राम मंदिर ट्रस्ट में संतों को जगह देने की उठी मांग! राष्ट्रपति, पीएम और सीएम से की गई बड़ी अपील

Editorial
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रिपोर्ट:धर्मेंद्र सिंह

अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अयोध्या के संत समाज और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कारसेवक परिवारों को प्रतिनिधित्व देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। सनातन रक्षक संघ ने इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को विस्तृत पत्र भेजकर ट्रस्ट के स्वरूप में संत समाज और आंदोलन से जुड़े लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है। संघ का कहना है कि जिन संतों और कारसेवकों ने दशकों तक श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को दिशा दी और संघर्ष किया, उन्हें ट्रस्ट में सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकुंद माधव त्रिपाठी (प्रद्युम्न) की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन केवल एक कानूनी या धार्मिक संघर्ष नहीं था, बल्कि यह करोड़ों रामभक्तों की आस्था और वर्षों के त्याग, तपस्या तथा समर्पण का परिणाम है। ऐसे में अयोध्या के संत समाज को ट्रस्ट में उचित स्थान देना समय की मांग है।

महंत रामशरण दास को ट्रस्ट में शामिल करने की प्रमुख मांग

पत्र में सबसे प्रमुख रूप से रंगमहल पीठाधीश्वर महंत रामशरण दास जी महाराज का नाम प्रस्तावित किया गया है। सनातन रक्षक संघ का कहना है कि महंत रामशरण दास अयोध्या के संत समाज के वरिष्ठ, सरल और व्यापक सम्मान प्राप्त संत हैं। उन्होंने वर्षों से सनातन धर्म, सामाजिक सेवा और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।संघ का मानना है कि उनके अनुभव, आध्यात्मिक नेतृत्व और सामाजिक स्वीकार्यता का लाभ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिलना चाहिए। पत्र में कहा गया है कि उनका ट्रस्ट में शामिल होना संत समाज की भावनाओं का सम्मान होगा।

दो अन्य प्रमुख संतों को भी प्रतिनिधित्व देने की अपील

सनातन रक्षक संघ ने केवल एक नाम तक अपनी मांग सीमित नहीं रखी है। पत्र में महंत वासुदेवाचार्य स्वामी विद्या भास्कर जी महाराज को भी ट्रस्ट में शामिल करने का अनुरोध किया गया है। संघ ने उन्हें वेद, शास्त्र और सनातन धर्मग्रंथों के विद्वान संत बताते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय संस्कृति और धार्मिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया है।इसके अलावा महंत राजकुमार दास जी महाराज का नाम भी प्रमुखता से रखा गया है। पत्र में कहा गया है कि उन्होंने धर्म, समाज सेवा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के क्षेत्र में लंबे समय से कार्य किया है तथा समाज के बीच उनकी विशेष पहचान और सम्मान है। ऐसे संतों की भागीदारी ट्रस्ट को और अधिक व्यापक तथा संत समाज से जुड़ा हुआ बनाएगी।

कारसेवक परिवारों को भी मिले सम्मान

सनातन रक्षक संघ ने अपने पत्र में केवल संतों तक ही मांग सीमित नहीं रखी। संगठन ने यह भी आग्रह किया है कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कम से कम तीन कारसेवक परिवारों को भी ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व दिया जाए।पत्र में कहा गया है कि राम मंदिर आंदोलन में हजारों कारसेवकों ने वर्षों तक संघर्ष किया। अनेक लोगों ने कठिनाइयों का सामना किया, कई परिवारों ने सामाजिक और व्यक्तिगत स्तर पर त्याग किया। ऐसे परिवारों को ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व देना उनके योगदान का सम्मान होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।

‘आंदोलन के योगदान का मिलना चाहिए सम्मान’

संघ का कहना है कि श्रीराम मंदिर का निर्माण करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है, लेकिन इसके पीछे वर्षों तक चले आंदोलन, संतों के मार्गदर्शन और कारसेवकों के समर्पण को भी भुलाया नहीं जा सकता। इसलिए ट्रस्ट में ऐसे लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिन्होंने इस ऐतिहासिक आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।पत्र में कहा गया है कि इससे संत समाज और रामभक्तों की भावनाओं का सम्मान होगा तथा ट्रस्ट और समाज के बीच संवाद और विश्वास भी मजबूत होगा।

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से सकारात्मक निर्णय की अपील

सनातन रक्षक संघ ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इस मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं। संगठन ने उम्मीद जताई है कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े संतों और कारसेवक परिवारों के योगदान को देखते हुए उन्हें ट्रस्ट में उचित प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाएगा।संघ का कहना है कि यह केवल कुछ व्यक्तियों को पद देने का मामला नहीं है, बल्कि उस लंबे संघर्ष, त्याग और आध्यात्मिक नेतृत्व का सम्मान करने का विषय है, जिसने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचाया।

संत समाज में चर्चा का विषय बनी मांग

सनातन रक्षक संघ की ओर से भेजे गए इस पत्र के बाद अयोध्या के संत समाज और रामभक्तों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र और राज्य सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती हैं। यदि इस प्रस्ताव पर सकारात्मक निर्णय होता है, तो यह श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े संतों और कारसेवक परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सम्मान माना जाएगा।

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