निराश्रित गोवंश संरक्षण को नई रफ्तार: उत्कृष्ट केयरटेकर हुए सम्मानित, CDO ने गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने का दिया बड़ा मंत्र

Editorial
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रिपोर्ट :अमित त्रिवेदी

हरदोई उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी निराश्रित गोवंश संरक्षण योजना को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। विकास भवन सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) नेहा ब्याडवाल ने स्पष्ट संदेश दिया कि अब गौशालाओं का संचालन केवल गोवंशों के संरक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस कर आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। बैठक में उत्कृष्ट कार्य करने वाले केयरटेकरों को सम्मानित किया गया, वहीं अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए गए।बैठक में निराश्रित गोवंश संरक्षण योजना के अंतर्गत संचालित मॉडल गौशालाओं, नंदी गौशालाओं, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था, हरा चारा उत्पादन तथा 100 से कम गोवंश वाले आश्रय स्थलों की विस्तृत समीक्षा की गई। सभी विकास खंडों की प्रगति रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए सीडीओ ने कहा कि गौवंश संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्व भी है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा।

उत्कृष्ट कार्य करने वाले केयरटेकरों का सम्मान

बैठक का सबसे प्रेरणादायक क्षण तब आया जब गौशालाओं में समर्पण और निष्ठा के साथ कार्य करने वाले श्रीमती शांति, श्री नीरज, श्री विश्राम और श्री लाखन को मुख्य विकास अधिकारी ने अंगवस्त्र और छाता भेंट कर सम्मानित किया। सीडीओ ने कहा कि इन कर्मियों ने सीमित संसाधनों में भी गोवंशों की बेहतर देखभाल, स्वच्छता, चारा प्रबंधन और आश्रय स्थलों के संचालन में सराहनीय योगदान दिया है।उन्होंने कहा कि ऐसे कर्मचारियों का सम्मान पूरे जिले के लिए प्रेरणा है। इससे अन्य केयरटेकर भी अधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित होंगे।

मॉडल गौशालाओं को मिलेगा आधुनिक स्वरूप

बैठक में सीडीओ ने निर्देश दिए कि प्रत्येक विकास खंड की चयनित मॉडल गौशालाओं में सभी मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर विकसित की जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गौशाला में मजबूत भूसा घर, केयरटेकर कक्ष, स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त छायादार स्थान और सुरक्षित बाड़बंदी सुनिश्चित की जाए, ताकि गोवंशों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गौशालाओं की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

नर, मादा और बीमार गोवंशों का होगा अलग प्रबंधन

बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि गौशालाओं में नर, मादा, बछड़ों और बीमार गोवंशों का पृथक्करण अनिवार्य रूप से किया जाए। सीडीओ ने कहा कि अलग-अलग श्रेणियों में गोवंश रखने से उनकी देखभाल अधिक व्यवस्थित होगी और संक्रमण जैसी समस्याओं पर भी नियंत्रण रहेगा।उन्होंने पशु चिकित्सा विभाग को निर्देश दिया कि सभी आश्रय स्थलों पर नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए और बीमार पशुओं का तत्काल उपचार सुनिश्चित किया जाए।

गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की नई रणनीति

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय गौशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने को लेकर लिया गया। सीडीओ ने निर्देश दिए कि स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को गौशालाओं से जोड़ा जाए और गोबर से गो-काष्ठ, दीपक, जैविक खाद तथा अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएं।उन्होंने कहा कि इससे एक ओर महिलाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर गौशालाओं की आय भी बढ़ेगी। इससे सरकारी सहायता पर निर्भरता कम होगी और गौशालाएं लंबे समय तक बेहतर ढंग से संचालित की जा सकेंगी।

नंदी गौशालाओं में होगी शीघ्र शिफ्टिंग

बैठक में नंदी गौशालाओं की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। सीडीओ ने निर्देश दिए कि नर गोवंशों की नंदी गौशालाओं में शीघ्र शिफ्टिंग सुनिश्चित की जाए ताकि सामान्य गौशालाओं में भीड़ कम हो और सभी पशुओं की बेहतर देखभाल की जा सके।उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

24 घंटे चालू रहें सीसीटीवी कैमरे

गौशालाओं की सुरक्षा और निगरानी को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। सीडीओ ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी आश्रय स्थलों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे चौबीसों घंटे चालू हालत में रहें। यदि किसी स्थान पर कैमरे खराब पाए जाते हैं तो उन्हें तुरंत ठीक कराया जाए।उन्होंने कहा कि सीसीटीवी निगरानी से पारदर्शिता बढ़ेगी, सुरक्षा मजबूत होगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी।

हरे चारे के उत्पादन पर विशेष जोर

बैठक में गोवंशों के पोषण को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। सीडीओ ने निर्देश दिए कि प्रत्येक विकास खंड में उपलब्ध चारागाह भूमि का अधिकतम उपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर हरे चारे की खेती कराई जाए।उन्होंने कहा कि हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता से गोवंशों के स्वास्थ्य में सुधार होगा और गौशालाओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी कम पड़ेगा।

अधिकारियों को दिए जवाबदेही के निर्देश

मुख्य विकास अधिकारी ने बैठक में मौजूद सभी खंड विकास अधिकारियों, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों और पशुपालन विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गौशालाओं का नियमित निरीक्षण किया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित आश्रय, बेहतर भोजन और समुचित चिकित्सा उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए सभी विभागों को पूरी गंभीरता से कार्य करना होगा।

गोवंश संरक्षण को मिलेगा नया आयाम

बैठक में लिए गए निर्णयों से स्पष्ट है कि अब जिले में गौशालाओं के संचालन को नई दिशा देने की तैयारी है। आधुनिक सुविधाएं, आत्मनिर्भरता का मॉडल, तकनीकी निगरानी, हरे चारे का उत्पादन और उत्कृष्ट कर्मचारियों का सम्मान—इन सभी प्रयासों से निराश्रित गोवंश संरक्षण योजना को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।फिलहाल प्रशासन का संदेश साफ है—गौशालाएं केवल आश्रय स्थल नहीं रहेंगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, सुव्यवस्थित और आधुनिक प्रबंधन का मॉडल बनाया जाएगा। उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मान मिलेगा, लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई होगी और निराश्रित गोवंशों की सुरक्षा एवं देखभाल सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

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