मऊ उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में मेडिकल स्टोर और निजी क्लीनिकों की आड़ में चल रहे कथित अवैध गर्भपात नेटवर्क का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एक स्टिंग ऑपरेशन के दौरान ऐसे कई दावे सामने आए, जिन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्टिंग में शामिल टीम ने डमी मरीज के जरिए जिले के विभिन्न अस्पतालों, क्लीनिकों और मेडिकल स्टोरों का रुख किया, जहां कथित तौर पर बिना पर्याप्त चिकित्सकीय प्रक्रिया और दस्तावेजों के गर्भपात कराने की पेशकश की गई। जांच के दौरान सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि कुछ स्थानों पर संचालकों ने न केवल गर्भपात कराने का भरोसा दिलाया, बल्कि कम उम्र की किशोरियों के गर्भपात तक का दावा किया। एक क्लीनिक की संचालक ने बातचीत में कहा कि वे पहले भी 15 वर्ष की किशोरी का गर्भपात करा चुके हैं और इसमें किसी तरह की परेशानी नहीं होती। उन्होंने कथित तौर पर गर्भपात की दवाओं और प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा पूरे उपचार के लिए निर्धारित रकम भी बताई।स्टिंग ऑपरेशन में यह भी सामने आया कि कई जगहों पर बिना डॉक्टर के पर्चे, बिना अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और बिना किसी वैध चिकित्सकीय जांच के गर्भपात से संबंधित दवाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं। रिपोर्टर को डमी मरीज का परिचित बनकर विभिन्न केंद्रों पर भेजा गया, जहां कुछ संचालकों ने गर्भपात के लिए दो हजार रुपये से लेकर दस हजार रुपये तक का खर्च बताया। अधिकांश स्थानों पर भरोसा दिलाया गया कि प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है और किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी।मामले का सबसे संवेदनशील पहलू तब सामने आया जब कोपागंज क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में कथित तौर पर नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त से जुड़ी बातें सामने आईं। बातचीत के दौरान वहां मौजूद लोगों ने दावा किया कि यदि गर्भ अधिक समय का हो और बच्चा जन्म ले ले, तो उसे ऐसे दंपतियों को दिया जा सकता है जो बच्चे की चाह रखते हैं। इसके बदले आर्थिक लाभ मिलने की बात भी कही गई। कथित तौर पर यह भी कहा गया कि यदि लड़का हुआ तो उसे खरीदने वाले आसानी से मिल सकते हैं। जांच के दौरान टीम जिले के कोपागंज, अमिला, मादी सिपाह, थानीदास और पुराघाट क्षेत्रों में पहुंची। कई स्थानों पर मेडिकल स्टोरों के साथ क्लीनिक संचालित होते मिले, जहां गर्भपात संबंधी सेवाएं देने के संकेत मिले। कुछ जगहों पर कर्मचारियों ने सीधे तौर पर मरीज को भर्ती कर दवाओं के जरिए गर्भपात कराने की प्रक्रिया बताई, जबकि अन्य स्थानों पर दूसरे क्लीनिकों का नाम सुझाया गया।

अमिला क्षेत्र के एक केंद्र में टीम को बताया गया कि पहले दवा दी जाएगी, जिससे ब्लीडिंग शुरू होगी। इसके बाद मरीज को कुछ घंटों या एक-दो दिन तक निगरानी में रखा जाएगा। वहीं, दूसरे स्थान पर संचालकों ने दावा किया कि गर्भपात के बाद फॉलोअप भी कराया जाएगा। बातचीत में यह भी सामने आया कि कई जगहों पर यह काम लंबे समय से जारी है और स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही। स्टिंग ऑपरेशन के दौरान यह भी देखा गया कि कुछ क्लीनिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के बेहद नजदीक संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की मौजूदगी के बावजूद ऐसे केंद्रों पर कथित तौर पर गर्भपात संबंधी गतिविधियों के आरोप गंभीर सवाल खड़े करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भपात से जुड़े मामलों में कानून और चिकित्सा मानकों का पालन बेहद जरूरी है, क्योंकि लापरवाही मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है।हाल के वर्षों में प्रदेश के कई जिलों से अवैध गर्भपात केंद्रों, झोलाछाप चिकित्सकों और बिना लाइसेंस संचालित अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं। कई मामलों में महिलाओं की मौत और गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं की घटनाएं भी दर्ज की गई हैं। ऐसे में मऊ से सामने आए इन दावों ने एक बार फिर स्वास्थ्य तंत्र की निगरानी और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है।मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने कहा कि अवैध क्लीनिकों और गर्भपात से जुड़ी शिकायतें बेहद गंभीर हैं। विभाग की टीमें जल्द ही संबंधित केंद्रों पर जांच और छापेमारी करेंगी। साथ ही सरकारी अस्पतालों के आसपास संचालित होने वाले संदिग्ध केंद्रों की भी पड़ताल की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल इस खुलासे ने जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, अवैध क्लीनिकों के संचालन और गर्भपात संबंधी नियमों के पालन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं कि इन आरोपों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और दोषी पाए जाने वालों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
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