सीतापुर में सड़क पर धान रोपकर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, जर्जर सड़क के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन

Editorial
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सीतापुर जिले के धर्मापुर पोस्ट मधवापुर क्षेत्र में वर्षों से बदहाल पड़ी सड़क अब ग्रामीणों के लिए परेशानी ही नहीं, बल्कि जानलेवा साबित होती जा रही है। बरसात शुरू होते ही सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है। जगह-जगह गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से राहगीरों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और किसानों का निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है। लगातार शिकायतों के बावजूद सड़क की मरम्मत न होने से नाराज ग्रामीणों ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़क पर धान की रोपाई कर प्रशासन और सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयास किया।ग्रामीणों का कहना है कि धर्मापुर से मधवापुर को जोड़ने वाली यह सड़क लंबे समय से जर्जर हालत में है। बारिश होते ही पूरी सड़क जलमग्न हो जाती है और यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहां है और गड्ढे कहां। ऐसे में आए दिन बाइक सवार और पैदल चलने वाले लोग हादसों का शिकार होते रहते हैं। कई बार लोग गिरकर घायल हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने अब तक इस समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर इकट्ठा हुए और पानी से भरे गड्ढों में धान की रोपाई की। ग्रामीणों ने कहा कि जब सड़क खेत जैसी बन गई है तो इसमें खेती ही कर ली जाए। उनका कहना था कि यदि प्रशासन सड़क नहीं बना सकता तो कम से कम इसे खेत घोषित कर दे। इस अनोखे प्रदर्शन के माध्यम से ग्रामीणों ने सरकार और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद गांव की समस्याओं को पूरी तरह भुला दिया जाता है। कई बार अधिकारियों को लिखित शिकायत दी गई, जनप्रतिनिधियों से भी मुलाकात की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। नतीजा यह है कि सड़क की हालत दिन-प्रतिदिन और खराब होती जा रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों ग्रामीणों का आवागमन होता है। किसान अपनी फसल लेकर मंडी जाते हैं, छात्र-छात्राएं स्कूल और कॉलेज पहुंचते हैं तथा मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए भी यही मुख्य रास्ता है। बारिश के मौसम में सड़क पर इतना अधिक जलभराव हो जाता है कि कई बार एंबुलेंस तक पहुंचने में कठिनाई होती है। इससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।ग्रामीणों ने बताया कि जलनिकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण हर वर्ष यही स्थिति पैदा होती है। सड़क पर पानी कई दिनों तक जमा रहता है, जिससे सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत और जलनिकासी की व्यवस्था कर दी जाती तो आज यह स्थिति नहीं बनती।

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने सरकार से मांग की कि सड़क का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए, गड्ढों को भरा जाए और स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा जिला मुख्यालय पर भी प्रदर्शन किया जाएगा।यह अनोखा विरोध प्रदर्शन अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। सड़क पर धान की रोपाई की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग इसे ग्रामीणों की मजबूरी और प्रशासन की लापरवाही का प्रतीक बता रहे हैं।फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर टिकी हैं। अब देखना यह होगा कि सड़क पर उगी इस “प्रतीकात्मक खेती” के बाद जिम्मेदार अधिकारी जागते हैं या फिर ग्रामीणों को आने वाले दिनों में भी इसी बदहाल सड़क पर जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ेगा।

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