लखनऊ उत्तर प्रदेश में रेलवे सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान रेलवे ट्रैक और ट्रेनों को करीब 550 बार निशाना बनाया गया। कहीं वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों पर पत्थरबाजी हुई, तो कहीं रेलवे ट्रैक पर खतरनाक वस्तुएं रखकर बड़े हादसों की साजिश रची गई। इन लगातार घटनाओं ने रेलवे और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) की विस्तृत जांच और मैपिंग में पूरे प्रदेश में 250 ऐसे संवेदनशील हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां बार-बार रेलवे ट्रैक और ट्रेनों को निशाना बनाया गया। अब इन इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदल दी गई है। जमीन पर पुलिस की गश्त के साथ-साथ आसमान से ड्रोन निगरानी, सोलर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, डिजिटल ट्रैकिंग और हजारों रेल मित्रों का नेटवर्क सक्रिय कर दिया गया है।
वंदे भारत और VIP ट्रेनों तक पर हुए हमले
जांच में सामने आया कि अराजक तत्वों ने केवल सामान्य ट्रेनों को ही नहीं, बल्कि देश की प्रतिष्ठित वंदे भारत एक्सप्रेस और कई VIP मूवमेंट वाली ट्रेनों को भी निशाना बनाया। कई मामलों में चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंके गए, जिससे यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई। वहीं कुछ स्थानों पर रेलवे ट्रैक पर लोहे के टुकड़े, पत्थर और अन्य खतरनाक सामान रखकर ट्रेन दुर्घटना कराने की कोशिश की गई।सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि समय रहते कई घटनाओं का पता चल जाने से बड़े हादसे टल गए। यदि इन साजिशों का समय पर खुलासा न होता, तो भारी जनहानि हो सकती थी।

250 हॉटस्पॉट पर 24 घंटे निगरानी
GRP ने जिन 250 स्थानों को सबसे संवेदनशील माना है, वहां अब चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। ड्रोन कैमरे लगातार गश्त कर रहे हैं, जबकि सोलर पावर से चलने वाले हाई-टेक कैमरे रेलवे ट्रैक की हर गतिविधि रिकॉर्ड कर रहे हैं।इसके अलावा रेलवे पुलिस ने स्थानीय लोगों को भी सुरक्षा अभियान से जोड़ते हुए 3,000 से अधिक ‘रेल मित्र’ तैयार किए हैं। ये रेल मित्र व्हाट्सऐप समूहों और अन्य डिजिटल माध्यमों से संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल सूचना पुलिस तक पहुंचाते हैं, जिससे किसी भी संभावित खतरे पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
पश्चिमी यूपी सबसे ज्यादा संवेदनशील
GRP की रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक हॉटस्पॉट पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पाए गए हैं।
- मुरादाबाद अनुभाग – 70 हॉटस्पॉट
- प्रयागराज – 69
- आगरा – 56
- गोरखपुर – 23
- लखनऊ – 20
- झांसी – 12
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दिल्ली से बिहार जाने वाला प्रमुख रेलवे कॉरिडोर सबसे अधिक संवेदनशील बना हुआ है। बिहार की सीमा से जुड़े कई जिलों में भी ऐसी घटनाएं लगातार सामने आई हैं।

किन इलाकों से मिल रहे हैं सबसे ज्यादा इनपुट?
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अधिकांश घटनाएं रेलवे ट्रैक के किनारे बनी अवैध बस्तियों के आसपास होती हैं। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले संदिग्ध लोगों की पहचान की जा रही है।GRP और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) संयुक्त अभियान चलाकर इन इलाकों की निगरानी कर रहे हैं। इसके साथ ही कबाड़ का कारोबार करने वाले लोगों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। पुलिस को आशंका है कि ट्रैक को नुकसान पहुंचाने वाली कई वस्तुएं कबाड़ बाजार के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं।
डिजिटल निगरानी से अपराधियों की पहचान
रेलवे सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। संदिग्ध व्यक्तियों का ‘त्रिनेत्र’ ऐप के जरिए डिजिटल सत्यापन किया जा रहा है। पुलिस का मुखबिर तंत्र भी पहले से अधिक सक्रिय किया गया है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत मिल सके।रेलवे अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को ट्रैक के पास खुले में न छोड़ा जाए, क्योंकि कई बार इन्हीं वस्तुओं का इस्तेमाल ट्रैक को नुकसान पहुंचाने या ट्रेनों पर हमला करने के लिए किया जाता है।
दोषियों पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई
रेलवे ट्रैक और ट्रेनों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ रेलवे एक्ट की धारा 152 के तहत कार्रवाई की जा रही है। इस धारा में न्यूनतम 10 वर्ष के कठोर कारावास से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।GRP अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि दोषियों को जल्द सजा दिलाना भी प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जा रही है ताकि अपराधियों को शीघ्र दंड मिल सके।
यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
डीजी GRP प्रकाश डी. ने कहा कि रेलवे ट्रैक और ट्रेनों को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। पुलिस आधुनिक तकनीक, ड्रोन निगरानी, डिजिटल सत्यापन, रेल मित्रों के नेटवर्क और फास्ट ट्रैक कोर्ट की मदद से ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में लगातार काम कर रही है।उन्होंने भरोसा दिलाया कि रेलवे नेटवर्क को सुरक्षित बनाने और यात्रियों की जान-माल की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का लक्ष्य केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि उन्हें पहले ही रोक देना है, ताकि उत्तर प्रदेश का विशाल रेलवे नेटवर्क पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद बना रहे।
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