
लखनऊ राजधानी लखनऊ के निशातगंज इलाके से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। मासूम बच्चों की सुरक्षा का दम भरने वाले एक नामचीन ‘बचपन डे केयर सेंटर’ की लापरवाही ने आठ साल के एक बेकसूर बच्चे की जान ले ली। बहराइच से अपनी नानी के घर गर्मियों की छुट्टियां बिताने आया मासूम शिवा कश्यप क्या जानता था कि लखनऊ में उसकी जिंदगी का सफर इस तरह हमेशा के लिए थम जाएगा। डे केयर सेंटर का भारी-भरकम मुख्य गेट अचानक गिरने से बच्चा उसके नीचे दब गया और मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। इस खौफनाक हादसे के बाद मृतक बच्चे की मां और परिजन इंसाफ की मांग को लेकर उसी खून से सने गेट के सामने चादर बिछाकर लाश के साथ धरने पर बैठ गए हैं, जिससे पूरे इलाके में भारी तनाव और आक्रोश का माहौल पैदा हो गया है।

दिल को चीर देने वाली यह घटना शनिवार सुबह करीब 9 बजे की है। बहराइच का रहने वाला आठ वर्षीय शिवा कश्यप इन दिनों लखनऊ के निशातगंज में अपनी नानी मीना देवी के घर आया हुआ था। हर बच्चे की तरह वह भी सुबह के वक्त बेफिक्र होकर घर के पास स्थित बचपन डे केयर सेंटर के मुख्य गेट के आसपास खेल रहा था। इसी दौरान अचानक एक जोरदार आवाज हुई और डे केयर सेंटर का विशालकाय लोहे का गेट भरभराकर सीधे मासूम शिवा के ऊपर गिर गया। गेट इतना भारी था कि शिवा को संभलने तक का मौका नहीं मिला और वह उसके नीचे पूरी तरह दब गया। बच्चे की चीख सुनकर आसपास के लोग और उसके मामा राहुल तुरंत मौके की तरफ दौड़े। बदहवास लोगों ने भारी मशक्कत के बाद जब तक उस भारी गेट को हटाकर शिवा को बाहर निकाला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मासूम का शरीर पूरी तरह लहूलुहान हो चुका था और उसकी सांसें उखड़ रही थीं।परिजन आनन-फानन में मासूम शिवा को लेकर सिविल अस्पताल भागे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस खबर के मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अपनी आंखों के तारे को खो चुकी मां ललिता देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। ममता की चीख और मां का करुण क्रंदन सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। अस्पताल से बच्चे का शव वापस आने के बाद परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने सीधे तौर पर डे केयर सेंटर के अधिकारियों और प्रबंधन पर जानलेवा लापरवाही का आरोप लगाया। न्याय न मिलता देख बेहद भावुक और आक्रोशित परिजन मासूम शिवा के शव को उसी बचपन डे केयर सेंटर के गेट पर ले आए और वहां सफेद चादर बिछाकर लाश के साथ धरने पर बैठ गए। मां अपने कलेजे के टुकड़े की लाश को गोद में समेटे सिस्टम और लापरवाही के खिलाफ चीख-चीखकर न्याय की गुहार लगा रही है।
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे के पीछे भ्रष्टाचार और लीपापोती की एक बेहद चौंकाने वाली इनसाइड स्टोरी भी सामने आ रही है। सूत्रों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस डे केयर सेंटर की इमारत में अभी हाल ही में रंग-रोगन और मरम्मत का काम हुआ था। कागजों पर और बजट पास कराने के खेल में यहां एक मजबूत नया गेट लगाया जाना तय हुआ था। लेकिन अंदरूनी खेल खेलते हुए भ्रष्टाचार की इंतिहा कर दी गई। पुराने, सड़ चुके और जर्जर हो चुके लोहे के गेट पर ही नया पेंट चढ़ाकर उसे चमका दिया गया और नए गेट का पूरा बजट डकार लिया गया। अगर इस भ्रष्टाचार की जगह वहां सच में एक नया और मजबूत गेट लगाया गया होता, तो आज वह मासूम बच्चा जिंदा होता और अपनी मां की गोद सूनी नहीं होती। केवल कुछ रुपयों के लालच में इस डे केयर सेंटर ने एक मासूम की जिंदगी का सौदा कर दिया।
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए महानगर पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंची। जब पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को संभालने और कानूनी कार्रवाई के लिए बच्चे के शव को अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया, तो माहौल और ज्यादा गरमा गया। नाराज और आक्रोशित परिजनों ने पुलिस का कड़ा विरोध किया और शव को ले जाने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है कि जब तक इस जघन्य लापरवाही के जिम्मेदार बचपन डे केयर सेंटर के मालिक और अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई नहीं होती और उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक वे गेट से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे। दूसरी तरफ, हमेशा बच्चों की सुरक्षा की दुहाई देने वाली बचपन डे केयर संस्था के सभी जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी इस खूनी हादसे के बाद से पूरी तरह भूमिगत हो गए हैं और मीडिया तथा पुलिस से बात करने से साफ बच रहे हैं। फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है, पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो चुका है और हवा में गम के साथ-साथ एक गहरा आक्रोश तैर रहा है।
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