अंबेडकरनगर उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं, लेकिन अंबेडकरनगर के महामाया राजकीय एलोपैथी मेडिकल कॉलेज ने ऐसा मॉडल पेश किया है जिसने पूरे प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब अंबेडकरनगर मेडिकल कॉलेज में शाम 4 बजे तक ओपीडी चल सकती है, तो प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को दोपहर 2 बजे के बाद डॉक्टर क्यों नहीं मिलते? यह सवाल अब केवल मरीज ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी उठा रहे हैं। अंबेडकरनगर के दोस्तपुर निवासी 55 वर्षीय सुंदर लाल हाल ही में घुटने के दर्द का इलाज कराने मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। डॉक्टर ने उन्हें एक्सरे कराने की सलाह दी। जांच करवाकर जब वह रिपोर्ट लेकर लौटे तो दोपहर के 3 बज चुके थे। उन्हें उम्मीद थी कि अब डॉक्टर नहीं मिलेंगे और अगले दिन फिर अस्पताल आना पड़ेगा। लेकिन मेडिकल कॉलेज में शाम 4 बजे तक ओपीडी चलने के कारण उन्हें उसी दिन डॉक्टर मिल गए, रिपोर्ट दिखाई और दवा लेकर घर लौट गए। एक ही दिन में जांच और इलाज पूरा होने से उनका समय, पैसा और मेहनत तीनों बच गए। दरअसल अंबेडकरनगर प्रदेश का पहला मेडिकल कॉलेज बन गया है जहां मरीजों की सुविधा को देखते हुए ओपीडी का समय बढ़ाकर शाम 4 बजे तक कर दिया गया है। इस व्यवस्था का सीधा लाभ प्रतिदिन 150 से 200 मरीजों को मिल रहा है। पहले जिन मरीजों को जांच रिपोर्ट दिखाने के लिए अगले दिन दोबारा अस्पताल आना पड़ता था, अब उनका पूरा उपचार एक ही दिन में हो रहा है। इससे न केवल मरीजों को राहत मिली है, बल्कि सुबह पर्चा काउंटरों पर लगने वाली लंबी कतारों में भी कमी आई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की गाइडलाइन के अनुसार मेडिकल कॉलेजों की फैकल्टी और सीनियर रेजीडेंट्स का ड्यूटी समय सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित है, तो फिर प्रदेश के अधिकांश मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी दोपहर 2 बजे ही क्यों बंद हो जाती है? नियमों के अनुसार डॉक्टरों को 4 बजे तक अस्पताल में रहना होता है। ऐसे में 2 बजे के बाद भी संबंधित विभाग के एक या दो डॉक्टर मरीजों को देख सकते हैं, लेकिन व्यवहार में ऐसा कम ही देखने को मिलता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में 4 बजे तक ओपीडी शुरू कर दी जाए तो लाखों मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए यह व्यवस्था किसी वरदान से कम नहीं होगी। पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. बद्री विशाल के अनुसार, यदि कोई मरीज 20 किलोमीटर दूर से अस्पताल आता है तो आने-जाने, भोजन और मजदूरी के नुकसान सहित उसका करीब 200 रुपये खर्च हो जाता है। यदि उसे जांच रिपोर्ट दिखाने के लिए अगले दिन फिर आना पड़े तो यह खर्च दोगुना हो जाता है। 4 बजे तक ओपीडी चलने से मरीजों की यह आर्थिक परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है। महामाया राजकीय एलोपैथी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर मुकेश कुमार यादव का कहना है कि इस व्यवस्था से सिर्फ मरीजों को ही नहीं, बल्कि मेडिकल शिक्षा और शोध कार्यों को भी फायदा हो रहा है। अधिक मरीज आने से डॉक्टरों को शोध के लिए ज्यादा डेटा और सैंपल मिलते हैं, जबकि रेजीडेंट डॉक्टरों को व्यावहारिक प्रशिक्षण का बेहतर अवसर मिलता है। उनका कहना है कि कॉलेज में बड़ी संख्या में गरीब और दूरदराज के मरीज आते हैं, इसलिए उनकी सुविधा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया गया। अंबेडकरनगर का यह मॉडल अब प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों के लिए मिसाल बनता दिख रहा है। स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के बड़े-बड़े दावों के बीच यह प्रयोग साबित कर रहा है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो मरीजों को बिना अतिरिक्त संसाधनों के भी बड़ी राहत दी जा सकती है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार इस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करेगी या फिर मरीजों को इलाज के लिए अब भी दो-दो दिन अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ेंगे।
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