फिरोजाबाद में छह माह के मासूम तनवीर की मौत ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। जिस घर में बच्चे की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है। एक तरफ मां अपने लाल को खोने के गम में बेसुध है तो दूसरी तरफ पिता की आंखों के सामने उस रात का खौफनाक मंजर बार-बार घूम रहा है। आरोप है कि दो सगी बहनों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद ने ऐसा भयावह रूप ले लिया कि उसकी कीमत एक मासूम को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। उत्तर थाना क्षेत्र के कृष्णा नगर में हुई इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने मृतक बच्चे की मां संजना की तहरीर पर उसकी बहन वंदना के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। हालांकि इस मामले की गुत्थी सुलझाना पुलिस के लिए आसान नहीं होगा। घटना आधी रात को एक बंद कमरे में हुई, जहां केवल दोनों बहनें और छह माह का मासूम तनवीर मौजूद थे। न तो कोई सीसीटीवी फुटेज है और न ही कोई स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी, ऐसे में पुलिस को परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और परिजनों के बयानों के आधार पर जांच आगे बढ़ानी पड़ रही है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि विवाद की जड़ कोई मामूली कहासुनी नहीं थी। दोनों बहनों के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था। संजना को शक था कि उसकी बहन वंदना उसके वैवाहिक जीवन को नुकसान पहुंचाना चाहती है। इसी अविश्वास और मनमुटाव ने धीरे-धीरे गहरी दुश्मनी का रूप ले लिया। बुधवार रात दोनों के बीच शुरू हुआ विवाद अचानक इतना बढ़ गया कि हालात नियंत्रण से बाहर हो गए। इसी दौरान मासूम तनवीर इसकी चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई।घटना के बाद सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे के सिर के पीछे की हड्डी टूटी हुई पाई गई है। इतनी कम उम्र के बच्चे में इस तरह की गंभीर चोट ने चिकित्सकों को भी हैरान कर दिया। मौत के कारणों की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए डॉक्टरों ने बच्चे का विसरा भी सुरक्षित कर लिया है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। पुलिस का मानना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट इस मामले में अहम भूमिका निभा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दर्दनाक पहलू बच्चे के पिता कन्हैया की कहानी है। वह उस रात मेले से लौटकर थकान के कारण मकान की छत पर सोने चला गया था। देर रात अचानक नीचे से पत्नी की चीख-पुकार सुनाई दी। शुरुआत में उसे लगा कि दोनों बहनों के बीच हमेशा की तरह झगड़ा हो रहा होगा, लेकिन जब वह भागकर नीचे पहुंचा तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसका छह माह का बेटा तनवीर बेसुध हालत में पड़ा था और घर में अफरा-तफरी मची हुई थी। कन्हैया ने बिना समय गंवाए बच्चे को अपनी गोद में उठाया और अस्पताल की ओर दौड़ पड़ा। उसके पास कोई साधन नहीं था, इसलिए वह उसी ई-रिक्शा तक पहुंचा जिसे चलाकर वह अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। आधी रात के सन्नाटे में वह अपने मासूम बेटे की जिंदगी बचाने की उम्मीद लेकर जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर पहुंचा, लेकिन वहां डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही पिता पूरी तरह टूट गया। अस्पताल के गलियारे में वह घंटों अपने बेटे के शव को सीने से लगाए बैठा रहा और फूट-फूटकर रोता रहा। वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस मामले को अदालत में साबित करने की है। जिस मकान में घटना हुई, वहां दोनों बहनों के अलावा उनके पिता दिनेश, भाई साहिल, चैनी और पीयूष भी मौजूद थे। पुलिस को उम्मीद है कि उनके बयान जांच में महत्वपूर्ण साबित होंगे। हालांकि यह भी सवाल बना हुआ है कि क्या एक बेटी के बच्चे को इंसाफ दिलाने के लिए परिवार के सदस्य दूसरी बेटी के खिलाफ अदालत में खुलकर गवाही देंगे या फिर समय के साथ अपने बयानों से पीछे हट जाएंगे।एसपी सिटी रविशंकर प्रसाद ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्चे के सिर की हड्डी टूटने की पुष्टि हुई है और विसरा सुरक्षित किया गया है। मां की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है तथा घटना से जुड़े हर पहलू की गहनता से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि सभी साक्ष्यों को जुटाकर अदालत में मजबूत चार्जशीट पेश की जाएगी।फिलहाल छह माह के मासूम तनवीर की मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। एक परिवार अपने चिराग को खो चुका है और रिश्तों में पनपी कड़वाहट ने ऐसी त्रासदी को जन्म दिया है, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी।
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