टाउन फीडर बना, लेकिन अंधेरे में शहर! नवाबगंज की जनता ने पूछा— वादा कब होगा पूरा?

Editorial
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रिपोर्ट:दीपचंद्र दीक्षित

फर्रुखाबाद/नवाबगंज नगरवासियों को बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति का सपना दिखाकर शुरू किया गया अलग टाउन फीडर अब सवालों के घेरे में है। उद्घाटन के समय किए गए दावों और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ते अंतर ने लोगों में नाराजगी पैदा कर दी है। नगरवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर अलग फीडर बनाने का उद्देश्य आज तक पूरा नहीं हो सका। हालात यह हैं कि नगर में आज भी बिजली आपूर्ति ग्रामीण क्षेत्रों जैसी ही हो रही है। लगातार कटौती, बार-बार ट्रिपिंग और लो वोल्टेज की समस्या ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।भीषण गर्मी और उमस के बीच घंटों बिजली गुल रहने से लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। लोगों का कहना है कि उद्घाटन के समय किए गए बड़े-बड़े वादे अब केवल भाषणों तक सीमित होकर रह गए हैं, जबकि आम जनता रोजाना परेशानियों का सामना कर रही है।

21 घंटे 30 मिनट बिजली का वादा, लेकिन हकीकत कुछ और

14 फरवरी 2026 को नवाबगंज विद्युत उपकेंद्र पर अलग टाउन फीडर का शुभारंभ बड़े उत्साह के साथ किया गया था। उद्घाटन के दौरान अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुशील शाक्य ने दावा किया था कि अब नगरवासियों को शहरी मानकों के अनुरूप लगभग 21 घंटे 30 मिनट नियमित बिजली मिलेगी।यह भी कहा गया था कि अलग टाउन फीडर बनने के बाद लो वोल्टेज, अनावश्यक कटौती और बार-बार बिजली ट्रिप होने जैसी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। उस समय नगरवासियों ने इसे बड़ी सौगात माना था और उम्मीद जताई थी कि वर्षों पुरानी समस्या से उन्हें राहत मिलेगी।लेकिन पांच महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी लोगों का कहना है कि हालात पहले जैसे ही बने हुए हैं।

दिन में कई बार गुल हो रही बिजली

स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह से लेकर देर रात तक कई बार बिजली आपूर्ति बाधित होती है। कई बार बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों बिजली गायब रहती है।गर्मी और उमस के मौसम में बिजली कटौती ने सबसे अधिक बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों की परेशानी बढ़ा दी है। रात के समय बिजली जाने से लोगों की नींद खराब हो रही है, वहीं दिन में घरेलू कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

लो वोल्टेज ने बढ़ाई मुश्किलें

नगरवासियों की दूसरी सबसे बड़ी शिकायत लो वोल्टेज को लेकर है।लोगों का कहना है कि कई बार बिजली तो रहती है, लेकिन वोल्टेज इतना कम होता है कि पंखे ठीक से नहीं चलते और कूलर, फ्रिज, मोटर तथा अन्य घरेलू उपकरण काम नहीं कर पाते।व्यापारियों का कहना है कि कम वोल्टेज के कारण उनके बिजली से चलने वाले उपकरण प्रभावित हो रहे हैं, जिससे कारोबार पर भी असर पड़ रहा है।कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि लगातार वोल्टेज में उतार-चढ़ाव के कारण उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब हो चुके हैं।

बच्चों की पढ़ाई और कारोबार पर असर

बिजली संकट का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है।नगर के छात्रों का कहना है कि बार-बार बिजली जाने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऑनलाइन पढ़ाई, कंप्यूटर और इंटरनेट आधारित कार्यों में भी दिक्कतें आ रही हैं।दूसरी ओर छोटे दुकानदारों, वेल्डिंग, प्रिंटिंग, साइबर कैफे और अन्य बिजली आधारित कारोबार करने वाले व्यापारियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है क्योंकि कई घरों में मोटर से पानी भरने की व्यवस्था है। बिजली न रहने पर लोगों को पानी की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है।

शहरी दरों पर बिल, लेकिन सुविधा ग्रामीण जैसी

बिजली विभाग के आंकड़ों के अनुसार नवाबगंज विद्युत उपकेंद्र से कुल 13,608 बिजली कनेक्शन जुड़े हुए हैं।इनमें लगभग 3,000 कनेक्शन नगर क्षेत्र के हैं, जबकि 456 उपभोक्ता शहरी दरों पर बिजली बिल जमा कर रहे हैं।यही आंकड़े अब लोगों के सवालों की वजह बन गए हैं।नगरवासियों का कहना है कि जब उनसे शहरी दरों पर बिजली बिल लिया जा रहा है, तो उन्हें शहरी मानकों के अनुरूप बिजली क्यों नहीं मिल रही?लोगों का कहना है कि यदि सुविधाएं ग्रामीण क्षेत्रों जैसी ही मिलनी हैं, तो फिर अलग टाउन फीडर बनाने का उद्देश्य क्या था?

जनता पूछ रही— आखिर फायदा किसे मिला?

नगरवासियों का कहना है कि अलग टाउन फीडर बनने के बाद उन्हें बेहतर बिजली आपूर्ति मिलने की उम्मीद थी, लेकिन स्थिति में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा।लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि फीडर पूरी तरह तैयार है तो उसका लाभ जनता तक क्यों नहीं पहुंच रहा? यदि किसी तकनीकी, प्रशासनिक या अन्य कारण से व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो पा रही है तो विभाग को इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

बिजली विभाग से मांगी पारदर्शिता

स्थानीय नागरिकों ने बिजली विभाग से मांग की है कि नगर की वास्तविक बिजली आपूर्ति का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।उन्होंने यह भी मांग उठाई कि यदि किसी कारणवश 21 घंटे 30 मिनट बिजली नहीं दी जा पा रही है तो उसके पीछे की वजह बताई जाए और समस्या के समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना जारी की जाए।

जनप्रतिनिधियों से भी जवाब की मांग

नगरवासियों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी हस्तक्षेप की मांग की है।लोगों का कहना है कि उद्घाटन के समय बड़े-बड़े वादे किए गए थे, इसलिए अब जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे स्वयं बिजली व्यवस्था की समीक्षा करें और जनता को राहत दिलाने के लिए बिजली विभाग पर आवश्यक कार्रवाई का दबाव बनाएं।

जनता को इंतजार— कब मिलेगा वादों का लाभ?

नवाबगंज में अलग टाउन फीडर शुरू होने के बावजूद यदि बिजली आपूर्ति की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होता, तो यह परियोजना अपने उद्देश्य पर सवाल खड़े करती है। नगरवासी अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी बदलाव चाहते हैं।लोगों की मांग है कि कटौती, ट्रिपिंग और लो वोल्टेज की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि नगरवासियों को वही सुविधाएं मिल सकें, जिनका वादा उद्घाटन के समय किया गया था। अब निगाहें बिजली विभाग और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि वे जनता की इस बढ़ती नाराजगी को कितनी गंभीरता से लेते हैं और नवाबगंज को वास्तव में शहरी मानकों के अनुरूप निर्बाध बिजली आपूर्ति कब तक उपलब्ध करा पाते हैं।

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