लखनऊ उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। योगी सरकार में पंचायतीराज मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। राजभर ने दावा किया है कि अखिलेश यादव से मिलने, उनके साथ फोटो खिंचवाने और हाथ मिलाने तक के लिए कथित तौर पर पैसे वसूले जाते हैं। उन्होंने यह आरोप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट के जरिए लगाया, जो अब प्रदेश की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गई है।राजभर का दावा है कि उनके पास कुछ ऐसे लोग पहुंचे, जिन्होंने खुद को समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता बताया और कथित तौर पर यह शिकायत की कि अखिलेश यादव तक पहुंचने के लिए उनके आसपास मौजूद लोग पैसे मांगते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और समाजवादी पार्टी की ओर से इस पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
‘भैया’ से मिलने का भी तय है रेट?
ओम प्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि कुछ सपा कार्यकर्ता उनसे मिलने आए थे। उन्होंने दावा किया कि ये कार्यकर्ता अपनी पार्टी और अखिलेश यादव के समर्थक हैं, लेकिन अपनी परेशानी सीधे अपने नेता तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। राजभर के अनुसार, इन कार्यकर्ताओं ने उनसे कहा कि “भैया” (अखिलेश यादव) से फोटो खिंचवाने के लिए ₹5,000, हाथ मिलाने के लिए ₹8,000 से ₹10,000 और व्यक्तिगत मुलाकात के लिए अलग से पैसे लिए जाते हैं।राजभर ने इन दावों के आधार पर सवाल उठाया कि यदि यह सच है, तो अपने ही कार्यकर्ताओं से इस तरह की कथित वसूली क्यों की जा रही है।

‘अपनी ही बिरादरी से वसूली क्यों?’
राजभर ने अपने राजनीतिक अंदाज में तंज कसते हुए लिखा कि यदि यादव समाज के कार्यकर्ताओं से भी कथित तौर पर पैसे लिए जा रहे हैं, तो बाकी लोगों के लिए क्या व्यवस्था होगी? उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं का सम्मान होना चाहिए, उनसे आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।उन्होंने लिखा कि यदि यह सब अखिलेश यादव की जानकारी में हो रहा है तो यह गंभीर मामला है, और यदि उनकी जानकारी के बिना हो रहा है तो उन्हें अपने आसपास के लोगों पर नियंत्रण रखना चाहिए।
900 गुना संपत्ति बढ़ने का भी उठाया मुद्दा
राजभर ने अपने बयान में अखिलेश यादव की संपत्ति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उनकी संपत्ति में वर्षों के दौरान करीब 900 गुना वृद्धि हुई है। इसके बाद उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि यदि इतनी संपत्ति है, तो फिर कथित तौर पर कार्यकर्ताओं से पैसे लेने की क्या जरूरत पड़ गई?हालांकि संपत्ति से जुड़े इस दावे के समर्थन में राजभर ने कोई दस्तावेज या प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया।
‘मित्र के नाते दे रहा हूं सलाह’
राजभर ने अपनी पोस्ट में राजनीतिक हमला करने के साथ-साथ व्यंग्यात्मक लहजा भी अपनाया। उन्होंने लिखा कि वह अखिलेश यादव को अपना राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भले मानते हों, लेकिन व्यक्तिगत रूप से उन्हें मित्र मानते हैं। इसी कारण वह यह सलाह दे रहे हैं कि यदि वास्तव में ऐसा कोई सिस्टम चल रहा है तो उसे तुरंत बंद कराया जाए।उन्होंने लिखा कि यदि कार्यकर्ताओं की अनदेखी होती रही और कथित तौर पर उनसे पैसे लिए जाते रहे, तो इसका नुकसान समाजवादी पार्टी को भविष्य के चुनावों में उठाना पड़ सकता है।
’20 रुपये चंदा मांगकर कार्यकर्ताओं को मूर्ख मत बनाइए’
राजभर ने अपनी पोस्ट के आखिर में तीखा राजनीतिक तंज कसते हुए कहा कि पार्टी को कार्यकर्ताओं से छोटे-छोटे चंदे मांगने और कथित तौर पर मुलाकात के नाम पर पैसे लेने जैसी व्यवस्था बंद करनी चाहिए। उन्होंने लिखा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो नाराज कार्यकर्ता ही पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकते हैं।उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत विपक्ष लोकतंत्र के लिए जरूरी है, इसलिए वह चाहते हैं कि समाजवादी पार्टी अपनी कार्यशैली में सुधार करे।
पहले भी साधते रहे हैं निशाना
यह पहला मौका नहीं है जब ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला हो। पिछले कुछ महीनों से वह लगातार समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे हैं। कभी कानून-व्यवस्था को लेकर तो कभी चुनावी रणनीति और संगठन को लेकर वह लगातार बयान देते रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को देखते हुए सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है।
सियासत गरम, प्रतिक्रिया का इंतजार
राजभर के इन आरोपों के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है। समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं।हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। समाचार लिखे जाने तक समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे में यह मामला फिलहाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के दायरे में है और आगे सपा की प्रतिक्रिया के बाद ही तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।फिलहाल इतना तय है कि ओम प्रकाश राजभर के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
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