
शामली में चर्चित धर्मांतरण प्रकरण अब केवल एक परिवार के विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी जांच कई राज्यों और संदिग्ध संपर्कों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। दवा कारोबारी देवराज मलिक के बेटे आयुष मलिक उर्फ रहमान के धर्मांतरण मामले में पुलिस और खुफिया एजेंसियां हर पहलू को खंगाल रही हैं। जांच के दायरे में शामली, गाजियाबाद और दिल्ली के कई मौलाना आ गए हैं, जबकि युवक के कथित पाकिस्तान और फिलिस्तीन कनेक्शन की भी पड़ताल की जा रही है। मामले में पुलिस पहले ही एक युवती और उसके पिता को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं तीन मौलानाओं समेत कुल नौ आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मामला सिर्फ एक व्यक्ति के धर्म परिवर्तन तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका होने की आशंका है। इसी कारण एसआईटी, स्थानीय पुलिस, एलआईयू और खुफिया एजेंसियों को संयुक्त रूप से जांच में लगाया गया है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आयुष मलिक पाकिस्तान के चर्चित इस्लामिक विद्वान डॉ. इसरार अहमद के भाषण नियमित रूप से सुनता था और उनके विचारों से प्रभावित था। पूछताछ के दौरान आयुष ने फिलिस्तीन का भी जिक्र किया, जिसके बाद जांच एजेंसियां उसके सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल गतिविधियों और संपर्कों की गहन पड़ताल कर रही हैं। यह भी जांच की जा रही है कि कहीं किसी प्रकार की फंडिंग या बाहरी प्रभाव तो इस पूरे घटनाक्रम के पीछे नहीं था। हालांकि अब तक किसी विदेशी कनेक्शन की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच पूरे मामले ने नया मोड़ तब ले लिया जब आयुष मलिक स्वयं मीडिया के सामने आया। उसने साफ शब्दों में कहा कि उसका धर्मांतरण किसी दबाव, लालच या साजिश का परिणाम नहीं है। उसने दावा किया कि उसने अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया है और अपने फैसले पर कायम है। आयुष का कहना है कि वह वर्ष 2008 से इस्लामिक विचारों का अध्ययन कर रहा था और धीरे-धीरे इस धर्म को अपनाने का निर्णय लिया। उसने बताया कि परिवार में किसी तरह का विवाद न हो, इसलिए अपनी बहनों की शादी होने के बाद ही उसने अपने धर्म परिवर्तन की जानकारी परिजनों को दी।

आयुष ने यह भी खुलासा किया कि चार वर्ष पहले उसने दिल्ली में शामली की रहने वाली चांदनी कुरैशी से निकाह किया था। उसने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसका किसी ने ब्रेनवॉश नहीं किया। यदि ऐसा होता तो वह अपने माता-पिता और परिवार को भूल जाता, लेकिन आज भी वह अपने परिवार का सम्मान करता है और उनसे जुड़ा हुआ है। उसने कहा कि पाकिस्तान या फिलिस्तीन से उसका कोई संबंध नहीं है और कुछ लोग इस मामले को अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। दाढ़ी रखने और धार्मिक जीवनशैली अपनाने को लेकर पूछे गए सवाल पर आयुष ने कहा कि इस्लाम में दाढ़ी रखना सुन्नत माना जाता है और सभी नबियों ने भी दाढ़ी रखी थी। उसने कहा कि उसके माता-पिता पूजा-पाठ करते हैं और वह पांच वक्त की नमाज पढ़ता है, लेकिन इससे परिवार के रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ा है। उसके अनुसार दोनों परिवार उसके अपने हैं और वह किसी को छोड़ना नहीं चाहता।

वहीं दूसरी ओर आयुष के पिता और प्रसिद्ध दवा कारोबारी देवराज मलिक अपने बेटे के धर्मांतरण को सुनियोजित साजिश बता रहे हैं। उनका आरोप है कि संपत्ति पर नजर रखने वाले लोगों ने उनके बेटे का बड़े स्तर पर ब्रेनवॉश किया है। उन्होंने कहा कि जनवरी में बेटे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई देने लगा था और फरवरी में उसे धर्म परिवर्तन की जानकारी मिली। तभी से परिवार उसे समझाने का प्रयास कर रहा है। देवराज मलिक को उम्मीद है कि उनका बेटा भविष्य में फिर से सनातन परंपरा में लौट आएगा। एसपी एनपी सिंह का कहना है कि जांच अभी जारी है और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि यदि ब्रेनवॉश हुआ तो वह कब, कहां और किसके माध्यम से हुआ। इसी बिंदु पर एसआईटी गहराई से काम कर रही है। पुलिस का दावा है कि मामले में शामिल सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। फिलहाल यह मामला शामली से निकलकर प्रदेश की सबसे चर्चित जांचों में शामिल हो चुका है और हर नए खुलासे के साथ इसकी परतें और गहरी होती जा रही हैं।
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