकरू कांड का जिक्र भी होने लगा है। 2-3 जुलाई 2020 की रात चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में कुख्यात अपराधी विकास दुबे के खिलाफ दबिश देने पहुंची पुलिस टीम पर हमला हुआ था। उस घटना में तत्कालीन सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।बिकरू कांड के बाद पुलिस व्यवस्था, खुफिया सूचनाओं और अधिकारियों के बीच समन्वय को लेकर कई सवाल उठे थे। आलियापुर टोल प्लाजा की घटना की परिस्थितियां उससे अलग हैं और दोनों मामलों की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जा सकती। फिर भी मौजूदा प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि किसी पुलिस टीम के मुश्किल में फंसने पर तत्काल सहायता पहुंचाने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
डीसीपी साउथ ने जांच के दिए निर्देश
मामले पर डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने कहा कि फिलहाल किसी पीड़ित सिपाही की ओर से उन्हें सीधे शिकायत नहीं मिली है। इसके बावजूद वह अपने स्तर से पूरे प्रकरण की जांच कराएंगे। उन्होंने कहा कि यदि जांच में सिपाही के साथ गलत व्यवहार किए जाने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मामला गंभीर पाए जाने पर किसी अधिकारी से जांच कराई जा सकती है।अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि टोल प्लाजा पर वास्तव में क्या हुआ था, कार सवार युवक के साथ मारपीट और वाहन में तोड़फोड़ के आरोपों में कितनी सच्चाई है तथा पीआरवी टीम के साथ कथित अभद्रता और मारपीट की घटना किन परिस्थितियों में हुई। इसके साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि सूचना मिलने के बाद स्थानीय थाने और वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से क्या कदम उठाए गए और अतिरिक्त पुलिस बल पहुंचने में देरी हुई या नहीं।
जांच के बाद तय होगी जवाबदेही
आलियापुर टोल प्लाजा पर कथित अवैध वसूली के विरोध से शुरू हुआ विवाद अब पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और विभागीय जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया है। एक ओर कार सवार युवक के साथ कथित मारपीट की शिकायत है, तो दूसरी ओर मदद के लिए पहुंचे पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता और मारपीट के आरोप हैं। इसके अलावा सिपाही की ओर से समय पर बैकअप नहीं मिलने की शिकायत ने मामले को और गंभीर बना दिया है।अब निगाहें पुलिस जांच पर हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ यह भी तय करना होगा कि आपात स्थिति में पीआरवी टीमों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था में कहां कमी रही। क्योंकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और उनका मनोबल भी उतना ही जरूरी है जितना आम नागरिकों की सुरक्षा। पुलिस अधिकारियों ने जांच का भरोसा दिया है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और इस पूरे मामले में किसकी जिम्मेदारी तय होती है।
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