रिपोर्ट: राहुल वर्मा
बाँदा उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच फर्रुखाबाद पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। साइबर क्राइम थाना और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की संयुक्त टीम ने एक ऐसे हाईटेक साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो एपीके (APK) फाइल और संदिग्ध मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए लोगों के स्मार्टफोन हैक कर उनके बैंक खातों से रकम उड़ाने का काम करता था। पुलिस ने इस संगठित गिरोह के 9 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 10 मोबाइल फोन, 6 एटीएम कार्ड, एक लैपटॉप, कई पैन कार्ड, आधार से जुड़े दस्तावेज और हजारों रुपये की नकदी बरामद हुई है। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है और अब इसके पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है।पुलिस के मुताबिक साइबर अपराधियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। तकनीकी निगरानी, डिजिटल सर्विलांस और खुफिया सूचना के आधार पर साइबर क्राइम थाना एवं एसओजी की संयुक्त टीम ने शहर कोतवाली क्षेत्र में बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के पास घेराबंदी कर गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया। पूछताछ और बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। सबसे पहले वे खुद को बैंक अधिकारी, मोबाइल कंपनी का कर्मचारी, ऑनलाइन सर्विस एजेंट या किसी प्रतिष्ठित संस्था का प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद केवाईसी अपडेट, बैंक खाता सत्यापन, मोबाइल सुरक्षा अपडेट, ट्रांसपोर्ट सेवा, नौकरी या अन्य सुविधाओं का झांसा देकर एक APK फाइल या विशेष मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करने के लिए कहते थे।जैसे ही कोई व्यक्ति उस APK फाइल को अपने मोबाइल में इंस्टॉल करता, उसका मोबाइल साइबर अपराधियों के नियंत्रण में आ जाता। आरोपी मोबाइल में मौजूद बैंकिंग एप, मैसेज, ओटीपी, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बना लेते थे। इसके बाद कुछ ही मिनटों में पीड़ित के बैंक खाते से रकम निकाल ली जाती थी। कई मामलों में पीड़ित को तब तक ठगी की जानकारी नहीं होती थी, जब तक उसके खाते से पूरी रकम साफ नहीं हो जाती।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का काम केवल मोबाइल हैकिंग तक सीमित नहीं था। आरोपी ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोगों को बहला-फुसलाकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज भी हासिल कर लेते थे। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अलग-अलग बैंकों में फर्जी बैंक खाते खुलवाए जाते थे और बड़ी संख्या में मोबाइल सिम कार्ड जारी कराए जाते थे।इन फर्जी बैंक खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था, जिससे जांच एजेंसियों के लिए असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। वहीं फर्जी सिम कार्डों का इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों के लोगों को कॉल करने, फर्जी पहचान बनाने और डिजिटल ट्रांजैक्शन करने में किया जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 10 मोबाइल फोन, 6 एटीएम कार्ड, एक लैपटॉप, कई पैन कार्ड, अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज और हजारों रुपये की नकदी बरामद हुई है। पुलिस ने बरामद मोबाइल और लैपटॉप को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। इनमें मौजूद डेटा से यह पता लगाया जाएगा कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया और कितनी धनराशि का लेन-देन किया।प्रारंभिक जांच में पुलिस को संकेत मिले हैं कि गिरोह का नेटवर्क केवल फर्रुखाबाद या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। कई अन्य राज्यों के बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के लिंक भी सामने आए हैं। पुलिस अब डिजिटल ट्रेल के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। फरार आरोपियों की तलाश में भी कई स्थानों पर दबिश दी जा रही है।अपर पुलिस अधीक्षक मेविस टॉक ने बताया कि साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस लगातार अभियान चला रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंक खातों की गहन जांच कराई जा रही है। जल्द ही गिरोह के अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने मोबाइल में APK फाइल, लिंक या अज्ञात एप्लीकेशन डाउनलोड न करें। बैंक कभी भी फोन पर ओटीपी, पासवर्ड या निजी जानकारी नहीं मांगता। यदि कोई व्यक्ति इस तरह की जानकारी मांगता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं और उसकी सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम साइबर थाने को दें।पुलिस का कहना है कि डिजिटल युग में साइबर अपराधियों के तरीके लगातार बदल रहे हैं, इसलिए लोगों को भी तकनीकी रूप से जागरूक रहने की जरूरत है। फर्रुखाबाद पुलिस की यह कार्रवाई न केवल जिले बल्कि पूरे क्षेत्र में सक्रिय साइबर अपराधियों के लिए एक बड़ा संदेश है कि अब डिजिटल ठगी करने वालों के खिलाफ सख्त और लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। फिलहाल पुलिस इस हाईटेक गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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