देहरादून के थानो क्षेत्र में मस्जिद सील किए जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में मुस्लिम सेवा संगठन सड़क पर उतर आया और बड़ी संख्या में समुदाय के लोगों ने जिलाधिकारी कार्यालय की ओर कूच कर अपना विरोध दर्ज कराया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया और प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। शुक्रवार को एसटीएफ कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि जिस मस्जिद को सील किया गया है, उसके सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं, इसके बावजूद प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए उसे बंद कर दिया। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि मस्जिद को सील करने से समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। दरअसल विवाद थानो क्षेत्र के ग्राम कण्डोगल-कुडियाल में स्थित जामा मस्जिद और मदरसे को लेकर है। कुछ दिन पहले पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में मस्जिद के भूतल को सील कर दिया गया था। इससे पहले मस्जिद के प्रथम तल को भी सील किया जा चुका था। प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान मस्जिद पक्ष की ओर से विरोध भी किया गया, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के बीच कार्रवाई पूरी कर ली गई। मामले ने उस समय और अधिक तूल पकड़ लिया जब कार्रवाई के बाद काली सेना, बजरंग दल और स्थानीय लोगों ने थानो चौक पर हवन कर प्रशासनिक कदम का स्वागत किया। इन संगठनों का कहना है कि वे लंबे समय से मस्जिद की वैधता को लेकर सवाल उठा रहे थे और इस संबंध में प्रशासन तथा एमडीडीए से शिकायतें कर चुके थे। उनका आरोप है कि संबंधित मस्जिद उत्तराखंड वक्फ बोर्ड और मदरसा बोर्ड में पंजीकृत नहीं थी, जिसके चलते इसकी जांच कराई गई और बाद में सीलिंग की कार्रवाई हुई।

स्थानीय संगठनों का दावा है कि पिछले कई महीनों से इस मुद्दे को लेकर धरना-प्रदर्शन किए जा रहे थे। उनका कहना है कि प्रशासन पर लगातार दबाव बनाए जाने के बाद ही कार्रवाई संभव हो सकी। वहीं काली सेना के प्रदेश प्रमुख भूपेश जोशी ने मस्जिद के पूर्ण ध्वस्तीकरण की मांग उठाकर विवाद को और गरमा दिया है। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध पाया गया है तो केवल सीलिंग पर्याप्त नहीं है, बल्कि आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए। दूसरी ओर मुस्लिम सेवा संगठन प्रशासन की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बता रहा है। संगठन का कहना है कि यदि किसी निर्माण को लेकर कोई आपत्ति थी तो पहले मस्जिद प्रबंधन को पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए था। उनका आरोप है कि बिना सभी पक्षों को संतुष्ट किए की गई कार्रवाई से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। संगठन के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

थानो क्षेत्र में इस पूरे घटनाक्रम ने माहौल को संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ मस्जिद के समर्थन में समुदाय के लोग लामबंद हो रहे हैं तो दूसरी ओर कार्रवाई के समर्थन में कई संगठन खुलकर सामने आ गए हैं। ऐसे में प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति को रोकना है। जिलाधिकारी कार्यालय की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। कई स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, जबकि वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी करते रहे। प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और किसी भी पक्ष के साथ भेदभाव नहीं किया गया है। फिलहाल थानो की यह मस्जिद केवल एक धार्मिक स्थल का मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रशासनिक कार्रवाई, धार्मिक भावनाओं और स्थानीय संगठनों की मांगों के बीच टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। एक ओर समुदाय न्याय और सुनवाई की मांग कर रहा है तो दूसरी ओर कार्रवाई के समर्थक इसे नियमों के पालन की दिशा में उठाया गया आवश्यक कदम बता रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख और जांच के निष्कर्ष इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे, लेकिन फिलहाल देहरादून का थानो क्षेत्र इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं के केंद्र में बना हुआ है।
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