अमेरिकी कानूनी कार्रवाई से जुड़े विवाद के बीच अदाणी समूह ने अपने कारोबार और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बड़े स्तर पर निवेश जारी रखा। समूह के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही और वित्त वर्ष 2026 के दौरान उसने 2.08 लाख करोड़ रुपये से अधिक का पूंजीगत निवेश किया। यह निवेश नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली ट्रांसमिशन, बंदरगाह, हवाई अड्डे, सड़क, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में किया गया।समूह के लिए यह निवेश इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसी अवधि में अमेरिका में अदाणी समूह से जुड़ा कानूनी मामला चर्चा में रहा। इसके बावजूद कंपनी ने अपनी प्रमुख परियोजनाओं पर काम जारी रखा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में विस्तार की रणनीति को आगे बढ़ाया।
2.08 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश
अदाणी समूह के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही और वित्त वर्ष 2026 में कुल 2.08 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कैपिटल एक्सपेंडिचर किया गया। इसमें सबसे बड़ा फोकस भारत के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं पर रहा।समूह की कंपनियों ने नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने, बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार, बंदरगाहों और हवाई अड्डों के विकास के साथ-साथ सड़क और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर में भी निवेश किया।इस बड़े निवेश को समूह की लंबी अवधि की विस्तार रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अदाणी समूह का कारोबार कई ऐसे क्षेत्रों में है, जिन्हें देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से सीधे जोड़ा जाता है।

चार साल में परिसंपत्तियों में 90 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी
अदाणी समूह के अनुसार, वित्त वर्ष 2023 से वित्त वर्ष 2026 के बीच उसकी कुल परिसंपत्तियों में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में समूह की कुल परिसंपत्ति 4.12 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गई।यानी करीब चार साल की अवधि में परिसंपत्तियों में 90 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इसी दौरान समूह का सालाना पूंजी निवेश भी लगातार बढ़ा।वित्त वर्ष 2023 में जहां सालाना पूंजी निवेश 95,554 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2026 में यह बढ़कर 1,52,967 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
भारतीय कंपनियों में सबसे बड़े निवेश का दावा
वित्त वर्ष 2026 में 1,52,967 करोड़ रुपये के सालाना पूंजीगत निवेश के साथ अदाणी समूह ने बड़े भारतीय कॉरपोरेट निवेशकों में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यह निवेश रिलायंस इंडस्ट्रीज के 1,44,271 करोड़ रुपये के निवेश से भी अधिक रहा।वहीं इसी अवधि में जेएसडब्ल्यू स्टील का पूंजीगत निवेश 15,595 करोड़ रुपये बताया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अदाणी समूह ने इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा से जुड़े कारोबार में किस स्तर पर पूंजी लगाई।
एयरपोर्ट से पोर्ट तक बढ़ा कारोबार
अदाणी समूह की विस्तार रणनीति में एयरपोर्ट और पोर्ट कारोबार की भी अहम भूमिका रही है। पिछले दिसंबर में नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने परिचालन शुरू किया। इसके बाद फरवरी में गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल-2 का संचालन शुरू हुआ।पोर्ट कारोबार में भी समूह ने महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की। अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन पिछले वित्त वर्ष में 500 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक माल संभालने वाला भारत का पहला बंदरगाह संचालक बना।इससे देश के पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में समूह की स्थिति और मजबूत होने का संकेत मिलता है।
रिन्यूएबल एनर्जी में भी बड़ा विस्तार
ऊर्जा क्षेत्र में भी अदाणी समूह का फोकस लगातार बढ़ा है। अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने 20 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का आंकड़ा पार किया।भारत में सौर और पवन ऊर्जा की मांग बढ़ने के बीच यह विस्तार समूह की ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश के जरिए कंपनी पारंपरिक ऊर्जा के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है।
गंगा एक्सप्रेसवे से भी जुड़ी बड़ी उपलब्धि
इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का जून 2026 में उद्घाटन भी समूह की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क देने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।अदाणी समूह का इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो सड़क, एयरपोर्ट, पोर्ट, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में फैला हुआ है। ऐसे में इन परियोजनाओं का विस्तार समूह के कारोबार को विविध बनाने की रणनीति को भी दर्शाता है।
अमेरिकी कानूनी मामले के बीच जारी रहा कारोबार
नवंबर 2024 में अमेरिका में अदाणी समूह से जुड़ा अभियोग सार्वजनिक होने के बाद समूह के बाजार पूंजीकरण पर भी असर पड़ा था। शुरुआती चार कारोबारी सत्रों में समूह के बाजार पूंजीकरण में करीब 2.85 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई थी।हालांकि समूह के अनुसार उसकी प्रमुख परियोजनाओं पर काम नहीं रुका और कारोबारी प्रदर्शन भी जारी रहा। बाद की अवधि में समूह के बाजार मूल्यांकन में सुधार देखने को मिला।अगस्त 2026 तक समूह का बाजार पूंजीकरण करीब 18.5 लाख करोड़ रुपये बताया गया। यह मार्च 2025 के निचले स्तर से लगभग 7.6 लाख करोड़ रुपये अधिक था। वहीं, अमेरिकी अभियोग से पहले के स्तर की तुलना में भी बाजार पूंजीकरण करीब 4 लाख करोड़ रुपये ज्यादा बताया गया।
आगे भी निवेश पर रहेगा फोकस
अदाणी समूह का मौजूदा निवेश पैटर्न बताता है कि कंपनी का मुख्य फोकस लंबे समय के इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा कारोबार पर बना हुआ है। एयरपोर्ट, पोर्ट, रिन्यूएबल एनर्जी, ट्रांसमिशन, सड़क और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में विस्तार के जरिए समूह देश की बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों से जुड़ने की कोशिश कर रहा है।कुल मिलाकर अदाणी समूह का 2.08 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश अमेरिकी कानूनी विवाद के बीच उसकी विस्तार रणनीति का बड़ा संकेत माना जा सकता है। परिसंपत्तियों में तेज बढ़ोतरी, रिकॉर्ड पूंजीगत निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के विस्तार से समूह की कारोबारी महत्वाकांक्षा साफ दिखाई देती है। हालांकि, निवेश और बाजार पूंजीकरण के आंकड़े कंपनी द्वारा बताए गए आंकड़ों पर आधारित हैं और निवेशकों के लिए किसी भी निष्कर्ष से पहले आधिकारिक वित्तीय दस्तावेजों और बाजार जोखिमों का मूल्यांकन जरूरी है।
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