राम मंदिर के लिए घर छोड़ दिया, लेकिन 4 साल बाद भी नहीं मिला पूरा मुआवजा! अब डीएम से न्याय की गुहार

Editorial
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रिपोर्ट :धर्मेंद्र सिंह

अयोध्या राम मंदिर निर्माण और परिसर विस्तार को लेकर देशभर में आस्था और उत्साह का माहौल रहा, लेकिन इसी परियोजना से प्रभावित कुछ परिवार आज भी अपने अधिकारों के लिए प्रशासन के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वर्ष 2021 में राम मंदिर परिसर विस्तार के लिए अधिग्रहित किए गए मकानों के भूमि और भवन के मुआवजे का भुगतान चार वर्ष बाद भी पूरा नहीं होने का आरोप लगाते हुए प्रभावित परिवारों ने एक बार फिर जिलाधिकारी अयोध्या से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने बिना किसी विरोध के अपने पुश्तैनी घर मंदिर निर्माण के लिए प्रशासन को सौंप दिए थे, लेकिन आज तक उन्हें उनका पूरा वैधानिक मुआवजा नहीं मिला।

‘राम मंदिर के लिए घर दिया, अब खुद किराए के मकान में रहने को मजबूर’

प्रभावित परिवारों का कहना है कि 7 सितंबर 2021 को रामकोट क्षेत्र स्थित उनके मकानों का अधिग्रहण राम मंदिर परिसर विस्तार योजना के तहत किया गया था। उस समय प्रशासन ने भरोसा दिलाया था कि नियमानुसार भूमि और भवन का पूरा मुआवजा जल्द उपलब्ध करा दिया जाएगा।पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने इस परियोजना को केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और राष्ट्र के सम्मान से जुड़ा विषय मानते हुए बिना किसी विवाद या विरोध के अपना घर प्रशासन को सौंप दिया। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार उनके त्याग का सम्मान करेगी और समय पर मुआवजा देकर उन्हें नया घर बसाने में मदद मिलेगी, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी यह उम्मीद अधूरी है।

चार साल से अधर में लटका मुआवजा

प्रभावित परिवारों ने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि अधिग्रहण के बाद से अब तक उन्हें भूमि और भवन का पूरा मुआवजा नहीं मिला। कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने और आवेदन देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।उनका कहना है कि अधिग्रहण के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है। जिन लोगों ने वर्षों की मेहनत से अपना आशियाना बनाया था, वे आज किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलने के कारण वे नया मकान भी नहीं बनवा पा रहे हैं।

आर्थिक संकट ने बढ़ाई मुश्किलें

पीड़ित परिवारों के अनुसार, मुआवजा लंबित रहने से उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। किराया, रोजमर्रा का खर्च और बच्चों की पढ़ाई जैसी जिम्मेदारियों के बीच जीवनयापन मुश्किल हो गया है।ज्ञापन में एक ऐसे परिवार का भी उल्लेख किया गया है, जो गंभीर बीमारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। उनका कहना है कि यदि समय पर मुआवजा मिल जाता, तो इलाज और रहने की व्यवस्था बेहतर ढंग से हो सकती थी। लगातार देरी ने कई परिवारों को मानसिक तनाव और आर्थिक संकट में डाल दिया है।

‘हम विरोध नहीं, अपना अधिकार मांग रहे हैं’

प्रभावित परिवारों ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का आंदोलन या विरोध करना नहीं है। उनका कहना है कि वे केवल अपने वैधानिक अधिकार के तहत लंबित मुआवजा चाहते हैं।उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन समय पर पूरा भुगतान कर दे, तो वे अपने परिवार के लिए नया घर बनाकर सामान्य जीवन शुरू कर सकते हैं। उनका कहना है कि राम मंदिर निर्माण को लेकर उनके मन में आज भी सम्मान और आस्था है, लेकिन अपने अधिकार की मांग करना भी उनका संवैधानिक अधिकार है।

जिलाधिकारी से जल्द कार्रवाई की मांग

पीड़ितों ने जिलाधिकारी अयोध्या से अनुरोध किया है कि संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देकर वर्ष 2021 से लंबित भूमि और भवन के मुआवजे का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराया जाए। उनका कहना है कि चार वर्षों का इंतजार बहुत लंबा हो चुका है और अब प्रशासन को इस मामले में ठोस निर्णय लेना चाहिए।परिवारों ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान करेगा, ताकि वे भी सम्मानपूर्वक अपना जीवन दोबारा शुरू कर सकें।

राम मंदिर परियोजना और प्रभावित परिवार

राम मंदिर परिसर विस्तार के दौरान रामकोट क्षेत्र में कई मकानों और संपत्तियों का अधिग्रहण किया गया था। अधिकांश प्रभावित परिवारों ने परियोजना के महत्व को देखते हुए प्रशासन का सहयोग किया और शांतिपूर्वक अपनी संपत्ति सौंप दी। प्रशासन की ओर से उस समय यह आश्वासन दिया गया था कि सभी पात्र लोगों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।हालांकि अब कुछ प्रभावित परिवारों का आरोप है कि प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद भुगतान लंबित है। उनका कहना है कि बार-बार आवेदन देने के बाद भी उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि भुगतान में देरी किन कारणों से हुई और लंबित मुआवजा कब तक जारी किया जाएगा।अब सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि पीड़ित परिवारों के दावों में तथ्य पाए जाते हैं, तो वर्षों से लंबित इस मामले का शीघ्र समाधान न केवल प्रभावित लोगों को राहत देगा, बल्कि सरकार की पुनर्वास प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा भी मजबूत करेगा।राम मंदिर देश की आस्था का केंद्र है और इसके निर्माण में जिन परिवारों ने अपनी संपत्ति का त्याग किया, उनकी अपेक्षा भी यही है कि उन्हें कानून के अनुसार उनका पूरा अधिकार समय पर मिले। चार वर्षों से लंबित मुआवजे का यह मामला अब प्रशासन के सामने एक बड़ी परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या फैसला लेता है और प्रभावित परिवारों को कब तक राहत मिलती है।

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