“अयोध्या से सिद्धिविनायक तक कथित लूट? सुप्रिया सुले का बीजेपी पर बड़ा हमला—’पहले जांच क्यों नहीं हुई?'”

Editorial
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महाराष्ट्र की राजनीति में मंदिरों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले ने अयोध्या के राम मंदिर, उज्जैन महाकाल मंदिर और मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इन धार्मिक स्थलों में भ्रष्टाचार या वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप थे, तो सरकार ने समय रहते उनकी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई?सुप्रिया सुले ने कहा कि देश की आस्था के सबसे बड़े केंद्रों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे जरूरी है। यदि भगवान के नाम पर आने वाले चढ़ावे और दान में किसी प्रकार की हेराफेरी होती है, तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ विश्वासघात भी है।

शिंदे के बयान के बाद गरमाई राजनीति

यह विवाद उस समय और गहरा गया जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक दिन पहले उद्धव ठाकरे सरकार के कार्यकाल में सिद्धिविनायक मंदिर में कथित ‘लूट’ का आरोप लगाया था। शिंदे के इस बयान के बाद सुप्रिया सुले ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि सरकार के पास इतने गंभीर आरोपों की जानकारी थी, तो फिर कार्रवाई और जांच पहले क्यों नहीं की गई?उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक आरोप लगाने से काम नहीं चलेगा। यदि भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए, चाहे वे किसी भी दल या संस्था से जुड़े हों।

‘भगवान के घर में भ्रष्टाचार सबसे शर्मनाक’

सुप्रिया सुले ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि मंदिरों में भ्रष्टाचार की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा,

“अगर भगवान के घर में भी भ्रष्टाचार हो रहा है तो इससे ज्यादा शर्मनाक और गंदी राजनीति कुछ नहीं हो सकती।”

उन्होंने कहा कि अयोध्या, उज्जैन और सिद्धिविनायक जैसे धार्मिक स्थलों पर लगे आरोप देशभर के श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करते हैं। ऐसे मामलों में राजनीति नहीं बल्कि पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

अयोध्या मामले का भी किया जिक्र

सुप्रिया सुले ने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े उस मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें दान और कीमती सामान की गिनती में कथित गड़बड़ियों के आरोप सामने आए थे। उन्होंने कहा कि यदि जांच में अनियमितताएं सामने आ रही हैं तो सरकार को पूरी सच्चाई देश के सामने रखनी चाहिए।उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा भ्रष्टाचार के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाती है। विपक्ष के नेताओं पर तुरंत कार्रवाई होती है, लेकिन जब अपने लोगों पर सवाल उठते हैं तो जांच में देरी होती है।

बीजेपी पर साधा राजनीतिक निशाना

सुले ने कहा कि भाजपा अब भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नैतिकता की बात नहीं कर सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं पर पहले भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाते हैं, बाद में वही नेता भाजपा में शामिल होने के बाद “ईमानदार” घोषित कर दिए जाते हैं।उनका कहना था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक लाभ-हानि देखकर नहीं बल्कि निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए।

अंधविश्वास पर भी जताई चिंता

राजनीतिक हमलों के बीच सुप्रिया सुले ने समाज में बढ़ते अंधविश्वास पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की पहचान हमेशा सामाजिक सुधार और वैज्ञानिक सोच वाले राज्य के रूप में रही है। ऐसे में अंधविश्वास और ढोंगी बाबाओं के बढ़ते प्रभाव को रोकना जरूरी है।उन्होंने प्रसिद्ध अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता डॉ. नरेंद्र दाभोलकर को याद करते हुए कहा कि राज्य में अंधविश्वास विरोधी कानून को और प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं के ढोंगी बाबाओं के जाल में फंसने पर चिंता जताई और वैज्ञानिक सोच अपनाने की अपील की।

दलबदल रोकने के लिए संसद में लाएंगी निजी विधेयक

सुप्रिया सुले ने राजनीति में लगातार बढ़ रहे दलबदल पर भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वह संसद में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश करेंगी, जिसके तहत कोई भी निर्वाचित सांसद या विधायक बिना इस्तीफा दिए अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान पार्टी नहीं बदल सकेगा।उन्होंने कहा कि जनता किसी व्यक्ति को उसके दल और विचारधारा के आधार पर चुनती है। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद दल बदलना मतदाताओं के जनादेश का अपमान है।

सरकार की योजनाओं पर भी उठाए सवाल

सुले ने महाराष्ट्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई योजनाएं केवल घोषणाओं तक सीमित हैं और आम लोगों को उनका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह विधानसभा और संसद दोनों स्तरों पर जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेंगी।

अब क्या होगा आगे?

सुप्रिया सुले के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर मंदिरों में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो रही है, वहीं दूसरी ओर दलबदल रोकने के लिए उनके प्रस्तावित निजी विधेयक ने भी नई बहस छेड़ दी है।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और क्या मंदिरों से जुड़े मामलों में व्यापक जांच की मांग आगे और जोर पकड़ती है। वहीं संसद में दलबदल विरोधी कानून को लेकर सुप्रिया सुले का प्रस्ताव भी आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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