
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी का मामला अब सिर्फ मंदिर प्रशासन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने राष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में अब केंद्र और प्रदेश सरकार दोनों सक्रिय हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय भी हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। चर्चा है कि पीएमओ की ओर से एक वरिष्ठ अधिकारी ने अयोध्या पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं, प्रदेश सरकार की ओर से गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल सोमवार से अपनी औपचारिक जांच शुरू करेगा। राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद अयोध्या से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक हलचल तेज हो गई है। एक सप्ताह पहले यह मामला उजागर हुआ था, जिसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने स्तर पर गोपनीय जांच शुरू कर दी थी। ट्रस्ट कार्यालय की सुरक्षा बढ़ा दी गई और बाहरी लोगों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई। लेकिन जैसे-जैसे मामले की चर्चा बढ़ी, वैसे-वैसे सरकार पर निष्पक्ष जांच कराने का दबाव भी बढ़ता गया।

इसी बीच मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। इस विशेष जांच दल में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन को शामिल किया गया है। अब यह टीम सोमवार को अयोध्या पहुंचकर जांच की कमान संभालेगी। एसआईटी सिर्फ पैसों के लेन-देन की जांच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि कहीं किसी स्तर पर लापरवाही, संरक्षण या मिलीभगत तो नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार, जांच टीम ट्रस्ट के पदाधिकारियों, मंदिर कर्मचारियों और उन लोगों से भी पूछताछ करेगी, जिन पर शुरुआती स्तर पर संदेह जताया गया है। ट्रस्ट की ओर से अब तक की गई आंतरिक जांच का पूरा रिकॉर्ड भी एसआईटी अपने कब्जे में ले सकती है। यदि किसी ट्रस्टी, अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उनके अधिकार सीमित करने से लेकर कानूनी कार्रवाई तक की सिफारिश की जा सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शुरुआती जांच में गड़बड़ी के संकेत मिले हैं, तो अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई? यही सवाल अब विपक्ष भी उठा रहा है। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस पूरे मामले पर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह सिर्फ वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने प्रदेश सरकार की एसआईटी पर अविश्वास जताते हुए मांग की कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित स्वतंत्र समिति से कराई जाए। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो ट्रस्ट को भंग कर सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों को पद से हटाया जाना चाहिए। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद विनय कटियार ने भी इस मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने पहले घोषणा की थी कि वह पुलिस अधिकारियों से मिलकर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग करेंगे। हालांकि रविवार को वह अधिकारियों से मुलाकात किए बिना ही लखनऊ लौट गए। इसके बावजूद उन्होंने साफ कहा कि अगर किसी ने श्रद्धालुओं के चढ़ावे में गड़बड़ी की है, तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए और उसे जेल भेजा जाना चाहिए।इस बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने भी पूरे मामले का जायजा लिया। उन्होंने मंदिर परिसर पहुंचकर दानपेटियों, चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था और बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया का निरीक्षण किया। उन्होंने गर्भगृह में रखी दान पेटियों को भी देखा और अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बेहद तेजी से एसआईटी गठित की है और जांच समिति की सिफारिशों को पूरी तरह लागू किया जाएगा।मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट ने व्यवस्थाओं में बदलाव भी शुरू कर दिया है। ट्रस्ट भवन में नया हाई सिक्योरिटी लॉकर लगाया गया है, जिसमें दानपेटियों से निकलने वाली नकदी, बहुमूल्य आभूषण और अन्य कीमती वस्तुओं को सुरक्षित रखा जाएगा। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की निगरानी में इस लॉकर को अत्याधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप स्थापित किया गया है। राम मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की खबर ने श्रद्धालुओं को भी झकझोर दिया है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की जांच पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ पैसों का नहीं है, बल्कि उस भरोसे का है, जो करोड़ों लोगों ने भगवान राम के दरबार और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर जताया है। आने वाले दिनों में यह जांच तय करेगी कि यह मामला महज एक प्रशासनिक चूक है या फिर आस्था के नाम पर हुआ कोई बड़ा खेल।
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