सहारनपुर: सरसावा में परिवार के 5 लोगों की मौत, कई सवाल

Digital Desk
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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद के सरसावा कस्बे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक घटना के बाद मृतक अशोक कुमार के पैतृक गांव खारीबांस में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ है। जैसे ही घटना की जानकारी गांव में पहुंची, परिजन और ग्रामीण स्तब्ध रह गए। अधिकांश लोग तुरंत सरसावा के लिए रवाना हो गए, जिसके चलते दोपहर करीब 12 बजे तक गांव की गलियां पूरी तरह सूनी नजर आईं।

यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। मां, पत्नी और दो बेटों की गोली मारकर हत्या और फिर खुद आत्महत्या किए जाने की इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

पांच मौतों का मामला: क्या है पूरा घटनाक्रम

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अशोक कुमार ने पहले अपनी मां, पत्नी अंजिता और दो मासूम बेटों को गोली मार दी, इसके बाद खुद भी आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि अशोक लंबे समय से मानसिक तनाव में था और उसका इलाज भी चल रहा था। हालांकि, घटना के बाद जिस तरह के तथ्य सामने आ रहे हैं, उन्होंने मामले को और भी रहस्यमय बना दिया है।

पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहन जांच की जा रही है। जांच अधिकारी हर पहलू से घटना को जोड़कर देखने का प्रयास कर रहे हैं।

खारीबांस गांव में मातम और सन्नाटा

घटना के बाद से खारीबांस गांव में मातमी माहौल है। घरों के दरवाजे बंद हैं और गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने ऐसा भयावह हादसा पहले कभी नहीं देखा। अशोक कुमार को वे एक पढ़ा-लिखा और शांत स्वभाव का व्यक्ति मानते थे, इसलिए इस घटना ने सभी को हैरान कर दिया है।

ग्रामीणों और रिश्तेदारों में गहरा दुख और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहा है। लोग लगातार यही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ, जिससे एक व्यक्ति ने अपने ही पूरे परिवार को खत्म कर लिया।

शवों की हालत देखकर गहराया शक

मृतका अंजिता के भाई ने जताई आशंका

पोस्टमार्टम के लिए शव भेजे जाने के बाद मृतका अंजिता के भाई राहुल, जो हरियाणा के गांव नंदगढ़ के निवासी हैं, खारीबांस पहुंचे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि शवों की हालत देखकर उन्हें गंभीर संदेह हो रहा है। राहुल का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि गोली मारने से पहले परिवार के सदस्यों को नींद या नशीली गोलियां दी गई हों।

उनके अनुसार, अगर ऐसा हुआ है तो यह मामला केवल आत्महत्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी परतें और गहरी होंगी। राहुल ने निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है।

पहले भी दी जा चुकी थीं नींद की गोलियां

राहुल ने एक और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि करीब एक वर्ष पहले भी अशोक कुमार ने परिवार के लोगों को नींद की गोलियां दे दी थीं। उस समय किसी तरह मामला सामने आ गया और सभी की जान बच गई थी। उस घटना के बाद परिवार में तनाव और बढ़ गया था, लेकिन किसी को अंदेशा नहीं था कि मामला इतना भयावह मोड़ ले लेगा।

यह जानकारी सामने आने के बाद पुलिस भी पुराने रिकॉर्ड और घटनाक्रम को खंगालने में जुट गई है।

मानसिक तनाव में था अशोक कुमार

पड़ोसी जितेंद्र राठौर ने बताया कि अशोक पिछले डेढ़ से दो वर्षों से मानसिक रूप से परेशान दिखाई दे रहा था। वह अक्सर चुप-चाप रहता था और लोगों से कम बातचीत करता था। जितेंद्र के अनुसार, अशोक का इलाज चंडीगढ़ में चल रहा था और वह समय-समय पर वहां जाता भी था।

हालांकि, गांव वालों का कहना है कि अशोक ने कभी खुलकर अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं की। मानसिक तनाव की वजहें क्या थीं, यह अब जांच का विषय है।

पिता की मौत भी रही संदिग्ध

ग्रामीणों के अनुसार, करीब साढ़े तीन वर्ष पहले अशोक कुमार के पिता सुरेंद्र सिंह की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उस समय भी गांव में कई तरह की चर्चाएं हुई थीं, लेकिन मामला ज्यादा आगे नहीं बढ़ सका। पिता की मौत के बाद अशोक को मृतक आश्रित कोटे में संग्रह अमीन की नौकरी मिली थी।

अब एक बार फिर परिवार में हुई इस बड़ी घटना के बाद लोग उस पुराने मामले को भी जोड़कर देख रहे हैं।

पुलिस जांच और प्रशासन की भूमिका

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और हर पहलू से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या वास्तव में परिवार के सदस्यों को पहले बेहोश किया गया था।

प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है और गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।

स्थानीय लोगों में डर और सवाल

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। लोग अपने परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों को समय रहते गंभीरता से क्यों नहीं लिया जाता।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर पहले की घटनाओं पर ध्यान दिया गया होता और उचित काउंसलिंग या मदद मिलती, तो शायद इतना बड़ा हादसा टल सकता था।

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