
लखनऊ उत्तर प्रदेश में एक तरफ शिक्षामित्र अपनी लंबित मांगों और समस्याओं को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक पर भी सभी की नजरें टिकी हैं। प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियों के लिहाज से यह सप्ताह काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की प्रांतीय बैठक सोमवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित की जाएगी। सुबह 10 बजे से शुरू होने वाली इस बैठक में प्रदेश भर के प्रांतीय पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, मंडल महामंत्री, जिला अध्यक्ष और जिला महामंत्री शामिल होंगे। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार बैठक में शिक्षामित्रों की विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और सरकार के समक्ष उन्हें मजबूती से उठाने की रणनीति तैयार की जाएगी। बैठक में विशेष रूप से जून माह के मानदेय भुगतान में संभावित संकट, शिक्षामित्रों की मूल विद्यालयों में वापसी की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कराने और अन्य लंबित मांगों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा संगठन मानदेय में हाल ही में की गई वृद्धि के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार भी व्यक्त करेगा। माना जा रहा है कि बैठक के बाद संगठन अपनी आगामी आंदोलनात्मक और संवादात्मक रणनीति का भी ऐलान कर सकता है।

उधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 3 जून को होने वाली कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की संभावना है। शासन स्तर पर बैठक की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार उद्योग, निवेश, आधारभूत संरचना, कृषि, राजस्व और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े एक दर्जन से अधिक प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखे जा सकते हैं।राज्य सरकार निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए नई परियोजनाओं को मंजूरी दे सकती है। इसके अलावा कुछ विभागों से जुड़े प्रशासनिक और वित्तीय प्रस्तावों पर भी कैबिनेट की मुहर लगने की उम्मीद है। बैठक के फैसलों का असर प्रदेश के विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर देखने को मिल सकता है। इसी बीच प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया को लेकर भी बड़ी प्रगति हुई है। चकबंदी आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने 12 जिलों के 14 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण होने का आदेश जारी कर दिया है। यह स्वीकृति उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा 52(1) के तहत दी गई है।इन गांवों में कन्नौज, बिजनौर, सहारनपुर, प्रयागराज, प्रतापगढ़, सीतापुर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, बरेली, गोरखपुर, सुल्तानपुर और मुरादाबाद जिलों के गांव शामिल हैं। इनमें कई गांव ऐसे हैं जहां चकबंदी प्रक्रिया दशकों से लंबित थी। कन्नौज का अकबरपुर गांव पिछले 45 वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया में था, जबकि बिजनौर का झालू कस्बा और सहारनपुर का डालामजरा गांव 37 वर्षों से इस प्रक्रिया का इंतजार कर रहे थे। प्रयागराज का राजेपुर मय सराय अरजानी गांव भी 34 वर्षों से लंबित मामलों में शामिल था।चकबंदी आयुक्त ने बताया कि लंबित मामलों के निस्तारण के लिए जिलास्तरीय अधिकारियों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए थे। विभिन्न जिलों में चौपाल लगाकर किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किया गया, जिसके बाद इन गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी हो सकी। सरकार का लक्ष्य अब शेष लंबित गांवों में भी तेजी से चकबंदी कार्य पूरा कर भूमि विवादों को कम करना और किसानों को राहत पहुंचाना है।
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