‘बदबस जी-जेन’ में छिपे थे कई शहरों के नाम
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, ‘बदबस’ कोडवर्ड के अलग-अलग अक्षरों का इस्तेमाल शहरों की पहचान के लिए किया जाता था। पुलिस के अनुसार इसमें ‘ब’ से बरेली, ‘द’ से दिल्ली, दूसरे ‘ब’ से बहादुरगढ़ और ‘स’ से सोनीपत का संकेत लिया जाता था।वहीं ‘जी-जेन’ का इस्तेमाल गिरोह से जुड़े युवा सदस्यों के संदर्भ में किए जाने की बात जांच में सामने आई है। पुलिस के अनुसार हथियारों की कथित सप्लाई के दौरान इसी कोडवर्ड के जरिए संपर्क और डिलीवरी की जानकारी साझा की जाती थी।जांच एजेंसियों को कथित तौर पर विदेश में बैठे गिरोह से जुड़े चिराग के सोशल मीडिया खातों में भी इस कोडवर्ड के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं। अब पुलिस इन डिजिटल गतिविधियों की भी जांच कर रही है।

अंकित की हत्या में इस्तेमाल पिस्टल भी इसी नेटवर्क से पहुंची?
पुलिस जांच का सबसे अहम पहलू यह है कि अंकित बालियान की हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्टल के संबंध भी इसी कथित हथियार सप्लाई नेटवर्क से जोड़े जा रहे हैं।पुलिस के मुताबिक, यह हथियार बरेली से दिल्ली और बहादुरगढ़ होते हुए सोनीपत पहुंचा था। इसके बाद पिस्टल कथित तौर पर उन लोगों तक पहुंची, जिनका नाम हत्याकांड की जांच में सामने आया है। पुलिस के अनुसार मुठभेड़ में मारे गए सुमित और मोहित तक भी इसी हथियार के पहुंचने की कड़ी की जांच की जा रही है।हालांकि हथियार की पूरी सप्लाई चेन और हत्या में उसकी भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है। पुलिस साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर प्रत्येक कड़ी की पुष्टि करने में जुटी है।

यूपी से उत्तराखंड और पंजाब तक नेटवर्क की जांच
जांच का दायरा केवल हरियाणा और दिल्ली तक सीमित नहीं है। पुलिस के अनुसार कथित नेटवर्क के तार पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड तक जुड़े होने की आशंका है।जांच में सोनीपत, रोहतक, करनाल, हिसार, भिवानी, सिरसा और पानीपत जैसे हरियाणा के कई जिलों के अलावा दिल्ली के सरोजनी नगर क्षेत्र का भी जिक्र सामने आया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ तथा उत्तराखंड के देहरादून तक संभावित हथियार सप्लाई की कड़ियों को खंगाला जा रहा है।पुलिस अब बरेली में कथित हथियार सप्लायर की तलाश में भी जुटी है। जांच अधिकारियों का मानना है कि सप्लाई नेटवर्क की मुख्य कड़ी तक पहुंचने के बाद कई और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

वारदात से महीनों पहले चोरी कराई जाती थीं गाड़ियां
पुलिस की जांच में कथित नेटवर्क का एक और पहलू सामने आया है। जांच के अनुसार वारदात के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों को कथित तौर पर कई महीने पहले ही चोरी कराया जाता था।बताया जा रहा है कि शामली, मेरठ और आसपास के क्षेत्रों से बाइक और कारें वारदात से करीब चार महीने पहले चोरी कराई जाती थीं। इन वाहनों का इस्तेमाल कथित तौर पर शूटरों की आवाजाही के लिए किया जाता था।पुलिस के अनुसार वारदात से ठीक पहले वाहनों की नंबर प्लेट बदलने की बात भी सामने आई है। इसके बाद किसी दूसरे जिले के वाहन का नंबर लगाया जाता था, ताकि वास्तविक वाहन की पहचान करना मुश्किल हो सके।जांच एजेंसियां अब चोरी हुए वाहनों और अंकित हत्याकांड के बीच संभावित कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही हैं।

सोनीपत और बहादुरगढ़ पर पुलिस की खास नजर
एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, जांच में सोनीपत और बहादुरगढ़ कथित हथियार सप्लाई के प्रमुख ठिकानों के तौर पर सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक हथियारों की कथित डिलीवरी के दौरान सुनसान जगहों, सड़क किनारे या झाड़ियों के आसपास शूटरों तक हथियार पहुंचाए जाते थे।जांच में एडवांस रकम दिए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और अलग-अलग स्थानों पर उनकी क्या भूमिका थी।

पानीपत के दो युवकों से पूछताछ
अंकित बालियान हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस ने पानीपत के दो युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। पुलिस को आशंका है कि दोनों ने फरार बताए जा रहे शूटर सत्यम और आर्यन की किसी स्तर पर मदद की हो सकती है।हालांकि हिरासत में लिए गए युवकों की वास्तविक भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उनका कथित तौर पर शूटरों से क्या संबंध था।
अंकित के पिता को पुलिस पर भरोसा
इस बीच अंकित बालियान के पिता सतबीर सिंह ने पुलिस की जांच पर भरोसा जताया है। बंतीखेड़ा गांव में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनीष चौहान और रालोद नेता राजन जावला ने उनके घर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की और परिवार को ढांढस बंधाया।अंकित के पिता ने उम्मीद जताई कि हत्याकांड में फरार आरोपियों के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई होगी और परिवार को न्याय मिलेगा।
जांच में खुलेंगी नेटवर्क की और कड़ियां?
अंकित बालियान हत्याकांड की जांच में अब पुलिस का फोकस केवल वारदात को अंजाम देने वालों तक सीमित नहीं है। कथित हथियार सप्लाई, चोरी के वाहनों की व्यवस्था, शूटरों की आवाजाही और अलग-अलग राज्यों में मौजूद संभावित संपर्कों की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।‘बदबस जी-जेन’ कोडवर्ड और बरेली से सोनीपत तक कथित हथियार सप्लाई की जानकारी ने जांच को नया मोड़ दिया है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अंकित की हत्या तक इस कथित नेटवर्क की भूमिका कितनी गहरी थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और सामने आए दावों की पुष्टि साक्ष्यों तथा आगे की कानूनी कार्रवाई के आधार पर होगी। आरोप या पुलिस की प्रारंभिक जांच को अंतिम दोष सिद्धि नहीं माना जा सकता।
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