रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित
फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक तस्वीर ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। तस्वीर को लेकर दावा किया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के नवनियुक्त क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू के हालिया फर्रुखाबाद दौरे के दौरान एक कार्यालय में आयोजित बैठक में श्रीमद्भगवद्गीता के ऊपर नाश्ते की प्लेट रखी गई। तस्वीर के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और कई लोग इस मामले में स्पष्टीकरण तथा जिम्मेदार लोगों से सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे हैं।हालांकि इस वायरल तस्वीर की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि तस्वीर कब और किन परिस्थितियों में ली गई तथा प्लेट जानबूझकर धार्मिक ग्रंथ पर रखी गई थी या यह अनजाने में हुई घटना थी। समाचार लिखे जाने तक भाजपा की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई तस्वीर
बताया जा रहा है कि यह तस्वीर कुछ दिन पहले भाजपा के नवनियुक्त क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू के स्वागत कार्यक्रम के दौरान ली गई थी। वायरल फोटो में भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह राठौर, भाजपा नेता सचिन यादव सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता दिखाई दे रहे हैं।सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि बैठक के दौरान मेज पर रखी श्रीमद्भगवद्गीता के ऊपर नाश्ते की प्लेट रख दी गई। जैसे ही यह तस्वीर विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हुई, लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया।कई यूजर्स ने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए नाराजगी जताई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं कुछ लोगों ने बिना तथ्य सामने आए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की भी अपील की।
हिंदू महासभा ने उठाई माफी की मांग
मामले में हिंदू महासभा के युवा प्रदेश अध्यक्ष विमलेश मिश्रा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि वायरल पोस्ट पूरी तरह सही है या नहीं, लेकिन यदि तस्वीर वास्तविक है तो इसमें शामिल सभी लोगों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।उन्होंने कहा कि भाजपा के कई नेता सनातन संस्कृति और धार्मिक मूल्यों की बात करते हैं। ऐसे में यदि वास्तव में किसी धार्मिक ग्रंथ के ऊपर नाश्ते की प्लेट रखी गई है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अनुचित है।उन्होंने आगे कहा कि धार्मिक ग्रंथ केवल पुस्तक नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। इसलिए उनका सम्मान हर परिस्थिति में किया जाना चाहिए।
धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला
श्रीमद्भगवद्गीता हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथों में से एक मानी जाती है। ऐसे में सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए हैं कि यदि दावा सही है, तो धार्मिक ग्रंथों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।हालांकि कई लोगों ने यह भी कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि तस्वीर वास्तविक है या नहीं और यदि है तो पूरी घटना का संदर्भ क्या था।

अभी तक नहीं हुई स्वतंत्र पुष्टि
इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वायरल फोटो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अभी तक किसी अधिकृत एजेंसी या जांच में यह प्रमाणित नहीं हुआ है कि तस्वीर में किया जा रहा दावा सही है।यह भी स्पष्ट नहीं है कि जिस वस्तु को धार्मिक ग्रंथ बताया जा रहा है, वह वास्तव में श्रीमद्भगवद्गीता ही थी या नहीं। साथ ही यह भी सामने नहीं आया है कि प्लेट जानबूझकर रखी गई थी या अनजाने में।इसी कारण मामले को लेकर कई लोग आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार करने की बात भी कह रहे हैं।
भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतजार
समाचार लिखे जाने तक भाजपा संगठन, क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू, विधायक नागेंद्र सिंह राठौर तथा भाजपा नेता सचिन यादव की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी सामग्री पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित पक्ष का बयान और उपलब्ध तथ्यों को सामने आना आवश्यक होता है।यदि भाजपा या संबंधित नेताओं की ओर से कोई स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो उससे पूरे घटनाक्रम की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
सोशल मीडिया के दौर में बढ़ी जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में कोई भी तस्वीर या वीडियो कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाता है। ऐसे में किसी भी वायरल सामग्री को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना उतना ही जरूरी है जितना कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों का धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना।कई बार अधूरी जानकारी या संदर्भ से अलग तस्वीरें भी बड़े विवाद का कारण बन जाती हैं। इसलिए प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित माना जाता है।
अब सबकी नजर आधिकारिक जवाब पर
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर लोग धार्मिक ग्रंथों के सम्मान की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग वायरल तस्वीर की सत्यता की जांच और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार करने की अपील कर रहे हैं।जब तक वायरल तस्वीर की पुष्टि नहीं हो जाती और संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने नहीं आता, तब तक इस मामले को आरोप और दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। यदि भविष्य में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण, जांच रिपोर्ट या बयान सामने आता है, तो वही इस पूरे विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा।
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